WHO के कदम के बाद हरियाणा ने दवा के नमूने कोलकाता की प्रयोगशाला भेजे

चंडीगढ़/बांजुल. हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने बृहस्पतिवार को कहा कि सोनीपत की एक कंपनी द्वारा निर्मित चार कफ सिरप के नमूनों को जांच के लिए कोलकाता स्थित केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला (सीडीएल) भेजा गया है. इससे पहले विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कंपनी की उन चार दवाओं के खिलाफ अलर्ट जारी किया है, जिनके कारण गाम्बिया में 66 बच्चों की मौत होने की आशंका है.

डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम गेब्रेयेसस ने बुधवार को कहा, ‘‘ये चार दवाएं भारत की कंपनी मेडन फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड द्वारा बनाए गए सर्दी एवं खांसी के सिरप हैं. डब्ल्यूएचओ भारत में कंपनी एवं नियामक प्राधिकारियों को लेकर आगे जांच कर रहा है.’’ भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीए) ने पहले ही मामले में जांच शुरू कर दी है.

विज ने फोन पर पीटीआई-भाषा से कहा, “डीसीजीए और हरियाणा के खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की एक टीम ने नमूने एकत्र किए हैं और जांच के लिए उन्हें सीडीएल, कोलकाता भेजा गया है.’’ उन्होंने कहा कि केंद्र के फार्मास्युटिकल विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) से इस संबंध में बातचीत की.

विज ने कहा कि दवा कंपनी द्वारा तैयार कफ सिरप को निर्यात के लिए मंजूरी दी गई थी और “यह देश में बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं है.” विज ने कहा, “सीडीएल रिपोर्ट आने के बाद जरूरी कार्रवाई की जाएगी. रिपोर्ट आने के बाद ही हम किसी निष्कर्ष तक पहुंच सकते हैं.”

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में इस बारे में पूछे जाने पर कहा कि केंद्र इस मुद्दे पर गौर कर रहा है. उन्होंने कहा कि जब कोई अंतरराष्ट्रीय मुद्दा जुड़ा होता है तो भारत सरकार इससे निपटती है और वे इससे निपट रहे हैं.
उन्होंने हालांकि कहा, “अभी तक, हमें इस बात की जानकारी नहीं है कि ये मौतें वास्तव में इन दवाओं की वजहों से हुईं या किसी अन्य वजह से.’’

गाम्बिया ने 66 बच्चों की मौत के बाद कफ सीरप को तुरंत वापस लेने का अभियान चलाया

पश्चिमी अफ्रीका के छोटे से देश गाम्बिया ने किडनी को क्षति से हुई 60 से अधिक बच्चों की मौत का जिम्मेदार ठहराये जा रहे कफ सीरप को तत्काल प्रभाव से वापस लेने के लिए घर-घर अभियान शुरू किया है. ‘द एसोसिएटेड प्रेस’(एपी) से बातचीत में स्वास्थ्य निदेशक डॉ. मुस्तफा बिट्टये ने पुष्टि की कि बच्चों की मौत किडनी में घातक चोट के कारण हुई जिससे देश के 24 लाख लोगों समेत पूरे विश्व में लोग शोकजदा हैं.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इन मौतों को लेकर चेतावनी जारी की है. डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने बुधवार को जारी एक बयान में कहा, ‘‘डब्ल्यूएचओ ने गाम्बिया में चिह्नित की गईं उन चार दूषित दवाओं के लिए अलर्ट जारी किया है, जिनके कारण गुर्दे को गंभीर क्षति से 66 बच्चों की मौत होने की आशंका है.’’ उन्होंने कहा कि बच्चों की मौत परिवारों के लिए एक हृदय विदारक घटना है.

डब्ल्यूएचओ ने कहा कि ये चार दवाएं भारत में उत्पादित कफ सीरप हैं. हालांकि, डब्ल्यूएचओ ने बयान जारी करके साफ कर दिया कि दूषित उत्पादों का अब तक केवल गाम्बिया में पता चला है, इसलिए उन्हें अन्य देशों में वितरित किया जा सकता है. डब्ल्यूएचओ भारत में कंपनी और नियामक प्राधिकरणों के साथ जांच कर रहा है.

गांबिया की मेडिकल अनुसंधान परिषद ने भी चेतावनी जारी की है. परिषद ने बयान जारी करके कहा, ‘‘पिछले हफ्ते हमने किडनी में घाव से ग्रस्त एक बच्ची को अस्पताल में भर्ती कराया था, लेकिन वह मर गई. हम यह पुष्टि करने में सक्षम हैं कि अस्ताल में भर्ती कराये जाने से पहले उसने उनमें से एक दवा ली थी, जिसके वजह से ऐसा होने की आशंका है. इस दवा को गाम्बिया में खरीदा गया था.’’ परिषद ने कहा कि पहचानी गई दवाओं में पर्याप्त मात्रा में विषैला पदार्थ पाया गया है जो किडनी को अपूरणीय क्षति पहुंचाता है. दूषित दवा को लेकर भारत सरकार और हरियाणा सरकार मिलकर जांच कर रही है.

नाम का खुलासा नहीं करने की शर्त पर एक स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा कि जांच में 23 नमूनों में से अब तक चार को दूषित पाया गया है और भारत सरकार रिपोर्ट की प्रतीक्षा कर रही है. दवा निर्माता, मैडेन फार्मास्युटिकल लिमिटेड, के मुख्यालय पर फोन किया गया, तो इसका कोई जवाब नहीं मिला. ‘एपी’ के सवालों का भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय और संघीय नियामक ने भी कोई जवाब नहीं दिया है.

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