भारत, चीन ने पूर्वी लद्दाख में सैनिकों की वापसी प्रक्रिया के बाद संबंधों में अगले कदमों पर चर्चा की

नयी दिल्ली/रियो डी जेनेरियो/बीजिंग. विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनके चीनी समकक्ष वांग यी ने रियो डी जेनेरियो में एक बैठक में भारत-चीन संबंधों में अगले कदमों पर विचार-विमर्श किया. यह पूर्वी लद्दाख में डेमचोक और देपसांग से दोनों पक्षों के सैनिकों के हटने के बाद पहली उच्च स्तरीय बैठक थी. जयशंकर और वांग ने सोमवार देर रात जी-20 शिखर सम्मेलन के इतर प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की.

सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों पक्षों ने सीमा क्षेत्रों से हाल में सैनिकों को पीछे हटाने की प्रगति पर गौर किया और द्विपक्षीय संबंधों में अगले कदम पर विचारों का आदान-प्रदान किया. यह माना जाता कि दोनों पक्ष विभिन्न वार्ता तंत्रों को पुनर्जीवित करने की प्रक्रिया में हैं, जिसमें सीमा विषय पर विशेष प्रतिनिधि वार्ता भी शामिल है, जैसा पिछले महीने रूसी शहर कजान में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच हुई बैठक में तय किया गया था.

डेमचोक और देपसांग में पीछे हटने के लिए दोनों पक्षों के बीच 21 अक्टूबर को सहमति बनने के कुछ दिनों बाद, भारतीय और चीनी सेनाओं ने यह प्रक्रिया पूरी कर ली, जिससे दोनों टकराव स्थलों पर चार साल से अधिक समय से चल रहा गतिरोध लगभग समाप्त हो गया. दोनों पक्षों ने लगभग साढ़े चार वर्षों के अंतराल के बाद इन क्षेत्रों में गश्त गतिविधियां भी पुन: शुरू कीं.

जयशंकर ने कहा, “रियो में जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान सीपीसी पोलित ब्यूरो के सदस्य और चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की.” उन्होंने कहा, “हमने भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में हाल में सैन्य वापसी में हुई प्रगति पर गौर किया. साथ ही द्विपक्षीय संबंधों में अगले कदमों पर विचारों का आदान-प्रदान किया. वैश्विक स्थिति पर भी चर्चा की.” वार्ता में अपने प्रारंभिक वक्तव्य में जयशंकर ने 23 अक्टूबर को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी और शी के बीच हुई बैठक का उल्लेख किया.

उन्होंने कहा, “कजान में हमारे नेता 21 अक्टूबर की सहमति को ध्यान में रखते हुए हमारे संबंधों में अगले कदम उठाने पर आम सहमति पर पहुंचे. मुझे यह जानकर खुशी हुई कि जमीनी स्तर पर उस सहमति का कार्यान्वयन योजना के अनुसार आगे बढ़ा है.” विदेश मंत्री ने कहा, “हमारे नेताओं ने निर्देश दिया है कि विदेश मंत्रियों और विशेष प्रतिनिधियों को जल्द से जल्द मिलना चाहिए. इस दिशा में कुछ प्रगति हुई है, कुछ चर्चाएं हुई हैं.” बैठक में जयशंकर और वांग ने अगले कदमों पर चर्चा की. विदेश मंत्री ने अपनी टिप्पणी में भारत-चीन संबंधों के महत्व पर भी ध्यान दिलाया.

उन्होंने कहा, “सबसे पहले मैं यह कहना चाहता हूं कि जी-20 के दौरान आपसे मिलना बहुत अच्छा रहा. जैसा कि आपने उल्लेख किया, हमने हाल ही में ब्रिक्स के दौरान भी एक-दूसरे से मुलाकात की थी. और दोनों मंचों पर हमारा योगदान अंतिम परिणामों को आकार देने में उल्लेखनीय था.” उन्होंने कहा, “लेकिन यह हमें अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हमारे दोनों देशों के महत्व की याद दिलाता है. यह इस बात का भी उतना ही महत्वपूर्ण प्रमाण है कि हमारे द्विपक्षीय संबंध इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं.” वहीं, बीजिंग से मिली खबरों के मुताबिक, वांग ने जयशंकर के साथ अपनी बैठक में कहा कि भारत और चीन को प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति चिनफिंग के बीच रूस में शिखर सम्मेलन में बनी महत्वपूर्ण सहमति को क्रियान्वित करना चाहिए.

सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने वांग-जयशंकर बैठक पर आधिकारिक बयान का हवाला देते हुए बताया कि दोनों पक्षों को दोनों नेताओं द्वारा बनाई गई महत्वपूर्ण सहमति को लागू करना चाहिए, एक-दूसरे के हितों का सम्मान करना चाहिए, संवाद और संचार के माध्यम से आपसी विश्वास को बढ़ाना चाहिए, मतभेदों को ईमानदारी और निष्ठा के साथ निपटाना चाहिए और द्विपक्षीय संबंधों को जल्द से जल्द स्थिर और स्वस्थ विकास के रास्ते पर वापस लाना चाहिए.

अधिकारियों के अनुसार विशेष प्रतिनिधि वार्ता अगला महत्वपूर्ण कदम होगी. वार्ता के लिए भारत के विशेष प्रतिनिधि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल हैं, जबकि चीनी पक्ष का नेतृत्व विदेश मंत्री वांग यी कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि सैनिकों की वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भारतीय और चीनी सेनाएं देपसांग और डेमचोक में एक-एक दौर की गश्त कर रही हैं.

साथ ही उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने एलएसी पर सैनिकों की तैनाती बरकरार रखी है और अब ध्यान तनाव को समग्रता में कम करने पर होगा. इस समय क्षेत्र में एलएसी पर दोनों पक्षों के लगभग 50,000 से 60,000 सैनिक तैनात हैं. उन्होंने बताया कि तनाव कम करने के लिए कई स्तरों पर बातचीत चल रही है.

भारत और चीन के बीच 21 अक्टूबर को देपसांग और डेमचोक में सेनाओं की वापसी के समझौते पर पहुंचने के बाद सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा था कि भारतीय सेना “विश्वास” बहाल करने का प्रयास कर रही है और इस उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए दोनों पक्षों को “एक दूसरे को आश्वस्त” करना होगा. समझौते पर हस्ताक्षर होने के दो दिन बाद मोदी और शी ने रूसी शहर कजान में वार्ता की. पैंगोंग झील क्षेत्र में हिंसक झड़प के बाद पांच मई, 2020 को पूर्वी लद्दाख सीमा पर गतिरोध शुरू हो गया था.

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