भारत का इजराइल के साथ निवेश समझौता, निवेशकों को दी ‘छूट’

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Mon, 08 Sep 2025 09:40 PM
भारत का इजराइल के साथ निवेश समझौता, निवेशकों को दी ‘छूट’
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नयी दिल्ली. भारत और इजराइल ने सोमवार को द्विपक्षीय निवेश समझौते (बीआईए) पर हस्ताक्षर किए जिसमें इजराइली निवेशकों के लिए स्थानीय उपायों की समाप्ति अवधि को पांच वर्ष से घटाकर तीन वर्ष कर दिया गया है. इस प्रावधान को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के साथ निवेश समझौते में भी शामिल किया गया था जो पिछले साल लागू हुआ था.

स्थानीय उपायों की समाप्ति का मतलब है कि किसी विदेशी निवेशक को अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता में जाने से पहले मेजबान देश की कानूनी प्रणाली में उपलब्ध उपायों का सहारा लेना अनिवार्य होता है. भारत में इस अवधि को पांच वर्ष रखा गया है. वित्त मंत्रालय ने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के निवेशकों को भरोसा देने के साथ निवेशों की सुरक्षा, पारर्दिशता, मुआवजा और सुगम हस्तांतरण का प्रावधान करता है. मंत्रालय के मुताबिक, यह निवेश समझौता निवेशकों को न्यूनतम मानक सुरक्षा और स्वतंत्र मध्यस्थता व्यवस्था उपलब्ध कराएगा जिससे व्यापार और निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और इजराइल के वित्त मंत्री बेजालेल स्मोट्रिच ने यहां द्विपक्षीय निवेश समझौते पर हस्ताक्षर किए.
इस दौरान दोनों मंत्रियों ने वित्तीय-प्रौद्योगिकी नवाचार, अवसंरचना विकास, वित्तीय नियमन और डिजिटल भुगतान कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई. सीतारमण ने कहा कि दोनों पक्षों को व्यापारिक संवाद बढ़ाकर निवेश के अवसर तलाशने चाहिए ताकि इस समझौते से अधिकतम लाभ उठाया जा सके.

यह समझौता इस लिहाज से महत्वपूर्ण है कि इजराइल ‘आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन’ (ओईसीडी) का पहला सदस्य देश है जिसके साथ भारत ने ऐसा निवेश समझौता किया है. वर्तमान में दोनों देशों के बीच कुल निवेश लगभग 80 करोड़ अमेरिकी डॉलर है और यह समझौता द्विपक्षीय निवेश को तेज करने का काम करेगा.

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल, 2000 से जून, 2025 के बीच भारत को इजराइल से 33.77 करोड़ डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) मिला है. इसी अवधि में भारत में कुल एफडीआई प्रवाह एक लाख करोड़ डॉलर के आंकड़े को पार कर गया, जिसने इसे वैश्विक स्तर पर एक सुरक्षित और प्रमुख निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित किया है. भारत इस समय सऊदी अरब, कतर, ओमान, स्विट्जरलैंड, रूस, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय संघ सहित एक दर्जन से अधिक देशों के साथ निवेश संधियों पर बातचीत कर रहा है.
पिछले वर्ष भारत ने यूएई और उज्बेकिस्तान के साथ निवेश संधियों को लागू किया था.

भारत व्यापार समझौतों में किसानों, एमएसएमई के हित सुरक्षित रखने को प्रतिबद्ध?

भारत किसी भी द्विपक्षीय व्यापार समझौते को ‘समान, न्यायसंगत और संतुलित’ बनाना चाहता है क्योंकि सरकार किसानों और सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के हितों की रक्षा के लिये प्रतिबद्ध है. आधिकारिक सूत्रों ने सोमवार को यह बात कही.
यह बयान ऐसे समय आया है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले अमेरिकी प्रशासन ने भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत का भारी शुल्क लगा दिया है. इससे अमेरिकी बाजार में माल भेजने वाले निर्यातकों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है.

सरकारी सूत्रों ने कहा, ”भारत अपनी प्राथमिकताओं, खासकर किसानों, मछुआरों, एमएसएमई क्षेत्र और डेयरी को ध्यान में रखते हुए बेहद संवेदनशीलता के साथ काम करता है. इन सभी बिंदुओं को देखते हुए भारत वैश्विक स्तर पर द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाना चाहता है. (लेकिन) इसमें परस्परता होनी चाहिए और यह समान, न्यायसंगत और संतुलित होना चाहिए.” भारत इस समय यूरोपीय संघ समेत कई देशों के साथ व्यापार समझौतों पर बातचीत कर रहा है.

इसके अलावा भारत की द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर अमेरिका के साथ भी बात चल रही है. हालांकि, शुल्क मुद्दों पर जुड़े तनाव के बीच इस समझौते पर बातचीत फिलहाल रुक गई है. अमेरिकी दल को छठे दौर की वार्ता के लिए 25 अगस्त को भारत आना था लेकिन शुल्क संबंधी घोषणाओं के बीच उसने इस यात्रा को टाल दिया. अभी नई तारीख की घोषणा भी नहीं की गई है. भारत कृषि एवं डेयरी क्षेत्र को खोले जाने की अमेरिकी मांग को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है. इसी वजह से दोनों पक्षों के बीच गतिरोध पैदा हो गया है.

अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है. वित्त वर्ष 2024-25 में भारत और अमेरिका के बीच वस्तु व्यापार 131.8 अरब डॉलर का रहा. इसमें भारत का निर्यात 86.5 अरब डॉलर और आयात 45.3 अरब डॉलर था. इस बीच, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि सरकार अमेरिकी शुल्क से प्रभावित भारतीय निर्यातकों के लिये एक व्यापक पैकेज पर काम कर रही है और इसका आकलन करने के लिये बहु-विभागीय स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं.

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