महानदी जल विवाद के समाधान के लिए तत्काल राजनीतिक हस्तक्षेप की आवश्यकता : पूर्व न्यायाधीश

नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश वी गोपाल गौड़ा ने दशकों से चले आ रहे महानदी जल विवाद को समाप्त करने के लिए तत्काल राजनीतिक हस्तक्षेप का आह्वान किया है. न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) गौड़ा ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ओडिशा तथा छत्तीसग­ढ़ के मुख्यमंत्रियों से मध्यस्थता की मेज पर आकर इस विवाद को सुलझाने का आग्रह किया.

‘महानदी संसद’ को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) गौड़ा ने कहा कि 2018 में महानदी नदी जल विवाद न्यायाधिकरण को भेजे जाने के बावजूद यह मुद्दा वर्षों तक अनसुलझा रहा. उन्होंने कहा, ” हम प्रधानमंत्री और दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों से अनुरोध करते हैं कि वे मध्यस्थता के लिए आएं और इसे सुलझाएं.”

उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश ने कहा, ”यह मामला न्यायाधिकरण को भेजे हुए सात साल बीत चुके हैं. दलीलें पूरी हो चुकी हैं, गवाहों के नाम दर्ज हो चुके हैं, सबूत दाखिल हो चुके हैं, लेकिन यह प्रक्रिया इतनी लंबी है कि इसमें दशकों लग सकते हैं.” उन्होंने चेतावनी दी कि लंबे समय तक चलने वाला यह विवाद दोनों राज्यों के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है, विशेष रूप से ओडिशा के निचले इलाकों के समुदायों के लिए.

गौड़ा ने कहा, ” लाखों मछुआरे अपनी आजीविका से वंचित हैं. आजीविका से वंचित होना संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है.” न्यायमूर्ति गौड़ा ने तर्क दिया कि केंद्र सरकार को अंतर-राज्यीय जल विवाद अधिनियम, 1956 के तहत विवाद में मध्यस्थता करने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए, न कि इसे लंबी न्यायिक प्रक्रियाओं पर छोड़ देना चाहिए.

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