भारत का इलेक्ट्रिक वाहन बाजार 2030 तक 20 लाख करोड़ रुपये का होगा : गडकरी

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 19 Dec 2024 08:47 PM
भारत का इलेक्ट्रिक वाहन बाजार 2030 तक 20 लाख करोड़ रुपये का होगा : गडकरी

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नयी दिल्ली. केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारतीय इले्ट्रिरक वाहन (ईवी) बाजार का आकार 2030 तक 20 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है और इससे समूचे ईवी परिवेश में करीब पांच करोड़ नौकरियों का सृजन होगा.

गडकरी ने ई-वाहन उद्योग की स्थिरता पर 8वें ‘कैटलिस्ट कॉन्फ्रेंस- ईवी एक्सपो-2024’ को संबोधित करते हुए कहा कि अनुमान है कि 2030 तक इले्ट्रिरक वाहन के वित्तपोषण यानी फाइनेंस के बाजार का आकार करीब चार लाख करोड़ रुपये होगा. उन्होंने कहा, ” भारतीय इले्ट्रिरक वाहन बाजार की क्षमता 2030 तक 20 लाख करोड़ रुपये होगी जिससे संपूर्ण ईवी परिवेश में पांच करोड़ नौकरियों का सृजन होगा.” सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री ने कहा कि भारत में 40 प्रतिशत वायु प्रदूषण के लिए परिवहन क्षेत्र जिम्मेदार है.

गडकरी ने कहा, ” हम 22 लाख करोड़ रुपये मूल्य के जीवाश्म ईंधन का आयात करते हैं, जो एक बड़ी आर्थिक चुनौती है. जीवाश्म ईंधन का यह आयात हमारे देश में कई समस्याएं उत्पन्न कर रहा है.” मंत्री ने कहा कि सरकार हरित ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित कर रही है क्योंकि भारत की 44 प्रतिशत बिजली की खपत सौर ऊर्जा पर आधारित है. उन्होंने कहा, ” हम जल विद्युत उसके बाद सौर ऊर्जा, हरित ऊर्जा खासकर ‘बायोमास’ के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहे हैं. अब सौर ऊर्जा हम सभी के लिए महत्वपूर्ण स्रोतों में से एक है.” गडकरी ने देश में इले्ट्रिरक बसों की समस्या पर भी प्रकाश डाला.

मंत्री ने कहा, ” हमारे देश को एक लाख इले्ट्रिरक बसों की जरूरत है लेकिन अभी हमारे पास केवल 50 हजार बस हैं. मैं आप सभी से आग्रह करता हूं कि यही आपके लिए अपने कारखाने का विस्तार करने का सही समय है.” गडकरी ने इले्ट्रिरक वाहन विनिर्माताओं से गुणवत्ता के साथ समझौता न करने की बात भी कही. उन्होंने कहा कि 2014 में जब उन्होंने परिवहन मंत्री का कार्यभार संभाला था तब मोटर वाहन उद्योग का आकार सात लाख करोड़ रुपये था.

मंत्री ने कहा, ” आज यह (मोटर वाहन उद्योग का आकार) 22 लाख करोड़ रुपये है. हम दुनिया में तीसरे स्थान पर हैं. हमने हाल ही में जापान को पीछे छोड़ा है.” इस सूची में 78 लाख करोड़ रुपये के मोटर वाहन उद्योग के साथ अमेरिका पहले स्थान पर और चीन 47 लाख करोड़ रुपये के साथ दूसरे स्थान पर है.

एथनॉल-डीजल, हरित हाइड्रोजन उत्पादन में विविधीकरण का रास्ता तलाशे चीनी उद्योग : गडकरी

सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बृहस्पतिवार को चीनी उद्योग से एथनॉल-डीजल मिश्रण और हरित हाइड्रोजन उत्पादन सहित विविधीकरण के लिए कई रास्ते तलाशने का आ”ान किया. भारतीय चीनी और जैव-ऊर्जा निर्माता संघ (इस्मा) की वार्षिक आम बैठक को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए मंत्री ने निजी क्षेत्र की भागीदारी सहित एथनॉल और सीएनजी पंप स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया.

जीवाश्म ईंधन के विकल्प के रूप में फ्लेक्स इंजन, एथनॉल आधारित इंजन और बायो-सीएनजी की अपार संभावनाएं हैं. उन्होंने कहा कि टाटा, सुजुकी और टोयोटा सहित पांच वाहन निर्माता बाजार में फ्लेक्स इंजन ईंधन कारें पेश करने के लिए तैयार हैं और उन्होंने ट्रैक्टर निर्माताओं से वैकल्पिक ईंधन पर ट्रैक्टर बनाना शुरू करने का आग्रह किया. मंत्री ने बाजार के अवसरों का विस्तार करने के लिए बांग्लादेश, भूटान, नेपाल और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों को एथनॉल निर्यात करने की संभावनाओं की तलाश करने का सुझाव दिया. उन्होंने वैकल्पिक ईंधन स्रोत के रूप में हरित हाइड्रोजन की क्षमता पर जोर दिया और चीनी और एथनॉल उद्योगों में मौजूदा बुनियादी ढांचे का उपयोग करके हरित हाइड्रोजन का उत्पादन करने का सुझाव दिया.

उन्होंने कहा, ”मुझे पता है कि चीनी बनाना कोई आकर्षक काम नहीं है, लेकिन साथ ही, एथनॉल, सीएनजी, हाइड्रोजन और अन्य उप-उत्पादों के कारण हम उद्योग में उत्पादकता और लाभप्रदता बढ़ा सकते हैं.” मंत्री ने कहा, ”उद्योग को नैनो-उर्वरक और ड्रोन छिड़काव जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से गन्ना उत्पादकता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए.” मंत्री ने कहा कि सरकार चीनी निर्यात और न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) के संबंध में उद्योग के अनुरोध पर भी विचार करेगी.

उन्होंने कहा, ”मैं इसमें आपकी मदद करने की पूरी कोशिश करूंगा क्योंकि यह देश और किसानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. हमें कोई रास्ता निकालना होगा.” मंत्री के अनुसार, इन पहल का उद्देश्य उपभोक्ताओं और किसानों दोनों के हितों की रक्षा करते हुए इस क्षेत्र की लाभप्रदता को बढ़ाना है.

By Yogesh Kumar Sahu