
पुणे/जयपुर. नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने सोमवार को कहा कि कई अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी भारतीय नौसेना के पास नहीं हैं जिनमें प्रणोदन प्रणाली, एयरो इंजन, पानी के अंदर कार्य करने वाली विशिष्ट क्षमताएं शामिल हैं. एडमिरल त्रिपाठी ने छात्रों से इस कमी या विषमता को दूर करने में मदद करने का आग्रह किया. एडमिरल त्रिपाठी ने ”समुद्री शक्ति और आत्मनिर्भरता के माध्यम से भारत के भविष्य को आकार देना – एक भारतीय नौसेना परिप्रेक्ष्य” नामक विषय पर जनरल बी.सी. जोशी मेमोरियल व्याख्यान देते हुए यह बात कही. इसका आयोजन सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय में रक्षा और सामरिक अध्ययन विभाग द्वारा किया गया था.
एडमिरल त्रिपाठी ने कहा, ”….नौसेना ने इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस (आईडीईएक्स) कार्यक्रम में 198 नवाचारों का नेतृत्व किया. कुल 565 चुनौतियों में से लगभग 35 प्रतिशत, हमारी आवश्यकताओं और हमारे नवाचार की विश्वसनीयता को दर्शाती हैं. हालांकि हमने कई क्षमताओं को विकसित करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है, लेकिन कुछ अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियां आज भी हमसे दूर हैं.” उन्होंने जहाजों और पनडुब्बियों के लिए प्रणोदन प्रणाली, एयरो इंजन, पानी के नीचे कार्य करने वाली विशिष्ट क्षमताएं, उच्च-स्तरीय हथियार प्रणाली, हाइपरसोनिक तथा क्रूज प्रणाली को कुछ उन प्रौद्योगिकियों के रूप में सूचीबद्ध किया जो हमारी नौसेना के पास नहीं हैं. एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि यह वह क्षेत्र है जहां युवा छात्र और शोधकर्ता नौसेना को इन कमियों को दूर करने में मदद कर सकते हैं.
उन्होंने कहा, ”हम रक्षा उद्योगों के साथ समानांतर रूप से काम कर रहे हैं.”
राजस्थान में सेना की गोपनीय सूचनाएं पाकिस्तान भेजने के आरोप में युवक गिरफ्तार
राजस्थान अपराध अन्वेषण विभाग (सीआईडी) खुफिया की जयपुर इकाई ने भारतीय सेना से संबंधित सामरिक महत्व की गोपनीय सूचनाएं एकत्रित कर उन्हें पाकिस्तानी आकाओं को भेजने के आरोप में एक युवक को गिरफ्तार किया है. अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी. अधिकारियों के अनुसार, पंजाब के फिरोजपुर निवासी प्रकाश सिंह उर्फ बादल को श्रीगंगानगर जिले से पकड़ा गया.
महानिरीक्षक (खुफिया) प्रफुल्ल कुमार ने बताया कि सीआईडी, पाकिस्तानी गुप्तचर एजेंसियों की जासूसी गतिविधियों की सतत निगरानी कर रही थी तभी पता चला कि प्रकाश सिंह उर्फ बादल सोशल मीडिया के माध्यम से पाकिस्तानी गुप्तचर एजेंसी आईएसआई के संपर्क में था और राजस्थान, पंजाब एवं गुजरात क्षेत्रों से भारतीय सेना से संबंधित गोपनीय एवं सामरिक सूचनाएं एकत्र कर पाकिस्तान स्थित अपने आकाओं को भेज रहा था.
उन्होंने बताया कि 27 नवंबर को संदिग्ध को साधुवाली सैन्य प्रतिष्ठान (श्रीगंगानगर) के आसपास देखा गया. सीमा खुफिया टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे हिरासत में लिया जिसके बाद प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि उसके मोबाइल फोन पर विदेशी एवं पाकिस्तानी व्हॉट्सऐप नंबरों से लगातार संपर्क स्थापित था. पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के समय से ही आईएसआई के निरंतर संपर्क में था और वह भारतीय सेना के वाहनों, सैन्य संस्थानों, सीमावर्ती क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति, पुलों, सड़कों, रेलवे लाइनों और नए निर्माण कार्य संबंधी सामरिक जानकारी पाकिस्तान भेजता था.
अधिकारियों ने बताया कि जासूसी के अलावा बादल एक और गंभीर राष्ट्रविरोधी गतिविधि में शामिल था. उन्होंने बताया कि वह शत्रु देश की मांग पर भारतीय नागरिकों के नाम पर जारी मोबाइल नंबरों के ‘ओटीपी’ पाकिस्तानी एजेंटों को उपलब्ध करवाता था.
उन्होंने बताया कि इन ओटीपी के माध्यम से पाकिस्तानी एजेंट भारतीय नंबरों पर व्हॉट्सऐप सक्रिय कर जासूसी और अन्य अवैध गतिविधियों को अंजाम देते थे. इस काम के बदले उसे धनराशि भी मिलती थी.
आरोपी को अग्रिम कार्रवाई के लिए जयपुर स्थित केंद्रीय पूछताछ केंद्र लाया गया. यहां विभिन्न खुफिया एजेंसियों द्वारा पूछताछ तथा मोबाइल के तकनीकी विश्लेषण में उपरोक्त सभी तथ्य प्रमाणित हुए. प्रकाश सिंह (34) के खिलाफ शासकीय गुप्त बात अधिनियम, 1923 के तहत मामला दर्ज कर उसे सोमवार को गिरफ्तार कर लिया गया.



