नयी दिल्ली. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को कहा कि भारत और चीन के बीच तब तक संबंध सामान्य नहीं हो सकते हैं जब तक वह वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को बदलने के एकतरफा प्रयास और सीमा पर सैन्य बलों का जमावड़ा जारी रखेगा.
राज्यसभा में ‘‘भारत की विदेश नीति में नवीनतम घटनाक्रमों’’ पर दिए गए एक बयान के बाद सदस्यों की ओर से मांगे गए स्पष्टीकरण पर जयशंकर ने यह जानकारी दी.
कांग्रेस के प्रमोद तिवारी और नासिर हुसैन ने भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव से जुड़े मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री से जवाब मांगा था.
जयशंकर ने कहा, ‘‘कूटनीतिक रूप से हम चीन के साथ बहुत स्पष्ट रहे हैं कि वास्तविक नियंत्रण रेखा को बदलने के प्रयासों को हम बर्दाश्त नहीं करेंगे. जब तक वे ऐसा करना जारी रखते हैं और यदि उन्होंने ऐसी ताकतों का निर्माण किया जो हमारे लिए सीमावर्ती क्षेत्र में एक गंभीर चिंता का विषय हैं, तो हमारे संबंध सामान्य नहीं हैं.’’ चीन ने कथित तौर पर लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सैन्य अवसरंचना का निर्माण किया है.
इस साल की शुरुआत में अमेरिका के एक शीर्ष सुरक्षा अधकारी ने एलएसी पर चीन की गतिविधि को आंखें खोलने वाला बताया था.
जयशंकर ने कहा कि पिछले कुछ सालों में दोनों देशों के ‘‘असामान्य रिश्ते’’ भी इसका सबूत है. जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के बीच वरिष्ठ सैन्य कमांडर स्तरीय वार्ता जारी है. उन्होंने कहा कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए फिलहाल इसे सैन्य कमांडर स्तरीय वार्ता पर छोड़ दिया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि सदन को इस तरह के नाजुक मामले की राष्ट्रीय संवेदनशीलता को समझना चाहिए.
विदेश मंत्री ने पिछले महीने कहा था कि सीमावर्ती क्षेत्रों में अमन एवं शांति स्पष्ट तौर पर भारत और चीन के बीच सामान्य संबंधों का आधार हैं हालांकि समय-समय पर ‘‘शरारतपूर्ण ढंग’’ से इसे सीमा से जुड़े सवालों के समाधान के साथ जोड़ दिया जाता है. जयशंकर ने कहा था कि 2020 के बाद भारत और चीन के बीच असहमति दूर करने वाली व्यवस्था स्थापित करना आसान नहीं है लेकिन इस कार्य को दरकिनार नहीं किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संबंध आपसी सम्मान, संवेदनशीलता और हित के आधार पर ही टिकाऊ हो सकते हैं.
ज्ञात हो कि जून 2020 में गलवान घाटी में भीषण झड़प के बाद भारत और चीन के बीच संबंधों में तनाव पैदा हो गया था. पूर्वी लद्दाख के डेमचोक और देपसांग क्षेत्रों में गतिरोध को हल करने पर अभी तक कोई प्रगति नहीं हुई है, हालांकि दोनों पक्षों ने सैन्य और राजनयिक वार्ता के जरिये टकराव वाले ंिबदुओं से सैनिकों को पीछे हटाया है.
भारत वैश्विक मुद्दों पर जी-20 देशों के बीच सहमति बनाने का प्रयास करेगा: जयशंकर
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को कहा कि भारत अपनी अध्यक्षता के दौरान ‘वैश्विक दक्षिण’ क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों के साथ ही कई वैश्विक मुद्दों पर जी-20 देशों के बीच आम सहमति बनाने का प्रयास करेगा क्योंकि यह बैठक ‘‘भू-राजनीतिक संकट, खाद्य और ऊर्जा असुरक्षा और टिकाऊ विकास लक्ष्य की गति’’ के व्यापक संदर्भ में आयोजित की जा रही है. उन्होंने कहा कि भारत इस अवसर का उपयोग देश के ‘‘थ्री डी’’ यानी डेमोक्रेसी, डेवलपमेंट और डायर्विसटी (लोकतंत्र, विकास और विविधता) को रेखांकित करने के लिए करेगा.
जयशंकर ने राज्यसभा में ‘‘भारत की विदेश नीति में नवीनतम घटनाक्रमों’’ विषय पर एक बयान देते हुए कहा, ‘‘हम जी-20 की अध्यक्षता को दुनिया के सामने भारत को प्रर्दिशत करने के अवसर के रूप में देखते हैं.’’ उन्होंने कहा कि भारत न केवल इसमें भाग लेगा बल्कि इस अवसर का ‘‘जश्न’’ भी मनाएगा. भारत ने एक दिसंबर को जी-20 की अध्यक्षता औपचारिक रूप से संभाली. उन्होंने कहा कि सरकार जी-20 के सभी सदस्यों से भारत की अध्यक्षता में होने वाले इस आयोजन की सफलता के लिए समर्थन और सहयोग भी मांग रही है.
