‘हनुमान चालीसा’ विवाद: धार्मिक भावनाओं को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने की आवश्यकता नहीं है: पवार

पुणे. महाराष्ट्र में ‘हनुमान चालीसा’ के पाठ को लेकर राजनीतिक विवाद के बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के प्रमुख शरद पवार ने सोमवार को कहा कि सार्वजनिक रूप से धार्मिक भावनाओं को प्रर्दिशत करने की कोई आवश्यकता नहीं है. पवार ने साथ ही राज्य में विपक्षी दल भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता गंवाने के बाद कुछ लोग चिंतित हो रहे हैं. उन्होंने एक कार्यक्रम से इतर पत्रकारों से कहा कि यह अच्छी बात है कि राज्य सरकार ने धार्मिक स्थलों पर  लाउडस्पीकर के मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने का फैसला किया है और यदि बैठक से कुछ अच्छा निकलता है तो वह बहुत खुश होंगे.

‘हनुमान चालीसा’ के पाठ को लेकर विवाद जैसे मुद्दों के मद्देनजर राज्य में व्याप्त माहौल के बारे में पूछे जाने पर, पवार ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति की अपने धर्म के बारे में अपनी भावनाएं होती हैं, लेकिन यह अच्छी बात है कि व्यक्ति उस भावना को अपने दिल और अपने घर में रखे. इसे (सार्वजनिक रूप से) प्रर्दिशत करने की कोई आवश्यकता नहीं है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘अगर समुदायों या वर्गों के खिलाफ नफरत फैलाने की कोशिश की जाती है, तो समाज में प्रतिकूल प्रभाव देखा जाएगा. महाराष्ट्र ने कभी इस तरह की स्थिति का अनुभव नहीं किया. हाल में, ऐसी चीजें हो रही हैं. मैं इस पर हैरान हूं.’’

पवार ने कहा कि यदि कोई धार्मिक कार्यक्रम करना चाहता है तो वह अपने घर में भी कर सकता है. उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन, अगर आप मेरे दरवाजे पर उस धार्मिक कार्यक्रम को आयोजित करने का फैसला करते हैं, तो मुझ पर विश्वास रखने वाले लोग चिंतित हो सकते हैं. दुर्भाग्य से, कुछ लोग इस तरह का माहौल बना रहे हैं.’’ उन्होंने कहा कि उनके जैसे लोग हमेशा राज्य में लोगों के बीच नफरत और मतभेदों को रोकने और दोस्ती की भावना रखने की पुरानी परंपरा को बहाल करने का प्रयास करते हैं. विपक्षी नेताओं के इस बयान के बारे में पूछे जाने पर कि महाराष्ट्र में मौजूदा स्थिति में राष्ट्रपति शासन की आवश्यकता है, पवार ने कहा कि यह सच है कि सत्ता से बाहर होने के बाद कुछ लोग चिंतित हो रहे हैं.

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘यह कोई नई बात नहीं है. हर कोई मेरे जैसा नहीं है. वर्ष 1980 में हमारी (राज्य) सरकार बर्खास्त होने के बाद, मुझे देर रात साढ़े 12 बजे इसके बारे में बताया गया था. मैंने तुरंत अपने दोस्तों के साथ (मुख्यमंत्री) आवास खाली कर दिया और अगले दिन किसी अन्य स्थान पर चले गए. हम सभी वानखेड़े स्टेडियम में एक क्रिकेट मैच देखने गए और पूरे दिन का आनंद लिया था.’’ राकांपा प्रमुख ने कहा कि सत्ता आती है और जाती है, चिंता करने की जरूरत नहीं है.

हिंदुत्व एक संस्कृति है, अराजकता नहीं : शिवसेना ने भाजपा पर साधा निशाना

महाराष्ट्र में हनुमान चालीसा के पाठ को लेकर उत्पन्न हुए राजनीतिक विवाद के बीच शिवसेना ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधा और कहा कि हिंदुत्व विचारधारा एक संस्कृति है, अराजकता नहीं. शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के सम्पादकीय में दावा किया कि निर्दलीय सांसद नवनीत राणा और उनके पति एवं विधायक रवि राणा ने जो कुछ भी किया उसके पीछे भाजपा का हाथ था.

मराठी दैनिक पत्र में आरोप लगाया गया कि राणा दम्पति शहर का माहौल खराब करना चाहते हैं. सम्पादकीय में कहा गया कि उन्हें यह सब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कार्यालय परिसर में करना चाहिए.
सम्पादकीय में कहा गया, ‘‘ महाराष्ट्र में हिंदुत्व ठीक चल रहा है, क्योंकि इसका नेतृत्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे कर रहे हैं. राज्य में हनुमान चालीसा के पाठ पर कोई रोक नहीं है, लेकिन मातोश्री के बाहर इसे करने की जिद क्यों थी?’’

दैनिक पत्र में कहा गया, ‘‘ भाजपा द्वारा फैलाई अराजकता का समर्थन नहीं किया जाएगा. हिंदुत्व एक संस्कृति है, अराजकता नहीं.’’ मुंबई पुलिस ने राणा दंपत्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी और बाद में उसमें राजद्रोह का आरोप भी जोड़ दिया. रविवार को मुंबई की एक अदालत ने राणा दंपति को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था. इसके बाद रविवार देर रात अमरावती से सांसद नवनीत राणा को भायखला महिला कारावास ले जाया गया था.

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