केजरीवाल ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया, आतिशी ने नई सरकार बनाने का दावा पेश किया

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 17 Sep 2024 09:18 PM
केजरीवाल ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया, आतिशी ने नई सरकार बनाने का दावा पेश किया

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नयी दिल्ली. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा मंगलवार को उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना को अपना इस्तीफा सौंपने के बाद नामित मुख्यमंत्री आतिशी ने नई सरकार बनाने का अपना दावा पेश किया. इस घटनाक्रम को दिल्ली में लगभग पांच महीने में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले बढ़त हासिल करने की एक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है. केजरीवाल ने रविवार को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने की घोषणा की थी. उन्होंने तब कहा था कि वह मुख्यमंत्री की कुर्सी पर तभी बैठेंगे, जब जनता उन्हें ”ईमानदारी का प्रमाणपत्र” देगी.

आबकारी नीति ‘घोटाले’ में भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे और पिछले सप्ताह जेल से रिहा हुए आप सुप्रीमो ने मंगलवार शाम को उपराज्यपाल सक्सेना को अपना इस्तीफा सौंप दिया. आतिशी (43) दिल्ली की तीसरी महिला मुख्यमंत्री होंगी. उनसे पहले भाजपा नेता सुषमा स्वराज और कांग्रेस की शीला दीक्षित इस पद पर रह चुकी हैं.

पार्टी विधायकों की सर्वसम्मति से दिल्ली की मुख्यमंत्री नामित किए जाने के बाद अपनी पहली टिप्पणी में आतिशी ने कहा कि यह मिलीजुली भावनाओं वाला क्षण है, क्योंकि एक तरफ खुशी है लेकिन दूसरी तरफ लोकप्रिय मुख्यमंत्री केजरीवाल के इस्तीफा देने का अत्यंत दुख भी है. केजरीवाल ने पार्टी विधायकों की एक बैठक में अपने उत्तराधिकारी के तौर पर आतिशी के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसे सभी विधायकों ने सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया.

आतिशी ने विधायक दल की बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, ”मैं अगले कुछ महीने तक एक ही लक्ष्य के साथ काम करूंगी कि केजरीवाल को फिर से मुख्यमंत्री पद पर बैठाया जाए. मैं अरविंद केजरीवाल के मार्गदर्शन में मुख्यमंत्री के रूप में काम करूंगी.” दिल्ली विधानसभा का कार्यकाल अगले साल 23 फरवरी को समाप्त होने वाला है और उसके मद्देनजर फरवरी की शुरुआत में चुनाव होने की उम्मीद है. हालांकि, केजरीवाल ने मांग की है कि महाराष्ट्र के साथ दिल्ली में भी नवंबर में चुनाव कराये जाएं.

केजरीवाल के बाद अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इसे लेकर अटकलें तेज थीं. हालांकि, मुख्यमंत्री पद की दौड़ में आतिशी का नाम सबसे आगे था और उन्हें केजरीवाल तथा पार्टी में दूसरे प्रमुख नेता मनीष सिसोदिया का बेहद करीबी माना जाता है. इस बहस पर विराम लगाते हुए केजरीवाल ने आप विधायक दल की बैठक में कालकाजी से विधायक आतिशी का नाम प्रस्तावित किया, जिसे सभी विधायकों ने सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया.

एक अधिकारी ने बताया कि उपराज्यपाल अब केजरीवाल का इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को स्वीकृति के लिए भेजेंगे. उन्होंने बताया कि वह नई सरकार बनाने के लिए आतिशी के पत्र को भी राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजेंगे. अधिकारी ने बताया कि इस्तीफा स्वीकार होने के बाद उपराज्यपाल आतिशी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करेंगे और शपथ ग्रहण समारोह की तारीख बताएंगे. उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया में कुछ दिन लग सकते हैं. नई मुख्यमंत्री दिल्ली विधानसभा में अपनी सरकार का बहुमत साबित करेंगी, जिसके लिए सत्तारूढ़ आप सरकार ने 26-27 सितंबर को सत्र बुलाया है. वित्त, शिक्षा और राजस्व सहित 14 विभागों की जिम्मेदारी संभाल रही आतिशी उन लोगों में से थीं, जिन्होंने केजरीवाल के जेल में रहने के दौरान कमान संभाली थी.

