
मुंबई. फिल्म निर्माता राम माधवानी का कहना है कि उन्होंने अपनी आगामी सीरीज. “वेकिंग ऑफ ए नेशन” में भारत के स्वतंत्रता संग्राम की मार्मिक ऐतिहासिक घटनाओं में से एक, जलियांवाला बाग हत्याकांड को “संवेदनशील और ईमानदार” तरीके से दिखाने का प्रयास किया है.
औपनिवेशिक शासनकाल की पृष्ठभूमि पर आधारित यह ऐतिहासिक सीरीज. जलियांवाला बाग हत्याकांड की साजिश और उससे जुड़ी घटनाओं तथा इस त्रासदी के संबंध में हंटर आयोग की जांच पर आधारित है. “वेकिंग ऑफ ए नेशन” का सह-लेखन माधवानी, शांतनु श्रीवास्तव और शत्रुजीत नाथ ने किया है. माधवानी ने कहा कि वह इस सीरीज. के जरिए उन लोगों की स्मृतियों का सम्मान कर रहे हैं जिन्होंने अपनी जान गंवा दी.
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ साक्षात्कार में कहा, ” हमने नरसंहार नहीं दिखाया है, हमने सिर्फ सैनिकों को आते हुए दिखाया है. मैं इसे नहीं दिखाना चाहता था, और जिस तरह से हमने इसे दिखाया, उसमें यही सबसे संवेदनशील हिस्सा था. दूसरे फिल्म निर्माताओं ने नरसंहार दिखाया है. हम नहीं जानते कि 400 लोग मारे गए थे या 2,000…, इसलिए इसे न दिखाना ज़्यादा सम्मानजनक होगा.” एमी पुरस्कार विजेता निर्देशक ने कहा, ” हमने इसे उन लोगों को सर्मिपत किया है जिन्होंने नरसंहार के दौरान अपनी जान गंवाई है, और हम इसे अत्यंत सम्मान और संवेदनशीलता के साथ पेश करना चाहते थे.” फिल्म निर्माता ने यह भी कहा कि उन्होंने हिंदी सिनेमा में अंग्रेजों के व्यंग्यात्मक चित्रण से भी दूर रहने की कोशिश की है.
उन्होंने कहा, “हालांकि उन्होंने खलनायकी का काम किया है, लेकिन वे सोच रहे थे कि वे अपना कर्तव्य निभा रहे हैं. उन्हें खलनायक के रूप में दिखाया गया है, लेकिन किसी नाटकीय तरीके से नहीं.” “वेकिंग ऑफ ए नेशन” के निर्माता राम माधवानी और उनकी पत्नी हैं और इसका प्रसारण सात मार्च मार्च को ‘सोनी लिव’ पर होगा. इसकी कहानी चार मित्रों : एक वकील कांतिलाल साहनी (तारुक रैना), एक पत्रकार अली अल्लाबख्श (साहिल मेहता), एक आम आदमी हरि सिंह (भवशील सिंह) और उसकी पत्नी पूनम (निकिता दत्ता) के नजरिये से बताने का प्रयास किया गया है. सीरीज में ब्रिटिश कलाकारों पॉल मैक्ईवान और एलेक्स रीस ने भी काम किया है.



