
मुंबई. ये बात 2015 की है, जब रिकी केज ने अपना पहला ग्रैमी पुरस्कार जीता ही था और इसी दौरान उनके फोन की घंटी बजी, तो दूसरी तरफ से 16 साल की लड़की जैसी आवाज वाली कॉलर ने उन्हें पुरस्कार जीतने की बधाई दी तथा अपना नाम लता मंगेशकर बताया. केज ने पूछा, कौन लता? और जवाब आया, ”मैं एक गायिका हूं.” बेशक, यह लता मंगेशकर थीं, जो दशकों से संगीत की दिग्गज हस्ती के तौर पर मशहूर थीं. पहचान को लेकर उलझन के साथ शुरू हुई वह कॉल केज के लिए सबसे यादगार पल बन गई. यह एक खूबसूरत दोस्ती की शुरुआत भी थी.
केज ने उन दिनों को याद करते हुए ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ”यह 2015 में हुआ जब मैंने अपना पहला ग्रैमी पुरस्कार जीता था. मैं बंगलुरु पहुंचा और मुंबई में एक अनजान नंबर से मुझे कॉल आया. ‘हैलो, क्या आप रिकी बोल रहे हैं?’ मैंने कहा, ‘हां’. उन्होंने कहा, ‘मैं आपको ग्रैमी पुरस्कार जीतने पर बधाई देना चाहती हूं’. मैंने पूछा, ‘आप कौन हैं?’ उन्होंने कहा, ‘मैं लता हूं’. मैंने पूछा, ‘कौन लता?’ उन्होंने कहा, ‘मैं एक गायिका हूं’. मैंने पूछा, ‘आपको मेरा फोन नंबर कैसे मिला?” केज ने बताया, ”इसी समय उनके प्रबंधक ने भ्रम को दूर करने के लिए लता मंगेशकर से फोन ले लिया. ‘हैलो रिकी, मैं महेश हूं. मैं लता जी का मैनेजर हूं और यह लता मंगेशकर हैं.’ उन्होंने फोन उन्हें वापस दे दिया.
मैंने लता से कहा, ‘आपकी आवाज 16 साल की लड़की की तरह लग रही हैं.’ वह हंसने लगीं और बोलीं, ‘हर कोई यही कहता है.’ मैंने उनसे कहा, ‘अगली बार, आप यह मत कहना कि आप लता हैं, एक गायिका हैं. आप उससे कहीं बढ़कर हैं.” तीन ग्रैमी पुरस्कार जीत चुके बेंगलुरू निवासी शास्त्रीय संगीतकार ने कहा कि बातचीत के दौरान उन्हें यह भी पता चला कि लता मंगेशकर उनके दादा जानकी दास मेहरा को जानती थीं, जो अभिनेता और स्वतंत्रता सेनानी थे.
केज ने कहा, ”इसके बाद हम अक्सर एक-दूसरे से बात करते रहे… जब आपको स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर से बात करने का जैसा अद्भुत अवसर मिलता है तो ये जीवन के खूबसूरत पल होते हैं, जिनके लिए आप बहुत आभारी होते हैं. मैं बेहद भाग्यशाली हूं कि मेरा उनके साथ एक खूबसूरत रिश्ता रहा.” 43 वर्षीय अभिनेता ने कहा कि उन्हें बॉलीवुड संगीत पसंद है, लेकिन कई प्रस्तावों के बावजूद उन्होंने अब तक उसके लिए किसी संगीत रचना से दूरी बनाए रखी है.
उन्होंने कहा, ”पहला ग्रैमी पुरस्कार और दूसरा और फिर तीसरा पुरस्कार जीतने के बाद, मुझे बॉलीवुड से कई फिल्मों के प्रस्ताव मिले. लेकिन यह ऐसी चीज है जिसमें मेरी रुचि नहीं है. अगर कोई ऐसी फिल्म है जो मूल रूप से सामाजिक संदेश पर आधारित है, तो मैं उसे करना पसंद करूंगा. लेकिन मुझे कभी भी ऐसी फिल्म का प्रस्ताव नहीं मिला. मुझे केवल मुख्यधारा की, बड़े बजट की बॉलीवुड फिल्में ही ऑफर की जाती रही हैं.” केज ने स्वतंत्रता दिवस से पहले राष्ट्रगान के नए संस्करण के लिए कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (केआईएसएस) और 14,000 छात्रों के साथ काम किया है. इसमें उनके साथ भारतीय शास्त्रीय दिग्गज पंडित हरि प्रसाद चौरसिया, राकेश चौरसिया, राहुल शर्मा, अमान अली बंगश, अयान अली बंगश, जयंती कुमारेश, मिस्टर एंड मिसेज शेख मेहबूब सुभानी और गिरिधर उडुपा भी शामिल हैं.



