जन धन योजना ने वित्तीय समावेशन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई : मोदी

नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘प्रधानमंत्री जन धन योजना’ के 10 वर्ष पूरे होने पर बुधवार को कहा कि यह योजना सम्मान, सशक्तीकरण और राष्ट्र के आर्थिक जीवन में भागीदारी के अवसर का प्रतीक है. मोदी ने जन धन योजना को सफल बनाने के लिए काम करने वालों की भी सराहना की और कहा कि यह योजना वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण रही है.

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपने आधिकारिक खाते पर लिखा, ”आज एक ऐतिहासिक दिन है… जन धन योजना के 10 वर्ष पूरे हो गए हैं. सभी लाभार्थियों को शुभकामनाएं और इस योजना को सफल बनाने के लिए दिन-रात एक करने वाले सभी लोगों को भी बहुत-बहुत बधाई.” उन्होंने कहा कि जन धन योजना वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने और करोड़ों लोगों खासकर महिलाओं, युवाओं तथा वंचित समुदायों को सम्मान देने में सबसे आगे रही है.

प्रधानमंत्री ने पेशेवर मंच ‘लिंक्डइन’ पर बाद में लिखा, ”आज प्रधानमंत्री जन धन योजना को शुरू हुए एक दशक हो गया है और यह पहल महज एक नीति नहीं है. यह एक ऐसे भारत के निर्माण का प्रयास है, जहां हर नागरिक, चाहे उसकी आर्थिक पृष्ठभूमि कुछ भी हो, उसकी औपचारिक बैंकिंग प्रणाली तक पहुंच हो.”

मोदी ने कहा, ” आप में से कई लोग, खासकर युवा सोच रहे होंगे..यह इतना महत्वपूर्ण क्यों है? आखिरकार, इस युग में बैंक खाता होना बेहद ही बुनियादी बात है और इसे सामान्य बात भी माना जाता है. हालांकि, जब हमने 2014 में सत्ता संभाली, तो स्थिति बहुत अलग थी. आजादी के करीब 65 साल हो चुके थे, लेकिन हमारे लगभग आधे परिवारों के लिए बैंकिंग प्रणाली तक पहुंच दूर का सपना थी.” उन्होंने कहा कि उनकी दुनिया ऐसी थी जहां बचत घर पर रखी जाती थी, जिसके खोने तथा चोरी होने का खतरा बना रहता था.

मोदी ने कहा, ” कर्ज तक पहुंच ‘साहूकारों’ की दया पर निर्भर थी. वित्तीय सुरक्षा के अभाव से कई सपने पूरे नहीं हो पाते थे.” उन्होंने कहा, ” जब जन-धन योजना शुरू की गई तो मुझे याद है कि इसे लेकर भी संशय की स्थिति थी. कुछ लोगों ने पूछा था – क्या इतनी बड़ी संख्या में लोगों को बैंकिंग प्रणाली में लाना वास्तव में संभव है? क्या इस प्रयास से कोई ठोस बदलाव आएगा? हां. चुनौतियां काफी व्यापक थीं लेकिन इसे हकीकत बनाने के लिए भारत के लोगों का दृढ़ संकल्प भी उतना ही बड़ा था.” मोदी ने कहा कि जन धन योजना की सफलता के दो पहलू हैं. एक पहलू यह है कि 53 करोड़ से अधिक लोगों ने कभी सोचा भी नहीं था कि वे बैंकिंग प्रणाली से जुड़ पाएंगे लेकिन अब उनके पास बैंक खाते हैं.

उन्होंने कहा कि इन खातों में 2.3 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा है. प्रधानमंत्री ने कहा कि 65 प्रतिशत से अधिक खाते ग्रामीण या अर्द्धशहरी क्षेत्रों में हैं, जिससे वित्तीय समावेशन की प्रक्रिया महानगरों तक सीमित नहीं रही. करीब 39 लाख करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष हस्तांतरण हुआ है.

उन्होंने कहा, ” लेकिन, दूसरा पहलू प्रभावशाली आंकड़ों से कहीं आगे है. जहां तक महिला सशक्तीकरण का सवाल है, जन धन योजना परिवर्तनकारी साबित हुई है. करीब 30 करोड़ महिलाओं को बैंकिंग प्रणाली में लाया गया है.” मोदी ने कहा कि इसी तरह, इस योजना के लाभ व बैंक खाते के जरिये मिलने वाले अन्य लाभों ने करोड़ों अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग परिवारों पर सकारात्मक प्रभाव डाला है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि जन धन, ‘जेएएम’ त्रिमूर्ति – जनधन, आधार और मोबाइल का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन गया है. वर्ष 2014 में आज के दिन शुरू की गयी प्रधानमंत्री जन धन योजना वित्तीय समावेशन पर एक राष्ट्रीय मिशन है. इस योजना का उद्देश्य प्रत्येक परिवार के लिए कम से कम एक बुनियादी बैंकिंग खाता, वित्तीय साक्षरता, ऋण, बीमा और पेंशन सुविधा तक पहुंच के साथ बैंकिंग सुविधाओं को लेकर पहुंच सुनिश्चित करना है. मोदी ने कहा कि जो लोग जन धन जैसी योजना की प्रासंगिकता पर संदेह करते थे, वे एक बार फिर हमारे जैसे देश में डिजिटल भुगतान की आवश्यकता का मजाक उड़ा रहे हैं.

उन्होंने कहा, ”लेकिन, एक बार फिर, उन्होंने हमारे लोगों के सामूहिक संकल्प को कम करके आंका. भारत की डिजिटल भुगतान की सफलता की कहानी आज पूरी दुनिया जानती है. दुनिया का 40 प्रतिशत से अधिक त्वरित डिजिटल भुगतान भारत में होता है.” विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ‘एक्स’ पर मोदी की इस पोस्ट को साझा कर योजना के 10 साल पूरे होने की सराहना की. जयशंकर ने कहा, ”दुनिया की सबसे बड़ी वित्तीय समावेशन पहल ‘प्रधानमंत्री जन धन योजना’ ने सफलता के 10 साल पूरे कर लिए हैं. इस योजना का वित्तीय समावेशन, महिला सशक्तीकरण, ऋण तक पहुंच, यूपीआई और डिजिटल सेवाओं पर बदलावकारी प्रभाव विकसित भारत की यात्रा में महत्वपूर्ण कदम हैं.”

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