
बेंगलुरु. कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने मंगलवार को कहा कि राज्यपाल थावरचंद गहलोत को केंद्र सरकार के नहीं बल्कि भारत के राष्ट्रपति के प्रतिनिधि की तरह काम करना चाहिए. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यपाल को अभियोजन की मंजूरी देने के मामले में ”चयनात्मक” रवैया नहीं अपनाना चाहिए.
सिद्धरमैया ने यहां संवाददाताओं से कहा, ”राज्यपाल एक संवैधानिक पद है और हम इसका सम्मान करते हैं. हमारा कहना है कि उन्हें केंद्र सरकार के नहीं बल्कि भारत के राष्ट्रपति के प्रतिनिधि की तरह काम करना चाहिए.” गहलोत ने 16 अगस्त को मैसूरु शहरी विकास प्राधिकरण (एमयूडीए) भूखंड आवंटन ‘घोटाले’ के संबंध में सिद्धरमैया के खिलाफ अभियोजन की अनुमति दी थी.
मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि कर्नाटक लोकायुक्त ने श्री साईं वेंकटेश्वर खनिज मामले के संबंध में 23 नवंबर, 2023 को केंद्रीय इस्पात एवं भारी उद्योग मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए राज्यपाल की मंजूरी मांगी थी, लेकिन अब तक अनुमति नहीं दी गई है. राज्य लोकपाल ने सोमवार को फिर से राज्यपाल को एक प्रस्ताव सौंपा, जिसमें कुमारस्वामी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल करने की अनुमति मांगी गयी है.
कुमारस्वामी पर आरोप है कि उन्होंने कानून का उल्लंघन करते0हुए तथा 2007 में मुख्यमंत्री रहते हुए निजी फर्म को खनन पट्टा दिया था. सिद्धरमैया ने यह भी कहा कि राज्यपाल ने लोकायुक्त को पूर्व भाजपा मंत्रियों – शशिकला जोले, मुरुगेश निरानी और जी. जनार्दन रेड्डी पर मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं दी. उन्होंने कहा, ”दूसरी ओर, टी.जे. अब्राहम ने 26 जुलाई को सुबह 11 बजे राज्यपाल के पास मेरे खिलाफ एक (निजी) शिकायत दर्ज कराई और 10 घंटे बाद मुझे कारण बताओ नोटिस दिया गया. क्या यह भेदभाव नहीं है?”
भाजपा मेरे खिलाफ बेबुनियाद आरोप लगा रही : सिद्धरमैया
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने मंगलवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी उनपर निराधार आरोप लगा रही है,क्योंकि वह हमेशा गरीबों, दलितों और सामाजिक न्याय के पक्षधर रहे हैं. उनकी टिप्पणी राज्यपाल थावरचंद गहलोत द्वारा उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों के संबंध में जांच और मुकदमा चलाने की अनुमति देने की पृष्ठभूमि में आई है.
पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत राजीव गांधी और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत देवराज अर्स को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में सिद्धरमैया ने आरोप लगाया, “भाजपा के लिए गरीबों, पिछड़े वर्गों, दलितों और अल्पसंख्यकों के साथ खड़ा होना असंभव है.” मुख्यमंत्री ने यहां कांग्रेस के राज्य मुख्यालय में कहा, “कांग्रेस हमेशा महिलाओं, गरीबों, अल्पसंख्यकों और दलितों की समर्थक रही है. चूंकि, मैं समाज में असमानता के खिलाफ हूं और गरीबों का समर्थक हूं, इसलिए भाजपा मेरे खिलाफ है और वह सब कर रही है, जो नहीं किया जाना चाहिए. इसलिए वे मेरे खिलाफ बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं.”
सिद्धरमैया ने आरोप लगाया कि भाजपा हमेशा चाहती है कि गरीब लोग उसी स्थिति में रहें और सामाजिक और आर्थिक रूप से मजबूत न बनें. सिद्धरमैया ने मैसूरु शहरी विकास प्राधिकरण (एमयूडीए) द्वारा स्थलों के आवंटन में अनियमितताओं से संबंधित आरोपों को ‘मनगढं त’ करार दिया है. वहीं, भाजपा ने पारदर्शी और निष्पक्ष जांच के लिए मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग की है.



