मर्चेंट नेवी के पूर्व अधिकारी व उनके 100 वर्षीय पिता को ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर 1.30 करोड़ रु ठगे

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 28 Aug 2025 07:59 PM
मर्चेंट नेवी के पूर्व अधिकारी व उनके 100 वर्षीय पिता को ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर 1.30 करोड़ रु ठगे
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लखनऊ/कासरगोड. प्रदेश की राजधानी में मर्चेंट नेवी के सेवानिवृत्त अधिकारी और उनके 100 वर्षीय पिता से साइबर अपराधियों ने कथित रूप से 1.29 करोड़ रुपये की ठगी कर ली. पुलिस ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि साइबर ठगों ने सीबीआई अधिकारी बनकर 70 वर्षीय सुरिंदर पाल सिंह और उनके पिता हरदेव सिंह को छह दिन तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ रखा. यहां सैनिक हाउसिंग सोसाइटी के निवासी सुरिंदर पाल सिंह ने बुधवार को सरोजिनी नगर थाने में शिकायत दर्ज कराई.

शिकायत के अनुसार, 20 अगस्त को हरदेव सिंह को एक अनजान नंबर से कॉल आया. कॉल करने वाले ने खुद को सीबीआई अधिकारी आलोक सिंह बताया और बुजुर्ग व्यक्ति पर धनशोधन का आरोप लगाया और दावा किया कि उनके नाम पर गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है. पुलिस ने बताया कि इसके बाद जालसाज.ों ने व्हाट्सऐप के जरिए उन्हें “डिजिटल अरस्टे” कर लिया.

इसके बाद दूसरे शख्स ने सीबीआई का अन्य अधिकारी बनकर हरदेव सिंह को कॉल किया और उन्हें फिर धमकी दी. सौ साल के बुजुर्ग को सत्यापन के लिए उनके (ठगों के) साथ बैंक खाते की जानकारी साझा करने के लिए कहा गया. पुलिस ने बताया कि जब सुरिंदर पाल सिंह घर लौटे, तो उन्हें अपने पिता डरे हुए मिले. पुलिस के मुताबिक, अपने पिता की गिरफ्तारी के डर से, सुरिंदर ने ठगों की मांग मान लीं. उनका अपने पिता के साथ संयुक्त खाता है. शिकायत में कहा गया है कि 21 से 26 अगस्त के बीच उन्होंने ठगों द्वारा दिए गए बैंक खातों में 1.29 करोड़ रुपये स्थानांतरित कर दिए. सरोजिनी नगर थाने के प्रभारी (एसएचओ) राजदेव राम प्रजापति ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है.

केरल में बुजुर्ग दंपति को 11 दिन तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखा, 2.4 करोड़ रुपये की ठगी

केरल में कासरगोड जिले के कान्हागड में 11 दिन तक ”डिजिटल अरेस्ट” में रखे जाने के बाद साइबर धोखेबाजों ने एक बुजुर्ग दंपति से 2.4 करोड़ रुपये की ठगी की. पुलिस ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी. ‘डिजिटल अरेस्ट’ में साइबर अपराधी फर्जी सरकारी अधिकारी बनकर वीडियो कॉल के माध्यम से लोगों को डरा-धमकाकर उनसे बड़ी रकम वसूलते हैं. पुलिस के अनुसार, पीड़ित 69 वर्षीय सेवानिवृत्त एक शिक्षक और उनकी 72 वर्षीय पत्नी हैं, जो एक सेवानिवृत्त सरकारी होम्योपैथी चिकित्सक हैं. यह दंपति कान्हागड में एक किराए के मकान में अकेला रहता है.

सेवानिवृत्त शिक्षक ने कहा, ”दस अगस्त की सुबह मेरी पत्नी को एक अंतरराष्ट्रीय नंबर से कॉल आया. मैंने फोन उठाया तो हिंदी में बोल रहे एक व्यक्ति ने दावा किया कि वह भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) से है. उसने कहा कि मेरी पत्नी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा जांचे जा रहे धनशोधन के एक मामले में शामिल है और एजेंसी का एक अधिकारी जल्द ही उनसे संपर्क करेगा.” उन्होंने कहा कि कुछ मिनट बाद, दंपति को एक व्हाट्सएप वीडियो कॉल आया. उन्होंने कहा, ”स्क्रीन पर पुलिस की वर्दी पहने एक आदमी था जिसने हमें शांत रहने को कहा. जल्द ही एक अनुवादक कॉल में शामिल हो गया और हिंदी से मलयालम में अनुवाद करने लगा.

उन्होंने दावा किया कि जेट एयरवेज के पूर्व अध्यक्ष नरेश गोयल के आवास पर छापेमारी के दौरान मेरी पत्नी का पहचान पत्र और बैंक विवरण बरामद हुए थे. सबूत के तौर पर उन्होंने एक एटीएम कार्ड भी दिखाया, हालांकि विवरण स्पष्ट नहीं थे. उन्होंने आरोप लगाया कि गोयल और मेरी पत्नी के बीच वित्तीय लेन-देन हुआ था.” सेवानिवृत्त शिक्षक ने कहा कि जब उन लोगों ने दिखाए गए बैंक में कोई खाता होने से इनकार किया, तो धोखेबाजों ने उनके नाम का एक फर्जी आधार कार्ड दिखाया.

उन्होंने कहा, ”उन्होंने हमें हर समय वीडियो कॉल चालू रखते हुए मोबाइल फोन के सामने रहने का आदेश दिया. हमें बुनियादी जरूरतों के लिए भी स्क्रीन पर दिख रहे व्यक्ति से अनुमति लेनी पड़ती थी. मेरी पत्नी को डॉक्टर के पास जाने के लिए भी अनुमति लेनी पड़ती थी.” उन्होंने कहा कि 12 अगस्त को धोखेबाजों ने बताया कि उनके मामले की सुनवाई मुंबई की सीबीआई अदालत में ऑनलाइन तरीके से की जाएगी.

उन्होंने कहा, ”हमें एक अदालत कक्ष दिखाया, जहां एक न्यायाधीश और वकील मौजूद थे. जब न्यायाधीश अंदर आए, तो हमें खड़े होने का निर्देश दिया गया. हमारे नाम पुकारे गए और कुछ चर्चाएं हुईं, लेकिन हम समझ नहीं पाए कि क्या कहा जा रहा था.” बाद में, उन्हें बताया गया कि उनके बैंक खातों को ”सत्यापित” करने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि 19 से 21 अगस्त के बीच, दंपति ने निर्देशानुसार चार लेन-देन में 2.4 करोड़ रुपये हस्तांतरित कर दिए. कासरगोड साइबर पुलिस ने 22 अगस्त को भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 316(4) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(डी) के तहत मामला दर्ज किया.

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