
नयी दिल्ली. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को राज्यसभा में कहा कि सरकार भारतीय कंपनियों को रूस से तेल खरीदने के लिए नहीं कहती है, लेकिन भारतीय लोगों के हित में सबसे अच्छा सौदा हासिल करना एक समझदारी भरी नीति है. राज्यसभा में ‘‘भारत की विदेश नीति में नवीनतम घटनाक्रमों’’ पर दिए गए एक बयान के बाद सदस्यों की ओर से मांगे गए स्पष्टीकरण पर जयशंकर ने यह जानकारी दी.
जयशंकर ने कहा कि यह सुनिश्चित करना उनका कर्तव्य है कि वे भारतीय लोगों के हितों को सर्वोपरि रखें ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उन्हें उर्वरक, भोजन आदि के लिए कुछ अन्य देशों के कार्यों या किसी अन्य क्षेत्र की गतिविधिओं की कीमत ना चुकानी पड़े.
उन्होंने कहा, ‘‘हम अपनी कंपनियों को रूसी तेल खरीदने के लिए नहीं कहते हैं. हम उन्हें कहते हैं कि उन्हें जो सबसे अच्छा विकल्प मिले, उसी के अनुसार वे तेल खरीदें. यह बाजार की स्थिति पर निर्भर करता है.’’
विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘अगर कल बाजार हमें अधिक प्रतिस्पर्धी विकल्प देता है तो फिर, कृपया समझिए. ऐसा नहीं है कि हम सिर्फ एक देश से तेल खरीदते हैं. हम कई स्रोतों से तेल खरीदते हैं, लेकिन भारतीय लोगों के हितों में जो सबसे अच्छा सौदा मिलता है वह एक समझदार नीति है. हम यही करने की कोशिश कर रहे हैं.’’ ज्ञात हो कि अमेरिका और यूरोपीय देश यूक्रेन संघर्ष के दौरान रूस से भारत के तेल आयात की आलोचना करते रहे हैं, लेकिन नई दिल्ली इस मुद्दे पर दृढ़ बनी हुई है.
यूक्रेन मुद्दे पर जयशंकर ने कहा कि सरकार का रुख प्रधानमंत्री के स्तर पर कई मौकों पर सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया गया है कि यह युद्ध का युग नहीं है. उन्होंने कहा, ‘‘हमने लगातार बातचीत और कूटनीति का आग्रह किया है. जब भारतीय लोगों या बाकी दुनिया पर युद्ध के प्रभाव की बात आती है, तो हमने भी सही चीजें की हैं. हमने प्रभाव को कम करने के उपाय किए हैं, वह चाहे ईंधन का हो या खाद्य मुद्रास्फीति का हो या उर्वरक मूल्यों का हो.’’ यूक्रेन से लौटे छात्रों के बारे में द्रमुक सदस्य तिरुचि शिवा के सवाल के जवाब में जयशंकर ने कहा कि कुछ छात्र वापस चले गए हैं जबकि कुछ अन्य समाधान तलाश रहे हैं.
उन्होंने कहा, ‘‘कुछ मामलों में, यूक्रेनी अधिकारियों ने कुछ समाधान की भी पेशकश की है. यह एक बहुत ही मिली जुली तस्वीर है. दुर्भाग्य से, फिलहाल कोई स्पष्ट और सरल जवाब नहीं है. लेकिन सरकार इस स्थिति में जो कर सकती है, वह कर रही है.’’
भारत वैश्विक मुद्दों पर जी-20 देशों के बीच सहमति बनाने का प्रयास करेगा
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को कहा कि भारत अपनी अध्यक्षता के दौरान कई वैश्विक मुद्दों पर जी-20 देशों के बीच आम सहमति बनाने का प्रयास करेगा क्योंकि यह बैठक ‘‘भू-राजनीतिक संकट, खाद्य और ऊर्जा असुरक्षा और टिकाऊ विकास लक्ष्य की गति’’ के व्यापक संदर्भ में आयोजित की जा रही है. उन्होंने कहा कि भारत इस अवसर का उपयोग देश के ‘‘थ्री डी’’ यानी डेमोक्रेसी, डेवलपमेंट और डायर्विसटी (लोकतंत्र, विकास और विविधता) को रेखांकित करने के लिए करेगा.
