उदन्त से मार्त्तण्ड तक: ‘पत्रकारिता का ध्येय केवल सूचना नहीं, समाज में प्रकाश भी’; द्विशताब्दी पर ये स्मरण अहम

संस्कृत भाषा में ‘उदन्त’ शब्द का मूल अर्थ है-संपूर्ण समाचार, वार्ता, प्रवृत्ति, वृत्तांत या पूर्ण जानकारी। संस्कृत के अमरकोष और मेदिनिकोश के साथ ही मोनियर-विलियम्स द्वारा 1851 में संपादित संस्कृत-अंग्रेजी शब्दकोश में ‘उदन्त’ को समाचार, बुद्धिमत्ता, पूर्ण विवरण और शुभ सूचना के अर्थ में ग्रहण किया गया है। महाकवि कालिदास के मेघदूत में ‘कान्तोदन्तः’ तथा रघुवंश में ‘प्रियोदन्तम्’ जैसे प्रयोग सिद्ध करते हैं कि ‘उदन्त’ केवल सूचना नहीं, बल्कि भावनात्मक और सामाजिक संवाद का माध्यम है।

संस्कृत के व्याकरण के अनुसार ‘उदन्त’ शब्द की व्युत्पत्ति ‘उद्गतः अन्तः यस्मात’ मानी गई है। तात्पर्य है कि वह जिससे किसी घटना का पूरा निष्कर्ष या संपूर्ण विवरण प्रकट हो जाए। यही कारण है कि प्राचीन भारतीय परंपरा में ‘उदन्त’ केवल खबर नहीं, बल्कि प्रामाणिक वृत्तांत माना जाता था। आधुनिक पत्रकारिता का मूल तत्व भी यही होना चाहिए। संस्कृत भाषा में समाचार शब्द उस अर्थ में नहीं बनता, जिसमें प्रायः उसका प्रयोग किया जाता है।

यही कारण है कि पिछले पांच दशकों से आकाशवाणी से प्रसारित होने वाले संस्कृत समाचारों का आरंभ ‘संप्रति वार्ताः श्रूयन्ताम्’ से होता है, क्योंकि संस्कृत में न्यूज के लिए वार्ता, प्रवृत्ति, वृत्तांत और उदन्त जैसे शब्द उपलब्ध हैं।

जब हिंदी के प्रथम समाचार पत्र का नाम उदन्त मार्त्तण्ड रखा गया, तब उसमें गहन सांस्कृतिक प्रतीक छिपा था। इसका सांस्कृतिक संबंध संस्कृत भाषा से जोड़ा गया। उदन्त और मार्त्तण्ड, दोनों शब्द संस्कृत से लिए गए हैं। मार्त्तण्ड का अर्थ सूर्य है। इस प्रकार उदन्त मार्त्तण्ड का आशय हुआ-समाचार-सूर्य या समाचारों का प्रकाश फैलाने वाला। यह नाम भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक जनसंचार के अद्भुत समन्वय का उदाहरण है।

हिंदी पत्रकारिता की द्विशताब्दी पर उदन्त शब्द हमें स्मरण कराता है कि पत्रकारिता का ध्येय केवल सूचना देना नहीं, बल्कि समाज को प्रकाश देना भी है, ठीक उसी प्रकार जैसे मार्त्तण्ड संपूर्ण जगत को आलोकित करता है।

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