पहली तिमाही में वृद्धि दर अच्छी रहनी चाहिए, महंगाई काबू में रखना प्राथमिकता: सीतारमण

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Fri, 25 Aug 2023 09:26 PM
पहली तिमाही में वृद्धि दर अच्छी रहनी चाहिए, महंगाई काबू में रखना प्राथमिकता: सीतारमण

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नयी दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अप्रैल-जून तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर अच्छी रहने की उम्मीद जताते हुए शुक्रवार को कहा कि मुद्रास्फीति को काबू में करना सरकार की प्राथमिकता है. सीतारमण ने यहां बी-20 शिखर सम्मेलन में कहा कि सार्वजनिक पूंजीगत व्यय पर बजट में जोर दिए जाने के ‘सकारात्मक असर’ को निजी क्षेत्र के निवेश में आ रही तेजी के रूप में देखा जा सकता है.

उन्होंने सरकार की प्राथमिकताओं का जिक्र करते हुए कहा कि ध्यान आत्मनिर्भर भारत पर है लेकिन जरूरी चीजों के आयात पर कोई रोक नहीं लगाई जाएगी. उन्होंने आर्थिक गतिविधियों को झटकों से बचाने के लिए आपूर्ति शृंखला में विविधता लाने की जरूरत पर भी बल दिया.

उन्होंने प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में भारत को सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बताते हुए कहा कि कुछ ही दिन बाद आने वाले चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के आंकड़े अच्छे रहने चाहिए. उन्होंने कहा, “आज जिस तरह के हालात हैं, उनमें किसी को पता नहीं है, क्या होगा. लेकिन सबको लगता है कि पहली तिमाही अच्छी बीती है और इसके आंकड़े भी अच्छे रहने चाहिए.” पहली तिमाही के आंकड़े 31 अगस्त को जारी किए जाएंगे.

सीतारमण ने कहा कि देश की आर्थिक वृद्धि के लिए मुद्रास्फीति पर काबू पाना उनकी प्राथमिकता में है. इसकी वजह यह है कि मुद्रास्फीति लगातार अधिक रहने पर मांग में कमी आएगी. हालांकि उन्होंने उच्च मुद्रास्फीति पर नियंत्रण के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने की प्रवृत्ति को लेकर आशंका भी जाहिर की. उन्होंने कहा, “ज्यादातर अर्थव्यवस्थाओं में यह समस्या है. मुद्रास्फीति से लड़ने के इकलौते साधन के रूप में ब्याज दर का इस्तेमाल करना और आपूर्ति पक्ष से जुड़े कारकों पर ध्यान न देने से मुद्रास्फीति का पूर्ण समाधान नहीं मिल पाएगा.”

वित्त मंत्री ने कहा, “अस्थायी तौर पर इसका कुछ असर हो सकता है लेकिन यह आपूर्ति पक्ष से जुड़े मसलों को उजागर भी कर सकता है…. ऐसी स्थिति में केंद्रीय बैंकों को आज के समय में मुद्रास्फीति नियंत्रण के साथ वृद्धि से जुड़ी प्राथमिकताओं को भी ध्यान में रखना होगा.” खुदरा मुद्रास्फीति जुलाई के महीने में बढ़कर 7.44 प्रतिशत हो गई जो पिछले 15 महीनों का उच्च स्तर है. इसमें टमाटर समेत मौसमी सब्जियों की कीमतों में हुई बढ़ोतरी की अहम भूमिका रही है.

उन्होंने कहा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर के बारे में अगले कदम को लेकर खासी दिलचस्पी है क्योंकि इसका प्रभाव हम पर भी पड़ सकता है. फेडरल रिजर्व के गवर्नर जेरोम पॉवेल मौद्रिक नीति के बारे में घोषणा कर सकते हैं. सीतारमण ने कहा कि सार्वजनिक पूंजीगत व्यय बढ़ाने का बजट में ऐलान किए जाने के बाद निजी क्षेत्र के पूंजीगत व्यय के ‘सकारात्मक संकेत’ भी नजर आने लगे हैं. उन्होंने विदेशी निवेश को आर्थिक वृद्धि के लिए अहम बताते हुए कहा कि सरकार ने निवेश आर्किषत करने के लिए कई सुधार किए हैं. इसके साथ ही उन्होंने जलवायु परिवर्तन से संबंधित गतिविधियों के लिए वित्तपोषण का भी उल्लेख किया.

सीतारमण ने कहा, वह चीन की बात करने की जगह भारत की कहानी सुनाना पसंद करेंगी

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि वह चीन की बात करने की जगह ‘भारत की कहानी सुनाना पसंद करेंगी.’ गौरतलब है कि चीन में इस समय आर्थिक नरमी देखी जा रही है. उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी में बी-20 सम्मेलन के दौरान यह टिप्पणी की. उसने पूछा गया था कि चीन में मंदी का भारत और बाकी दुनिया पर क्या प्रभाव पड़ेगा.

उन्होंने यह स्वीकार किया कि चीन के घटनाक्रम सभी के लिए चिं ता का विषय है. उन्होंने कहा, ”पर मैं भारत की कहानी बताना चाहूंगा.” वित्त मंत्री ने कहा, ”मैं चीन में होने वाले घटनाक्रम पर नजर रखूंगी, लेकिन मेरा ध्यान भारत के वर्तमान समय, मौजूद अवसरों, कौशल और कार्य संस्कृति पर अधिक है. यहां युवा आगे बढ़ने और खुद को साबित करने के लिए उत्साहित हैं. इसलिए, हमें भारत की ताकत के बारे में बोलना चाहिए, न कि किसी और की पीड़ा के लिए.” अगले महीने होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन से पहले बी20 सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है.

उन्होंने कहा, ”मैं भारत की मौजूदा ताकत को पेश कर रही हूं. विशेष रूप से युवा आबादी के साथ, जो एक अच्छी अंग्रेजी बोलने वाली आबादी है.” मंत्री ने अपने संबोधन में बुनियादी ढांचे के विकास, स्टार्टअप को बढ़ावा देने और जलवायु मुद्दों के समाधान को लेकर सरकार के उपायों के बारे में बात की.

By Yogesh Kumar Sahu