
डेटन. इजराइल और हमास के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से तीन सप्ताह में सोशल मीडिया पर हमलों की कई तस्वीरें और खबरें आई हैं, जिनमें से कई झूठी साबित हुईं. हमास द्वारा सात अक्टूबर, 2023 को किए गए हमले के कुछ घंटे के भीतर, एक वीडियो गेम के स्क्रीनशॉट को सोशल मीडिया पर हजारों लोगों द्वारा साझा किया गया और इसमें ऐसा दिखाया गया जैसे कि गाजा में इजराइली सैनिकों के खिलाफ हिंसा के ये वास्तविक दृश्य हैं.
पांच दिन बाद, गाजा के एक अस्पताल में विस्फोट में हताहतों के बारे में कई फर्जी तस्वीरों को साझा किया गया. यह सिर्फ यह युद्ध नहीं है. पिछले एक दशक में, सीरिया, म्यांमा, यूक्रेन और अन्य स्थानों पर संघर्षों में मध्यस्थता के लिए काम कर रहे अंतरराष्ट्रीय आयोगों और न्यायाधिकरणों को डिजिटल साक्ष्यों को सत्यापित करने के लिए संघर्ष करना पड़ा है. एक मानवाधिकार शोधार्थी के रूप में, मैं हाल में उन स्थितियों में युद्ध और अत्याचारों की तस्वीरें और वीडियो देखने की नैतिकता का अध्ययन कर रहा हूं.
इस शोध का एक प्रमुख सबक यह है कि सोशल मीडिया के उपयोगकर्ताओं के पास प्राप्त सामग्री को प्रभावित करने का अधिकार होता है और इस प्रकार जब वे गलत जानकारी साझा करते हैं तो उन्हें कुछ ज.म्मिेदारी उठानी पड़ती है. गलत सूचना और दुष्प्रचार को परिभाषित करना: विद्वान और नीति निर्माता उनके निर्माण और प्रसार के इरादों के आधार पर गलत सूचना को दुष्प्रचार से अलग करते हैं.
गलत सूचना में झूठी जानकारी शामिल होती है जो धोखा देने के इरादे से बनाई या प्रसारित नहीं की जाती है. दुष्प्रचार में दृश्य जानकारी सहित झूठी जानकारी शामिल होती है, जिसका उद्देश्य धोखा देना और नुकसान पहुंचाना होता है. किसी भी युद्ध की शुरुआत में गलत सूचना फैलती है. यह अफवाह कि यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की कीव से भाग गए हैं, रूसी सेना द्वारा उस देश पर हमला करने के बाद तेजी से फैल गई, लेकिन बाद में पोस्ट किए गए वीडियो के जरिये इसका खंडन किया गया.
म्यांमा में, सैन्य प्रचार अधिकारियों ने 20वीं सदी के मध्य में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के तहत देश में आने वाले रोहिंग्या लोगों को चित्रित करने वाली तस्वीरें कथित तौर पर प्रकाशित कीं. जब सोशल मीडिया इजराइल-हमास युद्ध, यूक्रेन युद्ध और दुनिया के अन्य क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर हिंसा की झूठी तस्वीरों से भरा हुआ है, व्यक्तियों को पूछना चाहिए कि गलत सूचना के लिए वे क्या नैतिक जिम्मेदारी लेते हैं.
दार्शनिक गिदोन रोसेन का दावा है कि जब लोग किसी घटना के प्रति नि्क्रिरय होते हैं, तो वे आमतौर पर इसके लिए नैतिक जिम्मेदारी नहीं उठाते हैं. दार्शनिक ओनोरा ओ’नील ने बताया कि यह डिजिटल संचार की खासियत है कि उपयोगकर्ताओं के पास इन तरीकों से सामग्री को नियंत्रित करने की क्षमता का अभाव है. फिर भी, उपयोगकर्ता डिजिटल स्थानों में मिलने वाली सामग्री को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकते हैं.
ज्यादातर मामलों में, वे किसी मंच की सामग्री के साथ उपयोगकर्ताओं के पिछले जुड़ाव से प्रेरित होते हैं – यह तथ्य टिकटॉक पर ”फॉर यू” पेज के नाम से ही परिलक्षित होता है. युद्ध और अत्याचारों की छवियों को लाइक करना, टैग करना, टिप्पणी करना या केवल देखना जारी रखने से ऐसी सामग्री के साथ अतिरिक्त जुड़ाव होता है. प्रमुख सोशल मीडिया मंचों पर हालांकि हिंसा भड़काने और ग्राफिक सामग्री साझा करने पर रोक लगाने संबंधी दिशानिर्देश हैं, लेकिन उन प्रतिबंधों को लागू करना मुश्किल है.



