गाजा पर इजराइली हमलों के विरोध में आईयूएमएल 26 अक्टूबर को कोझिकोड में रैली आयोजित करेगा

मलप्पुरम: केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ में सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) ने सोमवार को घोषणा की कि वह गाजा पट्टी पर इजराइल की बमबारी में बच्चों सहित आम नागरिकों की कथित ‘अवांछित’ हत्या के विरोध में इस सप्ताह एक बड़ी रैली आयोजित करेगी।

आईयूएमएल के राष्ट्रीय महासचिव पी के कुन्हालीकुट्टी ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इजराइल की कार्रवाई के खिलाफ ब्रिटेन और अमेरिका समेत कई देशों और यहां तक कि कई भारतीय शहरों में भी विरोध रैलियां आयोजित की गई है।

केरल के मलप्पुरम जिले के वेंगारा विधानसभा क्षेत्र से यूडीएफ विधायक कुन्हालीकुट्टी ने कहा, ‘‘इन परिस्थितियों में, हमने 26 अक्टूबर को कोझिकोड में सबसे बड़ी, शांतिपूर्ण विरोध रैली आयोजित करने का फैसला किया।’’ उन्होंने कहा कि अगर इंसान का विवेक जाग जाए तो विरोध का असर होगा। पार्टी के वरिष्ठ नेता ने यह भी दावा किया कि इजराइल में वर्तमान सरकार उस देश के इतिहास में सबसे अलोकप्रिय है।

आईयूएमएल नेता ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि दुनिया की अंतरात्मा पंगु हो गई है क्योंकि कोई भी देश संघर्ष को समाप्त करने के लिए कदम नहीं उठा रहा है। कुन्हालीकुट्टी ने कहा, ‘‘यह सब होने के बावजूद, पश्चिमी देश और यूरोपीय देश इजराइल को अधिक समर्थन दे रहे हैं। उनके बीच इज़राइल का समर्थन करने के लिए होड़ मची है ।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इजरायल की हरकतें यह सवाल उठाती हैं कि क्या दुनिया और मानवता की अंतरात्मा पंगु बन गई हैं। कुन्हालीकुट्टी ने कहा कि गाजा की स्थिति यह दर्शाती है कि आज की सभ्य दुनिया में भी ‘रक्तपात की कोई सीमा नहीं है ।’’

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इजराइल पर हमास का हमला गाजा पर लगातार हो रहे हमलों और इजराइल द्वारा वहां रहने वाले लोगों पर किए गए अत्याचार का नतीजा है। केरल के पूर्व मंत्री ने यह भी तर्क दिया कि यदि अमेरिका सहित पश्चिमी देशों ने पहले हस्तक्षेप किया होता, तो संघर्ष को टाला जा सकता था।

इज़राइल सरकार ने दावा किया है कि देश में 1,400 से अधिक लोग मारे गए हैं, जिनमें से ज्यादातर नागरिक हमास की ओर से सात अक्टूबर को अचानक किये गये हमले के दौरान मारे गए हैं। हमास द्वारा संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, गाजा में 4,600 से अधिक लोग मारे गए हैं। इसमें एक अस्पताल विस्फोट से मरने वालों की विवादित संख्या भी शामिल है।

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