उपराज्यपाल से मुलाकात के बाद संवाददाताओं को संबोधित करते हुए आतिशी ने कहा, ”हमने नई सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है. मैं दिल्ली के लोगों के हितों की रक्षा करूंगी.” मुख्यमंत्री नामित की गईं आतिशी ने दावा किया कि केजरीवाल पर झूठे आरोप लगाए गए हैं और केंद्र सरकार की जांच एजेंसियां उन्हें निशाना बना रही हैं.

उन्होंने कहा, ”उच्चतम न्यायालय ने न केवल उन्हें (केजरीवाल) जमानत दे दी, बल्कि केंद्र और उसकी जांच एजेंसियों के खिलाफ कठोर टिप्पणी भी की और उन्हें ‘पिंजरे में बंद तोता’ बताया.” आतिशी ने कहा, ”कोई और नेता होता, तो वह मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बना रहता, लेकिन केजरीवाल ने जनता की अदालत में जाने का फैसला किया और इस्तीफा दे दिया.” उन्होंने कहा कि जनता ने जल्द ही होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव में अरविंद केजरीवाल को फिर से मुख्यमंत्री चुनने का संकल्प लिया है.

आतिशी ने अरविंद केजरीवाल को अपना ‘गुरु’ बताते हुए अपना उत्तराधिकारी चुनने के लिए उनका आभार जताया. आतिशी ने कहा, ”केजरीवाल ने मुझ पर भरोसा किया, मुझे विधायक बनाया, फिर मंत्री बनाया और अब मुख्यमंत्री बनाया. मैं उनकी आभारी हूं. आप पार्टी में ही किसी नए नेता को इस तरह का अवसर मिल सकता है. अगर मैं किसी और पार्टी में होती, तो मुझे चुनाव लड़ने के लिए टिकट भी नहीं मिलता.” उन्होंने कहा, ”मैं खुश हूं और मैं दुखी भी हूं कि मेरे बड़े भाई आज इस्तीफा दे रहे हैं.”

केजरीवाल ने सोची-समझी रणनीति के तहत पूरे दिन चुप्पी साधे रखी, वहीं आतिशी ने पार्टी विधायकों से उन्हें बधाई नहीं देने का अनुरोध किया. केजरीवाल के पद से इस्तीफा देने के बीच भाजपा ने कहा कि मुख्यमंत्री का चेहरा बदलने से आम आदमी पार्टी (आप) का ”चरित्र” नहीं बदलेगा. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कहा कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी दिल्ली में अपने शासन के दौरान 10 साल के ”भ्रष्टाचार” के लिए अभी भी जवाबदेह है.

भाजपा की दिल्ली इकाई के प्रमुख वीरेंद्र सचदेवा ने दावा किया, ”चेहरा बदलने से आप का चरित्र नहीं बदलेगा…केजरीवाल के 10 साल के भ्रष्टाचार को देखते हुए, जो भी मुख्यमंत्री होगा, उसे लोगों को बताना होगा कि उन्होंने दिल्ली के लोगों को कैसे लूटा.” सचदेवा ने आरोप लगाया, ”उन्होंने हर विभाग में भ्रष्टाचार किया है और अब जनता उन्हें उस भ्रष्टाचार का जवाब देगी.” केजरीवाल पर निशाना साधते हुए भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा, ”पहले हमारे पास जेल से काम करने वाले एक मुख्यमंत्री थे, जो बाद में ‘जमानत पर बाहर आए मुख्यमंत्री’ बन गये. अब कहा जा रहा है कि एक ‘कठपुतली’ मुख्यमंत्री को सत्ता में लाया जा रहा है.” शिक्षा क्षेत्र में आप सरकार की कई उपलब्धियों का श्रेय आतिशी को दिया जाता है. उन्हें पिछले साल मार्च में दिल्ली मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था तथा 21 मार्च को आबकारी नीति मामले में आप संयोजक केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद से वह सरकार और पार्टी दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही थीं.

दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर विजय सिंह और तृप्ता वाही की बेटी आतिशी ने ्प्रिरंगडेल्स स्कूल से स्कूली शिक्षा प्राप्त की और सेंट स्टीफंस कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त की. उन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की है.
शीला दीक्षित दिल्ली की सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रही थीं जिन्होंने 1998 से 2013 तक 15 साल तक पद संभाला. सुषमा स्वराज ने 12 अक्टूबर 1998 से 52 दिनों तक दिल्ली की सत्ता संभाली थी.

