आडवाणी को भारत रत्न सम्मान, प्रधानमंत्री मोदी बोले-मेरे लिये अत्यंत भावुक क्षण

नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को घोषणा की कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित किया जाएगा और उन्होंने इसे अपने लिए ”एक अत्यंत भावुक क्षण” बताया.

इस घोषणा के बाद आडवाणी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताया और कहा कि यह एक व्यक्ति के रूप में न केवल उनका, बल्कि उन आदर्शों और सिद्धांतों का भी सम्मान है जिनका पालन करने का उन्होंने प्रयास किया. भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा,”आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) में शामिल होने के बाद से जीवन में मुझे जो भी जिम्मेदारी मिली, उसे निभाते हुए अपने प्रिय देश की सर्मिपत और निस्वार्थ सेवा करने में ही मुझे खुशी मिली.”

इससे पहले मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”हमारे समय के सबसे सम्मानित राजनेताओं में शामिल आडवाणी का भारत के विकास में महान योगदान है. उन्होंने जीवन की शुरुआत जमीनी स्तर पर काम करने से की और हमारे उपप्रधानमंत्री के रूप में देश की सेवा की.” उन्होंने कहा कि आडवाणी ने अपने सार्वजनिक जीवन में दशकों तक सेवा करते हुए पारर्दिशता और अखंडता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता जताई और राजनीतिक नैतिकता में एक अनुकरणीय मानक स्थापित किया.

प्रधानमंत्री ने कहा कि आडवाणी ने राष्ट्र की एकता और सांस्कृतिक पुनरुत्थान को आगे बढ़ाने की दिशा में अद्वितीय प्रयास किए हैं.
मोदी ने कहा, ”उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया जाना मेरे लिए बहुत भावुक क्षण है. मैं इसे हमेशा अपना सौभाग्य मानूंगा कि मुझे उनके साथ बातचीत करने और उनसे सीखने के अनगिनत अवसर मिले.”

मोदी ने सबसे लंबे समय तक भाजपा के अध्यक्ष रहे आडवाणी से बात कर उन्हें बधाई दी. आडवाणी (96) को उस समय 90 के दशक में भाजपा के उदय का श्रेय दिया जाता है जब वह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकारों की प्रमुख पार्टी के रूप में पहली बार सत्ता में आई थी.

मोदी ने कहा कि आडवाणी के संसदीय हस्तक्षेप हमेशा अनुकरणीय और समृद्ध अंतर्दृष्टि वाले रहे हैं. प्रधानमंत्री की घोषणा के तुरंत बाद राष्ट्रपति भवन ने एक संदेश जारी कर कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को आडवाणी को भारत रत्न प्रदान कर प्रसन्नता हुई. इस घोषणा के पश्चात आडवाणी ने अपने आवास से मीडियार्किमयों का अभिवादन किया और उनकी बेटी प्रतिभा आडवाणी ने पत्रकारों से कहा कि उनके पिता देश का सर्वोच्च राजकीय सम्मान दिए जाने की घोषणा से बहुत खुश हैं.

उन्होंने कहा, ”उन्होंने (आडवाणी ने) प्रधानमंत्री मोदी और देश की जनता को धन्यवाद दिया.” उन्होंने कहा कि उनके पिता ने अपना पूरा जीवन देश को सर्मिपत कर दिया. सरकार ने पिछले महीने समाजवादी दिग्गज और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत कर्पूरी ठाकुर को सर्वोच्च सम्मान के लिए नामित किया था.

कई राजनीतिक विशेषज्ञ ठाकुर के 1988 में निधन के कई वर्षों बाद उन्हें यह सम्मान दिए जाने को आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों (ईबीसी) के बीच अपनी जड़ें मजबूत करने की भाजपा की कोशिश के रूप में देख रहे हैं, वहीं आडवाणी को यह पुरस्कार दिया जाना पार्टी की मूल विचारधारा को आकार देने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के प्रति सम्मान के तौर पर देखा जा रहा है. आडवाणी को उसी वर्ष भारत रत्न दिया जाएगा, जब राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की गई है. आडवाणी ने राम मंदिर के मुद्दे को उठाने के लिए 1990 में ‘राम रथ यात्रा’ की थी. कई नेताओं ने आडवाणी को यह सम्मान दिए जाने पर खुशी जताई और देश के लिए उनके योगदान की सराहना की.

गृह मंत्री अमित शाह ने आडवाणी को भारत रत्न दिए जाने पर प्रसन्नता जताई. उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ”हमारे वरिष्ठ नेता और देश के पूर्व उपप्रधानमंत्री आदरणीय लालकृष्ण आडवाणी जी को ‘भारत रत्न’ दिए जाने की घोषणा से अत्यंत प्रसन्नता हुई.” उन्होंने कहा कि आडवाणी आजीवन नि?स्वार्थ भाव से देश और देशवासियों की सेवा के प्रति सर्मिपत रहे हैं और उन्होंने देश के उपप्रधानमंत्री जैसे विभिन्न संवैधानिक दायित्व निभाते हुए अपने दृढ़ नेतृत्व से देश की सुरक्षा, एकता और अखंडता के लिए अभूतपूर्व कार्य किए.

