नयी दिल्ली. आम आदमी पार्टी (आप) के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए अपनी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन की संभावना से रविवार को इनकार किया. इसके साथ ही, फरवरी में होने वाले चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला होने की पूरी संभावना बन गई है. इससे एक दिन पहले, कांग्रेस की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने कहा था कि पार्टी विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेगी.
केजरीवाल ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, ”दिल्ली में कोई गठबंधन नहीं होगा.” आप और कांग्रेस ‘इंडिया’ गठबंधन का हिस्सा हैं. दोनों दलों ने इस साल की शुरुआत में दिल्ली में लोकसभा चुनाव मिलकर लड़ा था, लेकिन किसी भी सीट पर गठबंधन को जीत नहीं मिली थी और सभी सात सीट पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी. सप्ताह भर से अधिक समय पहले, आप ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए 11 उम्मीदवारों की अपनी पहली सूची जारी की थी जिनमें हाल ही में भाजपा और कांग्रेस से आए छह नेता भी शामिल थे.
केजरीवाल की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए यादव ने कहा कि कांग्रेस इस बारे में बहुत स्पष्ट है कि वह आप के साथ कोई गठबंधन नहीं करेगी और दिल्ली की सभी 70 विधानसभा सीट पर अपने दम पर चुनाव लड़ेगी. उन्होंने दावा किया कि आप के साथ गठबंधन ने लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को ”बहुत नुकसान” पहुंचाया.
यादव ने कहा, ”कांग्रेस में निर्णय लेने की लोकतांत्रिक प्रक्रिया है और वे सावधानीपूर्वक विचार-विमर्श के बाद निर्णय लेते हैं, न कि केजरीवाल की तरह तानाशाही वाले तरीके से.” अक्टूबर में हुए हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले आप और कांग्रेस के बीच कई दौर की बातचीत के बावजूद सीट बंटवारे को लेकर सहमति नहीं बन पाई थी. आप और कांग्रेस के नेताओं ने स्वीकार किया कि दोनों दलों के बीच गठजोड़ लोकसभा चुनाव में सभी सीट पर भाजपा उम्मीदवारों की जीत के अंतर को कम करने में सफल रहा.
एक नेता ने कहा, ”इस दृष्टिकोण से, विधानसभा चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबले में आप और कांग्रेस के बीच मतों के विभाजन को रोकने के लिए गठबंधन फायदेमंद साबित होता.” भाजपा 1998 से दिल्ली की सत्ता से बाहर है. वर्ष 2015 और 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में आप ने क्रमश: 67 और 62 सीट जीती थी, जबकि भाजपा ने क्रमश? तीन और आठ सीट जीती थी. कांग्रेस अपना खाता भी नहीं खोल पाई थी.