आतिशी दिल्ली की सबसे कम उम्र की मुख्यमंत्री होंगी

दिल्ली को कांग्रेस की शीला दीक्षित और भाजपा की सुषमा स्वराज के बाद आम आदमी पार्टी (आप) की आतिशी के रूप में तीसरी महिला मुख्यमंत्री मिलने वाली हैं. आतिशी इस पद पर अरविंद केजरीवाल की जगह लेंगी. केजरीवाल ने पार्टी विधायकों की एक बैठक में अपने उत्तराधिकारी के तौर पर आतिशी के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसे सभी विधायकों ने सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया.

दीक्षित, दिल्ली की सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रही थीं, जिन्होंने 1998 से 2013 तक 15 वर्षों तक यह पद संभाला था. वहीं, स्वराज का कार्यकाल 1998 में 52 दिनों का रहा था. आतिशी (43) दिल्ली की सबसे कम उम्र की मुख्यमंत्री होंगी और पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी के बाद देश की दूसरी मौजूदा महिला मुख्यमंत्री होंगी. दीक्षित 60 साल की आयु में दिल्ली की मुख्यमंत्री बनी थीं, जबकि स्वराज ने 46 साल की उम्र में यह पद संभाला था.

आतिशी वर्तमान में दिल्ली मंत्रिमंडल में सबसे अधिक विभागों की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. वह वित्त, जल, शिक्षा, लोक निर्माण, बिजली, राजस्व, योजना, सेवा, कानून, सतर्कता और अन्य प्रमुख विभागों की मंत्री हैं. आतिशी ने आम आदमी पार्टी की स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, खासकर केजरीवाल और आप के अन्य वरिष्ठ नेताओं के जेल में बंद रहने के दौरान, जब उन्होंने (आतिशी ने) अन्य नेताओं के साथ मिलकर पार्टी का संचालन किया.

केजरीवाल ने मंगलवार शाम उप राज्यपाल वी के सक्सेना से मुलाकात की और मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा सौंपा, जिससे आतिशी की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया. पार्टी के नेता गोपाल राय ने कहा कि मुख्यमंत्री नामित की गईं आतिशी ने उप राज्यपाल सक्सेना के साथ बैठक में दिल्ली में नयी सरकार बनाने के लिए दावा पेश किया है.

दीक्षित, दिल्ली के राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं, क्योंकि वह इसकी सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहीं और देश में सबसे लंबे समय तक महिला मुख्यमंत्री रही हैं. दीक्षित ने दिल्ली में कांग्रेस को लगातार तीन चुनावी जीत दिलाई थी. भाजपा नेता स्वराज 1998 में संक्षिप्त अवधि के लिए दिल्ली की पांचवीं मुख्यमंत्री बनी थीं. देश के इतिहास में प्रमुख महिला मुख्यमंत्रियों में महबूबा मुफ्ती भी शामिल हैं, जो पूर्ववर्ती राज्य जम्मू कश्मीर की नौवीं मुख्यमंत्री रही थीं. वहीं, मायावती, उत्तर प्रदेश की 18वीं मुख्यमंत्री, राबड़ी देवी बिहार की 21वीं मुख्यमंत्री और जयललिता, तमिलनाडु की पांचवीं मुख्यमंत्री रही थीं.

आतिशी : सरकार की सलाहकार से लेकर मनोनीत मुख्यमंत्री तक का ‘अद्भुत’ सफर

दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार की सलाहकार से लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की अनुपस्थिति में कैबिनेट का प्रमुख चेहरा बनने और सरकार में मनोनीत मुख्यमंत्री तक का सफर आतिशी ने ”बहुत तेजी” से तय किया है जिसे ‘अभूतपूर्व और असाधारण’ माना जा रहा है.

