
कानपुर देहात. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोंिवद और उनके पैतृक गांव ‘परौंख’ की सराहना करते हुए परिवारवाद पर जमकर प्रहार किया. उन्होंने आ’’ान किया कि देश में गरीब का बेटा प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति बन सके, इसके लिए परिवारवादी पार्टियों को रोका जाना बहुत जरूरी है.
मोदी ने राष्ट्रपति की मौजूदगी में कानपुर देहात जिले के उनके पैतृक गांव परौंख में आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए गांव और कस्बों की मिट्टी से जुड़े राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल और खुद की चर्चा करते हुए कहा कि ‘‘यही हमारे लोकतंत्र की ताकत है, गांव में पैदा गरीब से गरीब व्यक्ति राज्यपाल, मुख्यमंत्री, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के पद तक पहुंच सकता है.’’ उन्होंने आगाह किया कि ”आज जब हम लोकतंत्र के ताकत की चर्चा कर रहे हैं तो हमें इसके सामने खड़ी परिवारवाद जैसी चुनौतियों से भी सावधान रहने की जरूरत है. यह परिवारवाद ही है जो राजनीति ही नहीं, हर क्षेत्र में प्रतिभाओं का गला घोंटता है, उन्हें आगे बढ़ने से रोकता है.”
मोदी ने कहा कि ”जब मैं परिवारवाद के खिलाफ बात करता हूं तो कुछ लोगों को लगता है कि मैं राजनीतिक दल के खिलाफ बात कर रहा हूं.” बिना किसी का नाम लिए उन्होंने तंज किया ”मैं देख रहा हूं कि जो परिवारवाद की व्याख्या में सही बैठते हैं, वे मुझसे भड़के हुए हैं, मुझसे गुस्से में हैं. देश के कोने-कोने में ये परिवारवादी मेरे खिलाफ एकजुट हो रहे हैं.” प्रधानमंत्री ने कहा कि ”वे इस बात से नाराज हो रहे हैं कि क्यों देश का युवा परिवारवाद के खिलाफ मोदी की बात को इतनी गंभीरता से ले रहा है.”
मोदी ने कहा कि ”मैं लोगों को कहना चाहता हूं कि मेरी बात का गलत अर्थ न निकालें, मेरी किसी राजनीतिक दल, किसी व्यक्ति से व्यक्तिगत नाराजगी नहीं है. मैं तो चाहता हूं कि देश में मजबूत विपक्ष हो, लोकतंत्र को सर्मिपत राजनीतिक पार्टियां हों, मैं चाहता हूं कि परिवारवाद के शिकंजे में फंसी पार्टियां खुद को इस बीमारी से मुक्त करें. तभी भारत का लोकतंत्र मजबूत होगा. देश के युवाओं को राजनीति में आने का ज्यादा से ज्यादा अवसर मिलेगा.” उन्होंने कहा कि मैं परिवारवादी पार्टियों से ज्यादा ही उम्मीद कर रहा हूं. आपसे भी कहूंगा कि देश में परिवारवाद की बुराइयों को न पनपने दें. मोदी ने कहा कि देश में गरीब का बेटा प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति बन सके, इसके लिए परिवारवादी पार्टियों को रोका जाना बहुत जरूरी है.
राष्ट्रपति की चर्चा करते हुए मोदी ने कहा कि ‘‘आज राष्ट्रपति ने गांव में पद के द्वारा बनी सारी मर्यादाओं से बाहर निकलकर मुझे हैरान कर दिया, स्वयं हेलीपैड पर रिसीव (आगवानी) करने आए.’’ उन्होंने कहा कि ‘‘परौंख की मिट्टी से राष्ट्रपति को जो संस्कार मिले हैं, उसकी साक्षी दुनिया बन रही है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘अतिथि देवो भव का उत्तम उदाहरण राष्ट्रपति जी ने प्रस्तुत किया है.’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि ”… भारत की आत्मा गांव में बसती है, क्योंकि गांव हमारी आत्माओं में बसता है.”
उन्होंने कहा कि ”आज आजादी के अमृत महोत्सव पर ऐसे ही गांवों का पुनर्जागरण और उनका पुनर्गठन हमारा संकल्प है. इसी संकल्प को लेकर देश गांव, गरीब, कृषि किसान और पंचायती लोकतंत्र के विभिन्न आयामों में काम कर रहा है. आज भारत के गांवों में तेज गति से विकास हो रहा है.”



