मैं पक्षपात करुंगा, ‘मियां’ मुस्लिमों को असम पर कब्जा नहीं करने दूंगा: हिमंत

जब हिमंत दबाव में होते हैं, तो वह समाज को बांटने की कोशिश करते हैं: गौरव गोगोई

गुवाहाटी. असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने मंगलवार को कहा कि वह पक्षपात करेंगे और ‘मियां’ मुसलमानों को असम पर कब्जा नहीं करने देंगे. शर्मा नागांव में 14 साल की एक बच्ची के साथ दुष्कर्म और उसकी हत्या की घटना की पृष्ठभूमि में राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति पर विपक्षी दलों के कार्य स्थगन प्रस्ताव के संबंध में विधानसभा में बोल रहे थे. उन्होंने कहा कि अगर जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित रखा जाता तो अपराध की दर नहीं बढ़ती.

शर्मा ने कहा, ”बलात्कार का एक भी मामला स्वीकार्य नहीं है. फिर भी यदि पिछले कुछ साल में बलात्कार के मामलों की संख्या के साथ जनसंख्या वृद्धि पर ध्यान दिया जाए तो अपराध दर कम हो गई है. पिछले 10 साल में बहुत सुधार हुआ है.” शिवसागर में 17 वर्षीय एक पहलवान पर कथित हमले के लिए मारवाड़ी समुदाय के सदस्यों द्वारा घुटने टेककर माफी मांगने के घटनाक्रम पर शर्मा ने दावा किया कि यह एक ‘स्वैच्छिक’ कदम था.

उन्होंने विपक्ष के नेता देबब्रत सैकिया के आरोपों को खारिज कर दिया. शर्मा ने दावा किया, ”हमारे कैबिनेट मंत्री रनोज पेगु को यह सुनिश्चित करने के लिए भेजा गया था कि कोई गलतफहमी न हो. मारवाड़ी समुदाय ने उदारता दिखाई और मामला सुलझ गया. किसी ने उन्हें घुटने टेकने के लिए मजबूर नहीं किया.” सैकिया ने पलटवार करते हुए कहा कि अगर पुलिस ने हमले में शामिल लोगों को तुरंत गिरफ्तार कर लिया होता तो मामला इतना बिगड़ता ही नहीं. शर्मा ने दावा किया कि अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों द्वारा मारवाड़ियों के खिलाफ सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट ने तनाव को बढ़ा दिया, जिस पर कांग्रेस और एआईयूडीएफ ने आरोप लगाया कि वह (मुख्यमंत्री) इस मुद्दे पर ‘गंदी राजनीति’ कर रहे हैं.

जब विपक्षी विधायकों ने अपनी आवाज उठाई, तो मुख्यमंत्री ने सवाल किया, ”जब हम अल्पसंख्यकों के बारे में बात करते हैं तो आप नाराज क्यों होते हैं? क्या कांग्रेस ने यह घोषित कर दिया है कि उसे बहुसंख्यक समुदाय की जरूरत नहीं है?” शर्मा ने कांग्रेस और एआईयूडीएफ विधायकों पर निशाना साधते हुए कहा, ”आपके बीच अल्पसंख्यक वोटों के लिए प्रतिस्पर्धा है, मैं इस दौड़ में नहीं हूं.” जब विपक्ष ने उन पर पक्षपात करने का आरोप लगाया, तो शर्मा ने पलटवार करते हुए कहा, ”मैं पक्षपात करुंगा. आप क्या कर सकते है ?” तीखी नोकझोंक के बीच एआईयूडीएफ विधायक रफीकुल इस्लाम ने कहा कि निचले असम के लोग ऊपरी असम के जिलों में जाएंगे क्योंकि यह उनका अधिकार है. उन्होंने कुछ संगठनों के इस फरमान का हवाला दिया कि लोग ऊपरी असम से तुरंत चले जाएं.

शर्मा ने जवाब में कहा, ”निचले असम के लोग ऊपरी असम क्यों जाएंगे? ताकि मियां मुस्लिम असम पर कब्जा कर लें. हम ऐसा नहीं होने देंगे.” मुख्यमंत्री के बयान के बाद सदन में हंगामा शुरू हो गया और सत्तापक्ष तथा विपक्ष के सदस्य आसन के समीप आ गए. विधानसभा अध्यक्ष बिश्वजीत दैमारी ने विपक्ष के कार्य स्थगन प्रस्ताव के नोटिस को खारिज करते हुए कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी. बांग्लाभाषी मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए ‘मियां’ शब्द का इस्तेमाल विरोध स्वरूप किया जाता रहा है और गैर-बांग्ला भाषी लोग आमतौर पर उन्हें बांग्लादेशी प्रवासी बताते हैं. पिछले कुछ साल में गैर-बांग्ला भाषी समुदाय के लोगों ने इस शब्द का इस्तेमाल शुरू कर दिया है.

