भारत का पहला निजी तौर पर विकसित रॉकेट शुक्रवार को प्रक्षेपण के लिए तैयार

चेन्नई/नयी दिल्ली. भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम शुक्रवार को नयी ऊंचाइयां छुएगा जब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) श्रीहरिकोटा में अपने केंद्र से देश का पहला निजी तौर पर विकसित रॉकेट ‘विक्रम-एस’ का प्रक्षेपण करेगा. चार साल पुराने स्टार्ट-अप स्काईरूट एयरोस्पेस के विक्रम-एस रॉकेट के पहले प्रक्षेपण के लिए तैयारी कर ली गयी हैं. यह देश के अंतरिक्ष उद्योग में निजी क्षेत्र के प्रवेश को दर्शाएगा जिस पर दशकों से सरकारी स्वामित्व वाले इसरो का प्रभुत्व रहा है.

स्काईरूट एयरोस्पेस भारत की पहली निजी क्षेत्र की कंपनी बन गयी है जो 2020 में केंद्र सरकार द्वारा अंतरिक्ष उद्योग को निजी क्षेत्र के लिए खोले जाने के बाद भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम में कदम रख रही है. पहले निजी रॉकेट विक्रम-एस के प्रक्षेपण के लिए शुक्रवार पूर्वाह्न 11:30 बजे का समय निर्धारित किया गया है. पहले इसे 15 नवंबर को प्रक्षेपित करने की योजना थी.

विक्रम-एस सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से इसके प्रक्षेपण के बाद 81 किलोमीटर की ऊंचाई पर पहुंचेगा. रॉकेट का नामकरण भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक और दिवंगत वैज्ञानिक विक्रम साराभाई के नाम पर किया गया है. ‘प्रारंभ’ नामक मिशन में दो घरेलू और एक विदेशी ग्राहक के तीन पेलोड को ले जाया जाएगा. विक्रम-एस उप-कक्षीय उड़ान में चेन्नई के स्टार्ट-अप स्पेस किड्ज, आंध्र प्रदेश के स्टार्ट-अप एन-स्पेस टेक और आर्मेनियाई स्टार्ट-अप बाजूमक्यू स्पेस रिसर्च लैब के तीन पेलोड ले जाये जाएंगे.

स्काईरूट के एक अधिकारी ने कहा कि छह मीटर लंबा रॉकेट दुनिया के पहले कुछ ऐसे रॉकेट में शामिल है जिसमें घुमाव की स्थिरता के लिए 3-डी ंिप्रटेड ठोस प्रक्षेपक हैं. भारतीय अंतरिक्ष नियामक इन-स्पेस ने बुधवार को स्काईरूट के विक्रम-एस उप-कक्षीय यान के प्रक्षेपण को अधिकृत किया था.

भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्द्धन और प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) के अध्यक्ष पवन गोयनका ने कहा, ‘‘यह भारत में निजी क्षेत्र के लिए बड़ी छलांग है. स्काईरूट को रॉकेट के प्रक्षेपण के लिए अधिकृत की जाने वाली पहली भारतीय कंपनी बनने पर बधाई.’’ केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र ंिसह ने कहा कि भारत इसरो के दिशानिर्देशों के तहत श्रीहरिकोटा से ‘स्काईरूट एयरोस्पेस’ द्वारा विकसित पहले निजी रॉकेट का प्रक्षेपण करके इतिहास रचने जा रहा है.

उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र के सुधारों ने स्टार्ट-अप के लिए नवोन्मेषी संभावनाएं खोली हैं और बहुत कम समयावधि में करीब 102 स्टार्ट-अप अंतरिक्ष मलबा प्रबंधन, नैनो-सेटेलाइट, प्रक्षेपण यान और अनुसंधान आदि क्षेत्रों में काम कर रहे हैं. स्काईरूट एयरोस्पेस ने मंत्री के बयान के जवाब में सोशल मीडिया पर कहा, ‘‘हमें अपने मिशन पर गर्व है जो भारतीय निजी क्षेत्र के लिए इतिहास बनाने जा रहा है तथा हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने को साकार करेगा.’’ इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने इस महीने की शुरुआत में बेंगलुरु में ‘प्रारंभ’ का अनावरण किया था. स्काईरूट एयरोस्पेस के सह-संस्थापक पवन के. चांदना ने कहा, ‘‘हमारी टीम की महीनों तक रात-रात जगकर और पूरी सावधानी के साथ की गयी तैयारियों के बाद हम अपने पहले प्रक्षेपण मिशन ‘प्रारंभ’ की घोषणा करते हुए अति उत्साहित हैं.’’

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