
मुंबई. रिजर्व बैंक के एक लेख में टमाटर की कीमतें बढ़ने का घरों का बजट प्रभावित होने का जिक्र करते हुए कहा गया है कि इसका अन्य जिंस उत्पादों पर पड़ने वाला प्रभाव ‘चिंता’ का विषय बना हुआ है. पिछले कुछ दिनों में टमाटर के दाम 250 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए हैं. इसका मुख्य कारण बारिश के कारण टमाटर की फसल को होने वाला नुकसान है.
खुदरा कीमतों में इस भारी वृद्धि के बीच, केंद्र ने लोगों को राहत देने के लिए 80 रुपये प्रति किलोग्राम पर टमाटर बेचना शुरू कर दिया है.
भारतीय रिजर्व बैंक के जुलाई बुलेटिन में ‘अर्थव्यवस्था की स्थिति’ पर प्रकाशित एक लेख में कहा गया है, ”प्रमुख उत्पादन क्षेत्रों में खराब मौसम और कीटों के हमलों के कारण फसल को नुकसान होने से टमाटर की कीमतों में हाल में आई तेजी ने व्यापक रूप से ध्यान आर्किषत किया है क्योंकि इससे घरों के बजट प्रभावित हुए हैं.” रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर माइकल देबब्रत पात्रा की अगुवाई वाली टीम के इस लेख में महंगाई दर की अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए आपूर्ति श्रृंखला में सुधार की वकालत की गयी है.
टमाटर की कीमत में गिरावट शुरू हो गई है और सरकारी आंकड़ों के अनुसार सोमवार को इस सब्जी की अखिल भारतीय औसत कीमत लगभग 120 रुपये प्रति किलोग्राम रही. लेख के अनुसार, समग्र मुद्रास्फीति में अस्थिरता लाने में टमाटर की कीमतों का ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण योगदान रहा है. इसकी घट-बढ़, खुदरा और थोक बाजारों में अन्य सब्जियों की कीमतों पर भी असर डालती है.
लेख के मुताबिक ”टमाटर जल्दी खराब होने वाली वस्तु है. इससे मौसमी आधार पर कीमतों में उतार-चढ़ाव आता है, लेकिन ये घटनाएं कुछ समय के लिए ही होती हैं.” हालांकि, केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि बुलेटिन में व्यक्त विचार लेखकों के हैं और वह रिजर्व बैंक के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं.
लेख कहता है, ”टमाटर की कीमतों में बढ़ोतरी से अन्य वस्तुओं की कीमतों पर असर होता है और इससे मुद्रास्फीति बढ़ने की चुनौती को लेकर एक बड़ी चिंता बनी हुई हैं.” इसके मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में कीमतों में बढ़ोतरी से समग्र मुद्रास्फीति की अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए आपूर्ति श्रृंखला में सुधार की आवश्यकता है.