उन्होंने कहा कि जी-20 बैठकों का आयोजन भारत की मेजबानी में होने वाले ‘‘शीर्ष अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में से एक’’ होगा. विदेश मंत्री ने कहा कि जी-20 से जुड़ी बैठकें भारत में पहले ही शुरू हो चुकी हैं और देश भर में विभिन्न स्थानों पर 32 विभिन्न क्षेत्रों की ऐसी 200 बैठकों का आयोजन किया जाएगा. जयशंकर ने कहा कि जी-20 की बैठक ‘‘भू-राजनीतिक संकट, खाद्य और ऊर्जा असुरक्षा और टिकाऊ विकास लक्ष्य की गति और कर्ज के बढते बोझ’’ के व्यापक संदर्भ में आयोजित की जा रही है.
उन्होंने कहा, ‘‘हमारा प्रयास जी-20 के भीतर आम सहमति बनाना और विशेष रूप से वैश्विक दक्षिण के मुद्दों को आकार देना और साथ ही इस एजेंडे को आगे बढ़ाना है.’’ ज्ञात हो कि ‘वैश्विक दक्षिण’ (ग्लोबल साउथ) का आशय अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, कैरिबियाई क्षेत्र, प्रशांत द्वीप एवं एशिया के विकासशील देशों से हैं जो दक्षिणी गोलार्द्ध पर स्थित हैं. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी कहा है कि भारत को ‘‘आजादी के अमृत महोत्सव’’ में जी-20 की अध्यक्षता मिलना प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व का क्षण है.
हाल ही में इंडोनेशिया के बाली में संपन्न जी-20 की बैठक में भारत ने पूरा समर्थन व सहयोग सुनिश्चित किया था. जयशंकर ने कहा कि ध्रुवीकरण वाले माहौल में सदस्यों के बीच एक साझा आधार खोजने में भारत के योगदान की व्यापक रूप से सराहना की गई. उन्होंने कहा, ‘‘चूंकि हम जिम्मेदारी (जी-20 की अध्यक्षता) संभाल रहे हैं, इसलिए यह भारत की अध्यक्षता की सफलता के लिए सभी जी 20 सदस्यों का समर्थन और सहयोग मांगने का भी समय है.’’ जी-20 के सदस्यों में अर्जेंटीना, आॅस्ट्रेलिया, ब्राजÞील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, मैक्सिको, कोरिया गणराज्य, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की, यूनाइटेड ंिकगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ शामिल हैं.
जी-20 समूह वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद के 85 प्रतिशत, विश्वव्यापी व्यापार के 75 प्रतिशत और वैश्विक आबादी के दो तिहाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है. इसके अलावा, उन्होंने उच्च सदन में यह भी बताया कि भारत ने मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी को अगले साल गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है.
उन्होंने कहा, ‘‘जहां तक गणतंत्र दिवस समारोह का सवाल है, हमने मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है और उन्होंने विनम्रतापूर्वक निमंत्रण स्वीकार कर लिया है.’’ इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि काशी को 2022-23 के लिए पहली एससीओ (शंघाई सहयोग संगठन) सांस्कृतिक और पर्यटन राजधानी के रूप में नामित किया गया है.
उन्होंने कहा, ‘‘इससे हमारी सदियों पुरानी ज्ञान विरासत और सांस्कृतिक विरासत को प्रर्दिशत करने में मदद मिलेगी.’’ जयशंकर ने कहा कि भारत ब्रिक्स और राष्ट्रमंडल और हाल ही में क्वाड, एससीओ, आई2यू2 (भारत, इजराइल, यूएई और अमेरिका) और ंिहद-प्रशांत आर्थिक ढांचे जैसे समूहों का भी सदस्य है.
उन्होंने कहा, ‘‘हम दुनिया को समूह प्रारूपों में भी तेजी से जोड़ रहे हैं, जो भारत के साथ सहयोग करने में उनकी बढ़ती रुचि को दर्शाता है. यह आसियान, अफ्रीका या प्रशांत द्वीप समूह या वास्तव में नॉर्डिक राष्ट्रों, कैरीकॉम, सीईएलएसी या मध्य एशिया के साथ हो सकता है. यूरोपीय संघ के साथ हमारा बढ़ता सहयोग विशेष महत्व का है.’’ भारत अगले साल जनवारी में 17वें प्रवासी भारतीय दिवस की भी मेजबानी करेगा.