कांग्रेस, एआईयूडीएफ और माकपा के विधायकों तथा एकमात्र निर्दलीय सदस्य अखिल गोगोई ने राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराध समेत बढ़ती जुर्म की घटनाओं से उत्पन्न हालात पर चर्चा के लिए कार्य स्थगन प्रस्ताव दिया था. सदन की कार्यवाही पुन: शुरू हुई तो मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर अपनी बात जारी रखते हुए दावा किया कि एआईयूडीएफ विधायक इस्लाम के बयान से माहौल खराब हो जाएगा और उनका लहजा आक्रामक था. मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी व्यक्ति का किसी भी स्थान पर जाकर बसना या काम करना उसका संवैधानिक अधिकार है, लेकिन यदि ऐसा करने का स्थानीय लोगों द्वारा स्वागत नहीं हो तो नहीं करना चाहिए.

उन्होंने कहा, ”जब तक मूल निवासियों के अधिकार सुरक्षित हैं, वे ऐसा कर सकते हैं. लेकिन अगर कोई स्थानीय लोगों पर प्रभुत्व जमाने की कोशिश करेगा तो यह अच्छा नहीं होगा.” शर्मा ने कहा कि ‘मियां’ मुस्लिम और उनकी ओर से पक्ष रख रहे विपक्षी विधायकों को अपने कार्यों से साबित करना होगा कि किसी भी तरह से हिंदुओं को कोई खतरा नहीं है. उन्होंने कहा, ”अगर कोई हिंदू परिवार किसी मुस्लिम बहुल इलाके में अपराध का शिकार होता है तो उस इलाके के मुसलमानों को उनकी आशंकाओं को दूर करना चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि उन्हें इलाका छोड़कर नहीं जाना पड़े.” इस बीच विधानसभा अध्यक्ष ने अखिल गोगोई को कार्यवाही बाधित करने के लिए कुछ देर को सदन से निलंबित कर दिया.

असम में हिंदुओं और मुसलमानों से संबंधित जनसांख्यिकीय परिवर्तन पर बहस की जरूरत: हिमंत

असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने मंगलवार को कहा कि राज्य में हिंदुओं और मुसलमानों से संबंधित जनसांख्यिकीय परिवर्तन पर बहस की जरूरत है. उन्होंने कहा कि असम के निचले जिलों जैसे कुछ हिस्सों में जनसांख्यिकीय परिवर्तन हो रहे हैं और इससे ”जबरदस्त मानवीय आपदा” हो सकती है.

शर्मा ने विशेष जिलों में जनसांख्यिकीय बदलाव पर विधानसभा में एक प्रस्ताव का जवाब देते हुए कहा, ”हिंदू-मुस्लिम मुद्दा आज राज्य में सबसे ज्वलंत मुद्दा है; हमें इस पर बहस करने और इसे सुलझाने की जरूरत है.” मुख्यमंत्री ने दावा किया कि हिंदू ‘मिया’ मुस्लिम बहुल स्थानों से पलायन कर रहे हैं.  ‘मिया’ मूलत: असम में बंगाली भाषी मुसलमानों को संर्दिभत एक शब्द है तथा गैर-बांग्ला भाषी लोग आमतौर पर उन्हें बांग्लादेशी विस्थापित के रूप में पहचानते हैं.

शर्मा ने दावा किया, ”निचले असम में जनसांख्यिकीय परिवर्तन इतनी तेजी से हो रहा है कि इससे जबरदस्त मानवीय आपदा हो सकती है. हिंदुओं ने अपनी जमीन और अधिकार खो दिए हैं. हिंदू नाम वाले गांवों में अब कोई हिंदू निवासी नहीं है.” उन्होंने कहा कि एक दस्तावेज तैयार किया जा रहा है, जिसमें मतदान केंद्रों के अनुसार जनसांख्यिकीय परिवर्तनों का विवरण होगा. शर्मा ने कहा कि उनकी सरकार अप्रैल में एक कानून लेकर आयेगी, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि शादियां ”गरिमापूर्ण तरीके” से हों.

जब हिमंत दबाव में होते हैं, तो वह समाज को बांटने की कोशिश करते हैं: गौरव गोगोई

लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने मंगलवार को आरोप लगाया कि असम के मुख्यमंत्री जब भी दबाव में होते हैं, तो समाज को बांटने में लग जाते हैं. असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि वह पक्षपात करेंगे और ‘मिया’ मुसलमानों को असम पर कब्जा नहीं करने देंगे. इसके कुछ घंटे बाद गोगोई ने यह आरोप लगाया.

नगांव जिले के धींग में सामूहिक बलात्कार की घटना के बाद शर्मा के हाल के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए गोगोई ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”जब भी मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा दबाव में होते हैं, तो वह समाज को बांटने की कोशिश करते हैं.” कांग्रेस नेता ने विश्वास जताया कि असम के लोग शर्मा से अधिक समझदार हैं और वे उनकी ”विभाजनकारी बयानबाजी” में नहीं फंसेंगे. गोगोई ने कहा, ”वह जानते हैं कि एक मुख्यमंत्री के रूप में विफल रहे हैं. असम के लोग एकजुट रहेंगे और 2026 में उनकी अहंकारी सरकार को वोट देकर सत्ता से बाहर कर देंगे.”

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