
रांची. झारखंड विधानसभा से विपक्षी सदस्यों के बहिर्गमन के बीच, हेमंत सोरेन सरकार के सोमवार को विश्वास मत हासिल करने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन और झामुमो नीत गठबंधन के 10 अन्य नेताओं ने मंत्री के तौर पर शपथ ली. राज्य की 81 सदस्यीय विधानसभा में मनोनीत सदस्य ग्लेन जोसेफ गॉलस्टेन सहित कुल 45 विधायकों ने विश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) के विधायक मतों की गिनती शुरू होते ही सदन से बाहर चले गए. भाजपा के नेतृत्व वाले विपक्ष के पास 24 और आजसू पार्टी के तीन विधायक हैं.
विश्वास मत हासिल करने के बाद हेमंत सोरेन ने कहा, ”आज एक बार फिर सबको सत्तारूढ़ गठबंधन की एकता और ताकत देखने को मिली. मैं (विधानसभा) अध्यक्ष और गठबंधन के सभी विधायकों का आभार जताता हूं.” सोरेन ने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) नीत गठबंधन 2019 में सत्ता में आने के बाद से संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए शानदार प्रदर्शन कर रहा है और यह आज एक बार फिर देखने को मिला.
विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव पर अपने भाषण के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा, ह्लसदन में मुझे फिर से देखने के बाद कोई भी भाजपा विधायकों का व्यवहार देख सकता है.ह्व उन्होंने कहा, ह्लभाजपा के पास राज्य के लिए कोई एजेंडा नहीं है. हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनाव में देश की जनता ने उनको (भाजपा) आइना दिखा दिया. आगामी विधानसभा चुनाव में उन्हें झामुमो के नेतृत्व वाले गठबंधन से कड़ी टक्कर का सामना करना पड़ेगा.ह्व विश्वास प्रस्ताव पर बोलते हुए नेता प्रतिपक्ष अमर बाउरी ने आरोप लगाया कि झामुमो-कांग्रेस-राजद गठबंधन सरकार ने पिछले पांच साल में एक भी वादा पूरा नहीं किया है.
इससे पहले, भाजपा सदस्य, विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो से विधायक भानु प्रताप साही को बोलने की अनुमति देने की मांग को लेकर आसन के समीप आ गए. हालांकि, महतो ने उनकी मांग अस्वीकार कर दी. विश्वास प्रस्ताव पर मतदान के दौरान 75 विधायक सदन में मौजूद थे. निर्दलीय सदस्य सरयू राय मतदान से दूर रहे.
विश्वास मत के बाद, झारखंड के राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झामुमो नीत गठबंधन के अन्य वरिष्ठ नेताओं तथा सरकारी अधिकारियों की मौजूदगी में राजभवन में आयोजित एक समारोह में चंपई सोरेन सहित 11 नेताओं को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलायी. चार जुलाई को झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन के राज्य के 13वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने से एक दिन पहले तीन जुलाई को चंपई सोरेन ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था.
मंत्री के तौर पर शपथ लेने के बाद चंपई ने कहा, ”मुख्यमंत्री पद पर रहने के दौरान थोड़े समय में मैंने जो कुछ किया वह हर किसी के सामने है. अब देखना है कि मुझे क्या जिम्मेदारी दी जाती है.” राधाकृष्णन ने शपथ दिलाने के बाद कहा, ”सभी नये मंत्रियों और नये मुख्यमंत्री (हेमंत सोरेन) को मेरी शुभकामनाएं. हमने हमेशा संविधान का पालन किया है, जो सबसे गरीब लोगों की जरूरतों को पूरा करने की बात करता है. मैं नयी सरकार से केवल यही उम्मीद करता हूं.”
मुख्यमंत्री सहित बारह सदस्यीय मंत्रिमंडल में नये चेहरों में कांग्रेस के जामताड़ा विधायक इरफान अंसारी, महगामा विधायक दीपिका पांडे सिंह और झामुमो के लातेहार से विधायक वैद्यनाथ राम शामिल हैं. पूर्ववर्ती चंपई सोरेन मंत्रिमंडल में मंत्रियों की सूची से अंतिम क्षणों में लातेहार विधायक का नाम हटा दिया गया था, जिसे राम ने ”अपमान” करार दिया था.
जिन नेताओं ने अपना मंत्री पद बरकरार रखा है उनमें कांग्रेस के रामेश्वर उरांव और बन्ना गुप्ता, झामुमो के मिथिलेश कुमार ठाकुर, हफीजुल हसन, दीपक बिरूआ और बेबी देवी तथा राजद के सत्यानंद भोक्ता शामिल हैं. चंपई सोरेन सरकार में सड़क निर्माण और कृषि मंत्री रहे क्रमश: बसंत सोरेन और कांग्रेस के बादल पत्रलेख के नाम हेमंत मंत्रिमंडल से बाहर कर दिये गए. बसंत, झामुमो प्रमुख शिबू सोरेन के छोटे बेटे हैं.
हेमंत सोरेन को 28 जून को कथित भूमि घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले में झारखंड उच्च न्यायालय द्वारा जमानत दिए जाने के बाद जेल से रिहा किया गया था. प्रवर्तन निदेशालय द्वारा 31 जनवरी को गिरफ्तारी से कुछ समय पहले ही सोरेन ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. सत्तारूढ़ गठबंधन में झामुमो, कांग्रेस और राजद शामिल है जबकि इसे बाहर से भाकपा (मार्क्सवादी लेनिनवादी) लिबरेशन के एकमात्र विधायक समर्थन दे रहे हैं.
लोकसभा चुनाव के बाद 81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में झामुमो नीत गठबंधन के सदस्यों की संख्या घटकर 45 रह गई है, जिसमें झामुमो के 27, कांग्रेस के 17 और राजद का एक विधायक शामिल है. झामुमो के दो विधायक-नलिन सोरेन और जोबा माझी अब सांसद बन चुके हैं, जबकि जामा से विधायक सीता सोरेन ने भाजपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए इस्तीफा दे दिया था.
झामुमो ने दो और सदस्यों-बिशुनपुर से विधायक चमरा लिंडा और बोरियो से विधायक लोबिन हेम्ब्रोम को पार्टी से निष्कासित कर दिया था. इसी तरह, विधानसभा में भाजपा सदस्यों की संख्या घटकर 24 हो गई है, क्योंकि उसके दो विधायक-ढुलू महतो (बाघमारा) और मनीष जायसवाल (हजारीबाग) अब सांसद बन गए हैं. वहीं, पार्टी ने मांडू से विधायक जयप्रकाश भाई पटेल को कांग्रेस में शामिल होने के बाद निष्कासित कर दिया था.
झारखंड में 81 सदस्यीय विधानसभा में वर्तमान में 76 विधायक हैं. हेमंत सोरेन ने तीन जुलाई को सरकार बनाने का दावा पेश किया था, जिसके बाद सत्तारूढ़ झामुमो-कांग्रेस-राजद गठबंधन ने राज्यपाल को 44 विधायकों की समर्थन सूची सौंपी थी. झारखंड में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होना है.



