
नयी दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने हिंदुत्व विचारक विनायक दामोदर सावरकर के खिलाफ टिप्पणियों को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के विरुद्ध दायर आपराधिक मानहानि की शिकायत और अधीनस्थ अदालत द्वारा जारी समन शुक्रवार को रद्द कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि मामले में कानून के तहत आवश्यक मंजूरी नहीं ली गई थी।
मानहानि का यह मामला 17 नवंबर 2022 को महाराष्ट्र के अकोला जिले में ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के दौरान आयोजित एक रैली में सावरकर को लेकर गांधी की टिप्पणियों से जुड़ा है। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने गांधी की याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि इस मामले में नेता प्रतिपक्ष पर मुकदमा चलाने के लिए जरूरी कानूनी मंजूरी नहीं ली गई थी।
दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 196 के तहत भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153ए (समूहों के बीच वैमनस्य को बढ़ावा देना) के तहत अपराध का संज्ञान लेने के लिए राज्य सरकार की मंजूरी अनिवार्य है। पीठ ने कहा, ”अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल और शिकायतकर्ता के वकील ने उत्तर प्रदेश की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा है कि मंजूरी का कोई उल्लेख नहीं है।
ऐसे में शिकायत और मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेशों को रद्द किया जाता है।” शीर्ष अदालत ने इससे पहले महाराष्ट्र में एक रैली के दौरान सावरकर को लेकर गांधी की ”गैर-जिम्मेदाराना” टिप्पणियों के लिए अप्रसन्नता जताई थी, लेकिन उनके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। न्यायालय ने कहा था, ”हमें अपने स्वतंत्रता सेनानियों का मजाक नहीं उड़ाना चाहिए।”
शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार और शिकायतकर्ता के वकील नृपेंद्र पांडे को नोटिस जारी किया था तथा इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसमें गांधी के खिलाफ अधीनस्थ अदालत के समन को रद्द करने से इनकार किया गया था। पांडे ने गांधी के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कराया था, जिसमें विभिन्न वर्ग के बीच वैमनस्य को बढ़ावा देने और सार्वजनिक उपद्रव जैसे कथित अपराधों के आरोप लगाए गए थे।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने चार अप्रैल 2025 को गांधी को राहत देने से इनकार करते हुए कहा था कि वह सत्र अदालत में पुनरीक्षण याचिका दाखिल कर सकते हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष गांधी ने मामले में उनके खिलाफ जारी कार्यवाही को चुनौती देते हुए उन्हें समन जारी करने के अधीनस्थ अदालत के फैसले को चुनौती दी थी।
अधिवक्ता पांडे ने शिकायत में आरोप लगाया था कि गांधी ने रैली के दौरान सावरकर का जानबूझकर अपमान किया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि गांधी की टिप्पणियां सावरकर को बदनाम करने की एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा थीं।



