
नई दिल्ली: महाराष्ट्र में कृषि ऋण माफी को लेकर सियासत तेज हो गई है। एनसीपी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने 29 जून को छत्रपति संभाजीनगर में किसानों के समर्थन में बड़े विरोध प्रदर्शन का एलान किया है। उन्होंने कहा कि अगर राज्य सरकार ने किसानों की मांगों पर जल्द फैसला नहीं लिया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, रोहित पवार ने जालना में पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन राजनीतिक नहीं, बल्कि किसानों के हित में आयोजित किया जा रहा है। उनका कहना है कि राज्य सरकार की मौजूदा कृषि ऋण माफी योजना की शर्तें इतनी सख्त हैं कि बड़ी संख्या में किसान इसका लाभ नहीं ले पाएंगे।
29 जून को होगा विरोध प्रदर्शन
रोहित पवार ने बताया कि 29 जून को सुबह 10:30 बजे से विरोध प्रदर्शन शुरू होगा। यदि सरकार किसानों की मांगों पर ध्यान नहीं देती है, तो आगे ‘रास्ता रोको’, जनसभाएं और जरूरत पड़ने पर ‘जेल भरो’ आंदोलन भी किया जाएगा।
70 प्रतिशत किसान रह सकते हैं योजना से बाहर
रोहित पवार ने आरोप लगाया कि सरकार ने कृषि ऋण माफी योजना में कई शर्तें जोड़ दी हैं। उनका दावा है कि इन शर्तों के कारण लगभग 70 प्रतिशत किसान योजना का लाभ नहीं उठा पाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के साथ न्याय करने के बजाय केवल घोषणाएं कर रही है। किसानों को बिना शर्त कर्ज माफी मिलनी चाहिए।
कई विपक्षी नेता होंगे शामिल
रोहित पवार ने बताया कि इस आंदोलन में एनसीपी (एसपी) सांसद सुप्रिया सुले, प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे, पूर्व मंत्री राजेश टोपे, महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल और किसान नेता अजीत नवले समेत कई विपक्षी नेता शामिल होंगे।
सरकार पर लगाए कई आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रोहित पवार ने राज्य सरकार की विभिन्न नीतियों की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसानों के मुद्दों को गंभीरता से नहीं ले रही है और कृषि क्षेत्र से जुड़े कई फैसलों में किसानों के हितों की अनदेखी की जा रही है।
एनसीपी के विलय की अटकलों को किया खारिज
एनसीपी के दोनों गुटों के संभावित एकीकरण की चर्चा पर रोहित पवार ने कहा कि ऐसी खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अजीत पवार के अलग होने के बाद यह मुद्दा समाप्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि उनकी जालना यात्रा का उद्देश्य केवल 29 जून को होने वाले किसान आंदोलन की तैयारियों की समीक्षा करना और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करना था।