जयशंकर ने राज्यसभा में ‘‘भारत की विदेश नीति में नवीनतम घटनाक्रमों’’ विषय पर एक बयान देते हुए कहा कि सरकार जी-20 के सभी सदस्यों से भारत की अध्यक्षता में होने वाले इस आयोजन की सफलता के लिए समर्थन और सहयोग भी मांग रही है. उन्होंने कहा कि जी-20 बैठकों का आयोजन भारत की मेजबानी में होने वाले ‘‘शीर्ष अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में से एक’’ होगा. विदेश मंत्री ने कहा कि जी-20 से जुड़ी बैठकें भारत में पहले ही शुरू हो चुकी हैं और देश भर में विभिन्न स्थानों पर 32 विभिन्न क्षेत्रों की ऐसी 200 बैठकों का आयोजन किया जाएगा.
जयशंकर ने कहा कि जी-20 की बैठक ‘‘भू-राजनीतिक संकट, खाद्य और ऊर्जा असुरक्षा और टिकाऊ विकास लक्ष्य की गति और कर्ज के बढते बोझ’’ के व्यापक संदर्भ में आयोजित की जा रही है. उन्होंने कहा, ‘‘हमारा प्रयास जी-20 के भीतर आम सहमति बनाना और विशेष रूप से वैश्विक दक्षिण के मुद्दों को आकार देना और साथ ही इस एजेंडे को आगे बढ़ाना है.’’ यह समूह वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद के 85 प्रतिशत, विश्वव्यापी व्यापार के 75 प्रतिशत और वैश्विक आबादी के दो तिहाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है.
उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी कहा है कि भारत को ‘‘आजादी के अमृत महोत्सव’’ में जी-20 की अध्यक्षता मिलना प्रत्येक भारतीय के लिए गर्व का क्षण है. हाल ही में इंडोनेशिया के बाली में संपन्न जी-20 की बैठक में भारत ने पूरा समर्थन व सहयोग सुनिश्चित किया था. जयशंकर ने कहा कि ध्रुवीकरण वाले माहौल में सदस्यों के बीच एक साझा आधार खोजने में भारत के योगदान की व्यापक रूप से सराहना की गई.
उन्होंने कहा, ‘‘चूंकि हम जिम्मेदारी (जी-20 की अध्यक्षता) संभाल रहे हैं, इसलिए यह भारत की अध्यक्षता की सफलता के लिए सभी जी 20 सदस्यों का समर्थन और सहयोग मांगने का भी समय है.’’ इसके अलावा, उन्होंने उच्च सदन में यह भी बताया कि भारत ने मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी को अगले साल गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है.
उन्होंने कहा, ‘‘जहां तक गणतंत्र दिवस समारोह का सवाल है, हमने मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया है और उन्होंने विनम्रतापूर्वक निमंत्रण स्वीकार कर लिया है.’’ इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि काशी को 2022-23 के लिए पहली एससीओ (शंघाई सहयोग संगठन) सांस्कृतिक और पर्यटन राजधानी के रूप में नामित किया गया है.
उन्होंने कहा, ‘‘इससे हमारी सदियों पुरानी ज्ञान विरासत और सांस्कृतिक विरासत को प्रर्दिशत करने में मदद मिलेगी.’’
