लद्दाख हिंसा भाजपा की वादाखिलाफी का नतीजा : अखिलेश

भाजपा सरकार ने खुद ही संकट पैदा किया है: कांग्रेस ने लद्दाख हिंसा पर कहा

लखनऊ/नयी दिल्ली/श्रीनगर. समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शन को केंद्र में सत्तारू­ढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की वादाखिलाफी का नतीजा बताया है. यादव ने बृहस्पतिवार को कहा कि चीन सीमा से सटे इस संवेदनशील प्रदेश की सरहदों को और सुरक्षित करने के लिये सरकार को वहां की जनता की बात माननी चाहिये.

सपा प्रमुख ने यहां प्रेसवार्ता में लद्दाख में प्रदर्शनकारियों द्वारा भाजपा का कार्यालय फूंक दिये जाने के बारे में पूछे जाने पर कहा,”हम लोग हिंसा के पक्षधर नहीं हैं. भाजपा के लोगों को भी हिंसा को ब­ढ़ावा नहीं देना चाहिये.” उन्होंने कहा, ”लेह-लद्दाख के नेता, वहां के काउंसिल के लोग और जनप्रतिनिधियों को भाजपा के लोगों ने आश्वासन दिया था कि उन्हें राज्य का दर्जा और शक्तियां वापस दी जाएगीं. याद रखिए मुनाफा कमाना ही भ्रष्टाचार नहीं है, बल्कि नेताजी (सपा संस्थापक मुलायम सिंह) और समाजवादी लोग कहते थे कि वादाखिलाफी भी भ्रष्टाचार है. भाजपा ने वही किया, उसी का परिणाम है कि उन्हीं का कार्यालय जला दिया गया.” यादव ने कहा, ”तमाम वीडियो और भाषण हैं जहां पर भाजपा ने लेह लद्दाख के लोगों को आश्वासन दिया था.”

उन्होंने कहा, ”चूंकि वह एक संवेदनशील सीमावर्ती प्रदेश है. वहां के लोगों की जो भी मांगें हैं, उन्हें सरकार को मान लेनी चाहिए. वहां कभी चीन को लोग घुस गए थे. हमारी फौज के लोगों को किस तरह से अपमानित होना पड़ा था, इसलिए सीमावर्ती प्रदेश की सीमाओं को और सुरक्षित करने के लिए सरकार को वहां के लोगों की बात माननी चाहिए और ज्यादा बजट देकर वहां पर खुशहाली लानी चाहिए.”

भाजपा सरकार ने खुद ही संकट पैदा किया है: कांग्रेस ने लद्दाख हिंसा पर कहा

कांग्रेस ने लद्दाख में हिंसक झड़पों के एक दिन बाद बृहस्पतिवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार ने खुद यह संकट पैदा किया है. पार्टी ने कहा कि लद्दाख को छठी अनुसूची के तहत शामिल करने तथा उसकी गरिमा एवं पहचान की रक्षा करने की केंद्र शासित प्रदेश की मांग वैध और न्यायसंगत है.

अधिकारियों ने बताया कि लद्दाख को अलग राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर बुधवार को लेह में हिंसा, आगजनी और सड़क पर झड़पें हुईं, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई और 40 पुलिसर्किमयों समेत कम से कम 80 लोग घायल हो गये. कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा कि लद्दाख में हिंसा की घटनाओं में लोगों की मौत होना दुखद है.
खेड़ा ने ‘एक्स’ पर कहा, ”यह सरकार के विफल वादों की दुखद याद दिलाता है. वर्ष 2019 में, संसद के पटल से राष्ट्र को आश्वासन दिया गया था कि तत्कालीन जम्मू-कश्मीर राज्य के लोगों को जिस विकट स्थिति का सामना करना पड़ रहा है वह अब समाप्त हो जायेगी और शांति का माहौल कायम होगा. छह साल बाद, समस्या और गहरा गई है.” उन्होंने कहा, ”घाटी में सामान्य स्थिति बहाल करने की बजाय, केंद्र की अदूरर्दिशता ने जम्मू और लद्दाख को भी हिंसा की आग में झोंक दिया है. यह संकट भाजपा सरकार ने स्वयं पैदा है – जिसे अब वह अनुचित रूप से अनदेखा करना चाहती है.” खेड़ा ने कहा कि लद्दाख को छठी अनुसूची के तहत शामिल करने तथा उसकी गरिमा एवं पहचान की रक्षा करने की केंद्र शासित प्रदेश की मांग वैध और न्यायसंगत है.

