हेमंत सोरेन की भाभी सीता सोरेन ने झामुमो को झटका दिया, भाजपा में शामिल

रांची/नयी दिल्ली. पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की भाभी और जामा से झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की विधायक सीता सोरेन मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गईं और उन्होंने कहा कि वह राज्य को बचाने एवं अपने लोगों के लिए न्याय सुनिश्चित करने की खातिर ”मोदी परिवार” का हिस्सा बन रही हैं.

सीता सोरेन ने झामुमो को झटका देते हुए मंगलवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया और लोकसभा चुनाव से कुछ सप्ताह पहले भाजपा में शामिल हो गईं. उन्होंने दावा किया कि राज्य में सत्तारूढ़ झामुमो में उन्हें उपेक्षित और अलग-थलग किया जा रहा था. तीन बार के विधायक सीता सोरेन का भाजपा में शामिल होने का निर्णय अनुसूचित जनजाति के साथ अपने जुड़ाव को बढ़ाने के झामुमो के प्रयासों के लिए एक झटका है. यह समुदाय झामुमो का मुख्य वोट आधार रहा है.

दिवंगत दुर्गा सोरेन की पत्नी सीता सोरेन ने भाजपा महासचिव विनोद तावड़े और झारखंड के चुनाव प्रभारी लक्ष्मीकांत बाजपेयी की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ली. पार्टी सुप्रीमो और अपने ससुर शिबू सोरेन को लिखे इस्तीफे में सीता ने कहा कि उनके पति दुर्गा सोरेन के निधन के बाद पार्टी ने उन्हें तथा उनके परिवार को पर्याप्त सहयोग नहीं दिया.

उन्होंने कहा कि वह झामुमो में उपेक्षित महसूस कर रही थीं और उन्होंने भारी मन से पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने का फैसला किया है. इससे पहले सोरेन परिवार में उस समय दरार सामने आई थी जब सीता ने हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के दौरान उनकी पत्नी कल्पना सोरेन को मुख्यमंत्री बनाये जाने के किसी भी कदम का खुलकर विरोध किया था.

हालांकि चंपई सोरेन को पार्टी ने हेमंत सोरेन की जगह लेने के लिए चुना था, लेकिन कल्पना सोरेन तब से राजनीतिक कार्यक्रमों में दिखाई दे रही हैं, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि वह हेमंत की अनुपस्थिति में पार्टी की एक प्रमुख प्रचारक होंगी. उन्होंने झामुमो सुप्रीमो और अपने ससुर शिबू सोरेन को संबोधित अपने त्यागपत्र में लिखा, ”मेरे दिवंगत पति दुर्गा सोरेन के निधन के बाद से मैं और मेरा परिवार लगातार उपेक्षा का शिकार हुआ है. मेरे पति झारखंड आंदोलन के अगुवा थे और महान क्रांतिकारी थे. पार्टी और परिवार के सदस्यों ने हमारी उपेक्षा की जो बहुत पीड़ादायक रहा.”

सीता ने कहा, ”मुझे उम्मीद थी कि समय के साथ हालात सुधरेंगे, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ.” उन्होंने पत्र में लिखा, ”हम सब को साथ रखने के लिए मेहनत करने वाले श्री शिबू सोरेन के अथक प्रयास दुर्भाग्य से विफल रहे. मेरे और मेरे परिवार के खिलाफ रची जा रही साजिश का मुझे पता चल गया है. मेरे पास इस्तीफा देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है.” भाजपा में शामिल होते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकास कार्यक्रमों की सराहना की.

उन्होंने झारखंड के निर्माण के लिए अपने दिवंगत पति दुर्गा सोरेन के संघर्ष के बारे में बात की, जिन्हें शिबू सोरेन के राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाता था. उन्होंने कहा कि उनके पति के सपने अधूरे रह गए हैं और राज्य में लोग परेशान हैं. तावड़े ने कहा कि सीता सोरेन के भाजपा में शामिल होने का असर चुनावों, खासकर इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों में महसूस किया जाएगा. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने आदिवासियों के लिए कई विकास कार्य किए हैं.

बाजपेयी ने झामुमो के नेतृत्व वाली सरकार के तहत राज्य में कथित भ्रष्टाचार और लूट के खिलाफ आवाज उठाने के लिए सीता की सराहना की. उन्होंने कहा कि राज्य की सभी 14 लोकसभा सीट पर भाजपा का चुनाव चिह्न ‘कमल’ खिलेगा. विधायक के कार्यालय के अनुसार, सीता सोरेन ने झारखंड विधानसभा की सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है. झामुमो की नेता एवं राज्यसभा सदस्य महुआ माझी ने सीता सोरेन के इस्तीफे को ‘स्तब्ध’ करने वाला फैसला बताया और उनसे अपने फैसले पर पुर्निवचार करने का अनुरोध किया.
माझी ने कहा कि आंतरिक विवादों का समाधान सोरेन परिवार के अंदर ही कर लिया जाना चाहिए.

भाजपा के एक प्रवक्ता ने कहा, ”सीता रावण की लंका से आजाद हो गई हैं.” उनका इस्तीफा उच्चतम न्यायालय द्वारा 1998 के उस फैसले को पलटने के एक पखवाड़े बाद आया है – जिस मामले में शिबू सोरेन आरोपी थे. न्यायालय ने कहा था कि जो सांसद और विधायक वोट देने या सदन में एक निश्चित तरीके से बोलने के लिए रिश्वत लेते हैं, उन्हें अभियोजन से छूट नहीं है. सीता सोरेन पर 2012 के राज्यसभा चुनाव में एक निर्दलीय उम्मीदवार से रिश्वत लेने का आरोप है.

अदालत के 1998 के झामुमो रिश्वत मामले में दिए गए फैसले से पूर्व केंद्रीय मंत्री शिबू सोरेन को राहत मिली थी लेकिन उनकी पुत्रवधू सीता सोरेन की ही याचिका के बाद न्यायालय की सात सदस्यीय पीठ ने चार मार्च को इस फैसले को पलट दिया था. पिछले दिनों धनशोधन के एक मामले में हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद सीता सोरेन ने उनकी पत्नी कल्पना को मुख्यमंत्री बनाए जाने के कदम का विरोध किया था.

तब सीता सोरेन ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा था, ”मैं पूछना चाहती हूं कि कल्पना सोरेन ही क्यों, जो विधायक भी नहीं हैं और जिनका राजनीतिक अनुभव भी नहीं है. किन परिस्थितियों में अगले मुख्यमंत्री के रूप में उनका नाम चलाया जा रहा है जबकि पार्टी में कई वरिष्ठ नेता हैं.” उन्होंने कहा था, ”अगर वे परिवार से ही किसी को चुनना चाहते हैं तो मैं सबसे वरिष्ठ हूं और करीब 14 साल से विधायक हूं.”

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