चीन द्वारा एलएसी को बदलने के एकतरफा प्रयासों को भारत बर्दाश्त नहीं करेगा
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को कहा कि चीन द्वारा वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) को बदलने के एकतरफा प्रयासों को भारत बर्दाश्त नहीं करेगा और जब तक यह स्थिति रहेगी, दोनो पड़ोसी देशों के बीच संबंध सामान्य नहीं होंगे. राज्यसभा में ‘‘भारत की विदेश नीति में नवीनतम घटनाक्रमों’’ पर दिए गए एक बयान के बाद सदस्यों की ओर से मांगे गए स्पष्टीकरण पर जयशंकर ने यह जानकारी दी.
कांग्रेस के प्रमोद तिवारी और नासिर हुसैन ने भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव से जुड़े मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री से जवाब मांगा था.
जयशंकर ने कहा, ‘‘कूटनीतिक रूप से हम चीन के साथ बहुत स्पष्ट रहे हैं कि वास्तविक नियंत्रण रेखा को बदलने के प्रयासों को हम बर्दाश्त नहीं करेंगे. जब तक वे ऐसा करना जारी रखते हैं और यदि उन्होंने ऐसी ताकतों का निर्माण किया जो हमारे लिए सीमावर्ती क्षेत्र में एक गंभीर ंिचता का विषय हैं, तो हमारे संबंध सामान्य नहीं हैं.’’ उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में दोनों देशों के ‘‘असामान्य रिश्ते’’ भी इसका सबूत है. जयशंकर ने कहा कि दोनों देशों के बीच वरिष्ठ सैन्य कमांडर स्तरीय वार्ता जारी है.
उन्होंने कहा कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए फिलहाल इसे सैन्य कमांडर स्तरीय वार्ता पर छोड़ दिया जाना चाहिए. ज्ञात हो कि जून 2020 में गलवान घाटी में भीषण झड़प के बाद भारत और चीन के बीच संबंधों में तनाव पैदा हो गया था. पूर्वी लद्दाख के डेमचोक और देपसांग क्षेत्रों में गतिरोध को हल करने पर अभी तक कोई प्रगति नहीं हुई है, हालांकि दोनों पक्षों ने सैन्य और राजनयिक वार्ता के जरिये टकराव वाले बिंदुओं से सैनिकों को पीछे हटाया है.
कतर में हिरासत में लिए गए भारतीयों की सुरक्षा सर्वोपरि
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को कहा कि कतर में हिरासत में लिए गए भारतीय नौसेना के आठ पूर्व र्किमयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उन्हें जल्द से जल्द स्वदेश लाने की भारत सरकार हरसंभव कोशिश कर रही है. राज्यसभा में ‘‘भारत की विदेश नीति में नवीनतम घटनाक्रमों’’ पर दिए गए एक बयान के बाद सदस्यों की ओर से मांगे गए स्पष्टीकरण पर जयशंकर ने यह जानकारी दी.
बीजू जनता दल के सुजीत कुमार ने कतर में भारतीय नौसेना के आठ पूर्व र्किमयों को हिरासत में लिए जाने का मुद्दा उठाते उनसे जानना चाहा था कि उन्हें सुरक्षित घर वापस लाने के लिए सरकार की ओर से क्या प्रयास किए जा रहे हैं. इसके जवाब में जयशंकर ने कहा कि यह बेहद ही ‘‘संवेदनशील’’ मामला है.
उन्होंने कहा, ‘‘मैं इतना जरूर कह सकता हूं कि उनकी सुरक्षा हमारे लिए सर्वोपरि है. हम इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं. हमारे राजदूत और अधिकारी कतर की सरकार के लगातार संपर्क में हैं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमारा प्रयास स्पष्ट रूप से यह सुनिश्चित करने का है कि उनके साथ अनुचित व्यवहार न किया जाए और जल्द से जल्द हम उन्हें वापस ला सकें.’’ ज्ञात हो कि कतर में हिरासत में लिये गये लोग दाहरा ग्लोबल टेक्नॉलोजी एंड कंसलटेंसी के लिए काम कर रहे थे. यह एक निजी कंपनी है.