दिल्ली सरकार में सबसे अधिक मंत्रालयों का कार्यभार संभालने वाली 43 वर्षीय आतिशी, सुषमा स्वराज और शीला दीक्षित के बाद राष्ट्रीय राजधानी की मुख्यमंत्री बनने वाली तीसरी महिला होने का गौरव भी हासिल करेंगी. मंगलवार को विधायक दल की बैठक में उन्हें सर्वसम्मति से मुख्यमंत्री पद के लिए चुना गया. इसके बाद आतिशी ने अरविंद केजरीवाल को अपना ‘गुरु’ बताते हुए अपना उत्तराधिकारी चुनने के लिए उनका आभार जताया और कहा कि वह भाजपा के अवरोधों से लोगों के हितों की रक्षा करने के लिए उनके मार्गदर्शन में काम करेंगी.

इस समय दिल्ली सरकार में अनेक विभागों का प्रभार संभाल रहीं आतिशी ने कहा कि आप जैसी पार्टी ही उनके जैसे नए नेता को ऐसी जिम्मेदारी सौंप सकती है. आतिशी दिल्ली विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले ही मुख्यमंत्री बनने जा रही हैं, इसलिए उनके सामने कई चुनौतियां भी हैं. उन्हें ‘मुख्यमंत्री महिला सम्मान योजना’ और ‘इले्ट्रिरक वाहन 2.0’ नीति जैसी प्रमुख योजनाओं को मंजूरी देने और उन्हें तेजी से आगे बढ़ाने के लिए कैबिनेट बैठकें करनी होंगी.

आतिशी आप की संस्थापक सदस्य रही हैं और उन्होंने इसकी नीतियों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसमें 2013 के घोषणापत्र मसौदा समिति के प्रमुख सदस्य के रूप में शामिल होना भी शामिल है. आतिशी पार्टी के सिद्धांतों की मुखर वकालत के लिए पहचानी जाती हैं.

आतिशी ने मध्य प्रदेश के एक गांव में सात साल बिताए, जहां उन्होंने जैविक खेती और प्रगतिशील शिक्षा पर ध्यान केंद्रित किया. पार्टी के एक पदाधिकारी के अनुसार, इस अनुभव ने राजनीतिक बदलाव के प्रति उनके समर्पण को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. भले ही आतिशी 2013 में आप में शामिल हो गईं, लेकिन वे शिक्षा संबंधी नीतियों पर सरकार के सलाहकार के रूप में काम करते हुए पृष्ठभूमि में रहीं. वर्ष 2019 में चुनावी राजनीति में कदम रखते हुए उन्होंने भाजपा के गौतम गंभीर के खिलाफ पूर्वी दिल्ली से लोकसभा चुनाव लड़ा. हालांकि वह चुनाव हार गईं.

सक्रिय राजनीति में आने से पहले आतिशी ने अपना उपनाम ‘मर्लेना’ हटा दिया था, जो मार्क्स और लेनिन का मिश्रण है, क्योंकि वह चाहती थीं कि उनके राजनीतिक जुड़ाव को गलत तरह से नहीं समझा जाना चाहिए. वर्ष 2020 में, आतिशी ने दिल्ली विधानसभा चुनाव लड़ा और कालकाजी सीट से विधायक चुनी गईं. उन्हें ऐसे समय में कैबिनेट में शामिल किया गया था जब पिछले साल फरवरी में आबकारी नीति मामले में मनीष सिसोदिया की गिरफ्तारी के बाद सरकार संकट का सामना कर रही थी.

सिसोदिया तब न केवल दिल्ली के उपमुख्यमंत्री थे, बल्कि कई प्रमुख विभागों को संभाल रहे थे. समस्या तब और बढ़ गई जब सरकार के एक अन्य प्रमुख सहयोगी सत्येंद्र जैन ने भी उसी समय कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया. इस दौर में आतिशी पार्टी और सरकार में बड़ा चेहरा बनकर उभरीं और वर्तमान में वह वित्त, पीडब्ल्यूडी और शिक्षा जैसे प्रमुख विभागों सहित कई विभागों को संभाल रही हैं.
2022 में आतिशी ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने दिल्ली को शहरी शासन के लिए एक वैश्विक मॉडल के रूप में पेश किया.

उनके पिता विजय सिंह और मां तृप्ता वाही दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहे हैं. आतिशी ने दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफंस कॉलेज से इतिहास में स्नातक की डिग्री प्राप्त की और अपने बैच में शीर्ष स्थान हासिल किया. उन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से शिक्षा और इतिहास में स्नातकोत्तर उपाधि भी प्राप्त की है

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