सरकार ने 2023-24 के लिए कृषि ऋण लक्ष्य 11% बढ़ाकर 20 लाख करोड़ रुपये किया

नयी दिल्ली. सरकार ने बुधवार को पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन पर ध्यान केंद्रित करते हुए अगले वित्त वर्ष के लिए कृषि ऋण लक्ष्य को 11 प्रतिशत बढ़ाकर 20 लाख करोड़ रुपये करने की घोषणा की. कृषक समुदाय को रियायती दरों पर अधिक कृषि कर्ज देने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2023-24 का बजट पेश करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की एक नई उप-योजना 6,000 करोड़ रुपये के लक्षित निवेश के साथ शुरू की जाएगी, ताकि मछुआरों, मछली विक्रेताओं और सूक्ष्म और लघु उद्यमों की गतिविधियों को और प्रभावी बनाया जा सके, मूल्य श्रृंखला क्षमता में सुधार किया जा सके और मत्स्यपालन के लिए बाजार का विस्तार किया जा सके.

उन्होंने कहा कि समुद्री उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए झींगा मछली के चारे के घरेलू विनिर्माण के लिए प्रमुख लागतों पर सीमा शुल्क भी कम किया जाएगा. वित्त मंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती को अपनाने के लिए सरकार इस उद्देश्य के लिए एक करोड़ किसानों को सुविधा प्रदान करेगी और राष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग सूक्ष्म उर्वरक और कीटनाशक निर्माण संजाल बनाने के लिए 10,000 जैव-लागत संसाधन केंद्र भी स्थापित करेगी.

सीतारमण ने कहा कि इसके अलावा सरकार 2,200 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों के लिए रोग मुक्त, गुणवत्तायुक्त रोपण सामग्री की उपलब्धता को बढ़ावा देने के लिए ‘आत्मनिर्भर स्वच्छ पौध कार्यक्रम’ शुरू करेगी.
वित्त मंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में युवा उद्यमियों द्वारा कृषि-स्टार्टअप इकाइयों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार एक कृषि त्वरित कोष (एएएफ) स्थापित करेगी. समावेशी, किसान-केंद्रित समाधान उपलब्ध कराने के मकसद से कृषि के लिए एक डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा भी बनाया जाएगा.

वित्त मंत्री ने कहा कि भारत को मोटे अनाज, जिसे ‘श्री अन्न’ भी कहा जाता है, का एक वैश्विक केंद्र बनाने के लिए, हैदराबाद स्थित भारतीय मोटा अनाज अनुसंधान संस्थान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सर्वोत्तम व्यवहार, अनुसंधान और प्रौद्योगिकियों को साझा करने के लिए उत्कृष्टता केंद्र के रूप में समर्थन दिया जाएगा.

भारत दुनिया में मोटे अनाज का सबसे बड़ा उत्पादक और दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक देश है. देश में ज्वार, रागी, बाजरा, कुट्टू, रामदाना, कांगनी, कुटकी, कोदो, चीना और समा जैसे कई प्रकार के मोटे अनाज उगाए जाते हैं. उन्होंने कहा कि इन मोटे अनाज के कई स्वास्थ्य लाभ हैं, और ये सदियों से हमारे भोजन का अभिन्न अंग रहे हैं. उन्होंने कहा कि मैं छोटे किसानों द्वारा इन ‘श्री अन्न’ को उगाकर नागरिकों के स्वास्थ्य में योगदान देने के लिए की गई बड़ी सेवा को गर्व के साथ स्वीकार करती हूं.

वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन पर ध्यान देने के साथ कृषि ऋण लक्ष्य को बढ़ाकर 20 लाख करोड़ रुपये किया जाएगा.’’ चालू वित्त वर्ष 2022-23 के लिए कृषि ऋण लक्ष्य 18 लाख करोड़ रुपये है. सरकार हर साल कृषि क्षेत्र के लिए ऋण लक्ष्य बढ़ा रही है. आमतौर पर, कृषि ऋण पर नौ प्रतिशत की ब्याज दर लगती है. हालांकि, सरकार सस्ती दर पर अल्पकालिक फसल ऋण उपलब्ध कराने और कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने में मदद करने के लिए ब्याज सहायता प्रदान कर रही है.

किसानों को सात प्रतिशत सालाना की प्रभावी दर पर तीन लाख रुपये तक का अल्पावधि कृषि ऋण सुनिश्चित करने के लिए सरकार दो प्रतिशत ब्याज सब्सिडी प्रदान कर रही है. औपचारिक ऋण प्रणाली में छोटे और सीमांत किसानों के दायरे को बढ़ाने के लिए रिजर्व बैंक ने गारंटी-मुक्त कृषि ऋण की सीमा को एक लाख रुपये से बढ़ाकर 1.6 लाख रुपये करने का फैसला किया है.

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