केंद्र की ‘गलत नीतियों’ के कारण लद्दाख में हिंसा भड़की: महबूबा मुफ्ती

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में हिंसक विरोध प्रदर्शन केंद्र सरकार की ”गलत नीतियों” के कारण भड़के. मुफ्ती ने संवाददाताओं से कहा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने लद्दाख के लोगों से कई वादे किए थे, लेकिन पिछले छह वर्षों में उनमें से कुछ भी पूरा नहीं हुआ. उन्होंने कहा कि बुधवार को जो घटनाएं हुईं वह दिखाती हैं कि सहनशीलता पार हो गई है.

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि लद्दाख के लोग अपनी पहचान, संस्कृति, भूमि और नौकरियों की रक्षा के लिए छठी अनुसूची के तहत शामिल होने का प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने कहा, “वे इस बात से निराश हैं कि कुछ नहीं हो रहा…अगर बाहर से लोग बड़ी संख्या में वहां आ गए तो उनमें से क्या बचेगा? उनकी संख्या तो बस कुछ लाख है.” मुफ्ती ने कहा कि केंद्र को लद्दाख के घटनाक्रम पर विचार करना चाहिए, जहां बुधवार को हिंसा भड़क उठी. उन्होंने कहा, “केंद्र को इस पर विचार करना चाहिए. लद्दाख जैसा खुशहाल और समृद्ध क्षेत्र आज जल रहा है. कश्मीर और जम्मू में जब हिंसा फैली हुई थी, तब भी लद्दाख शांतिपूर्ण रहा. कारगिल युद्ध में लद्दाख के लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.”

जीएसटी में कमी लाना एक ‘धोखा’ है : अखिलेश
समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने माल एवं सेवा कर (जीएसटी) में संशोधन की आलोचना करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि जीएसटी में कमी करना एक ‘धोखा’ है. उन्होंने सवाल किया कि क्या केंद्र सरकार पहले अधिक जीएसटी लगाकर जनता की जेब ढीली किये जाने की भरपाई करेगी. यादव ने यहां प्रेसवार्ता में कहा कि उत्तर प्रदेश में 2027 में सपा की सरकार बनने पर समाजवाद के प्रणेता राम मनोहर लोहिया की ‘दाम बांधो’ नीति को लागू किया जाएगा.

उन्होंने जीएसटी सुधारों की चर्चा के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा बुधवार को हजरतगंज बाजार का दौरा किए जाने पर तंज करते हुए कहा, ”सरकार काम के अलावा ‘गंजिंग’ कर रही है. सच्चाई यह है कि जिन्होंने जीएसटी लगाकर लूटा, आज वही लोग जनता को धोखा देने निकले हैं.” दरअसल, लखनऊ में हजरतगंज इलाके में सैर-सपाटा और खरीदारी करने को गंजिंग कहा जाता है.

यादव ने कहा,”नौ साल में भाजपा को पता लग पाया कि दूध और दही महंगा हो गया है. खाने-पीने का सामान महंगा हो गया है, किताबें और कपड़े महंगे हो गए हैं. अभी तक इन्होंने (जीएसटी लगाकर) कितना (धन) इकट्ठा किया होगा, क्या उसकी भरपाई होगी?” यादव ने कहा, ” एक तरफ यह सरकार जीएसटी कम कर रही है जबकि दूसरी तरफ (कुछ सामानों पर) जीएसटी ब­ढ़ा भी रही है. सच्चाई तो यह है कि वह मुनाफा कमाने दे रही है. जब तक मुनाफा कमाना बंद नहीं होगा तब तक महंगाई कम नहीं हो सकती है. जीएसटी को कम करना धोखा देना है.” पूर्व मुख्यमंत्री ने सवाल किया कि क्रीम, शैम्पू और बॉडी लोशन पर चंद रुपये कम हो जाने से किसानों को क्या फायदा होगा, नौजवानों को कौन सी नौकरी मिल जाएगी.

उन्होंने कहा, ”सरकार के पास कोई विमर्श नहीं बचा है. उसके पास कोई कार्यक्रम नहीं है, इसलिए यह (मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ) धोखा देने के लिए ‘गंजिंग’ करने निकले थे. लेकिन लोग ‘गंजिंग’ करने वालों को सबक सिखायेंगे.” यादव ने कहा, ”समाजवादी पार्टी इस महंगाई को कम करने के लिए संकल्प लेती है. हम उत्तर प्रदेश की जनता को भरोसा दिलाते हैं कि 2027 में सपा की सरकार बनने पर दाम बांधो नीति को लागू करके जरूरी चीजों को सस्ता करने का काम करेंगे. उनकी कीमत कुछ भी हो लेकिन हम दाम बांधो नीति की दिशा में काम करेंगे.”

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