शाह ने कहा, ”आडवाणी जी को भारतीय राजनीति में प्रामाणिकता के मानक तय करने वाले राजनेता के रूप में जाना जाता है. अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में उन्होंने देश, संस्कृति और जनता से जुड़े मुद्दों के लिए अथक संघर्ष किया. पार्टी और विचारधारा के प्रति उनके विराट योगदान को शब्दों में समाहित नहीं किया जा सकता.” रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सरकार के इस फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि आडवाणी राजनीति में शुचिता, समर्पण और दृढ़ संकल्प के प्रतीक हैं.

उन्होंने भी ‘एक्स’ पर लिखा, ”आडवाणी जी ने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में अनेक भूमिकाएं निभाते हुए देश के विकास और राष्ट्रनिर्माण में जो महत्वपूर्ण योगदान दिया है, वह अविस्मरणीय और प्रेरणास्पद है.” राजनाथ सिंह ने कहा, ”भारत की एकता और अखंडता को अक्षुण्ण रखने में भी उनकी महती भूमिका रही है. एक राष्ट्रीय नेता के रूप में उन्होंने अपनी विद्वता, संसदीय एवं प्रशासनिक क्षमता से देश और लोकतंत्र को मजबूत किया है. उन्हें भारत रत्न सम्मान मिलना हर भारतवासी के लिए हर्ष का विषय है.” मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि आडवाणी के मार्गदर्शन से राम मंदिर मुद्दे का शांतिपूर्ण समाधान हुआ.

यादव ने ‘एक्स’ पर लिखा, ”हम सभी के लिए यह अत्यंत आनंद और प्रसन्नता का विषय है कि भारत सरकार ने हमारे मार्गदर्शक लालकृष्ण आडवाणी जी को भारत रत्न से सम्मानित करने का निर्णय लिया है जिसके लिए मैं नरेन्द्र मोदी का आभार व्यक्त करता हूं.” उन्होंने कहा, ”भगवान श्रीराम के मंदिर निर्माण हेतु आडवाणी जी ने ही हम सबकी जनभावनाओं का नेतृत्व किया था. आडवाणी जी का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणादायी है. मैं उनकी दीघार्यु की कामना करता हूं.”

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने भी आडवाणी को देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित करने के फैसले की सराहना की. उन्होंने एक बयान जारी कर कहा कि आडवाणी एक ”लौह पुरुष” हैं जिन्होंने गृह मंत्री के रूप में देश की सेवा की और राम जन्मभूमि आंदोलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के अध्यक्ष शरद पवार ने भी आडवाणी को भारत रत्न दिए जाने के केंद्र के फैसले की सराहना की और कहा कि भाजपा नेता ने राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. पवार ने यहां संवाददाताओं से कहा कि वह और आडवाणी अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं के समर्थक हैं, लेकिन भाजपा नेता एक अच्छे सांसद और केंद्रीय मंत्री थे. पवार ने ‘एक्स’ के जरिए कहा कि उन्हें खुशी है कि आडवाणी को भारत रत्न से सम्मानित किया जाएगा. राकांपा संस्थापक ने कहा कि आडवाणी ने देश के विकास में बहुत बड़ा योगदान दिया है.

प्रधानमंत्री और अन्य नेताओं ने ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किये जाने वाले भाजपा नेता आडवाणी को दी बधाई
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दिग्गज नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को शनिवार को देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किये जाने की घोषणा के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय मंत्रियों, अन्य वरिष्ठ नेताओं समेत विभिन्न क्षेत्र के लोगों ने आडवाणी को बधाई दी है.

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा घोषणा किए जाने के बाद केंद्रीय मंत्रियों, भाजपा और उसके सहयोगी दलों के शीर्ष नेताओं ने कहा कि आडवाणी हर लिहाज से यह पुरस्कार पाने योग्य हैं और यह राष्ट्र की सेवा के प्रति सर्मिपत एक ”राष्ट्रीय नायक की जीवनयात्रा” को मार्मिक स्वीकृति है. नेताओं ने सरकार के फैसले के लिए प्रधानमंत्री को धन्यवाद भी दिया. प्रधानमंत्री ने कहा कि आडवाणी को भारत रत्न से सम्मानित किया जाना ”मेरे लिए एक बहुत ही भावुक क्षण” है.

प्रधानमंत्री ने आडवाणी को बधाई देते हुए कहा, ”आडवाणी जी ने अपने सार्वजनिक जीवन में दशकों तक सेवा करते हुए पारर्दिशता और अखंडता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता जताई और राजनीतिक नैतिकता में एक अनुकरणीय मानक स्थापित किया. वह हमारे समय के सबसे सम्मानित राजनेताओं में से एक हैं, भारत के विकास में उनका योगदान अविस्मरणीय है.” पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने ‘एक्स’ पर कहा कि उन्हें यह जानकर बेहद खुशी हुई कि आडवाणी को सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार दिया जा रहा है.

आडवाणी को अपना ”राजनीतिक गुरु” करार देते हुए वेंकैया ने राष्ट्र के लिए पूर्व उपप्रधानमंत्री के उत्कृष्ट योगदान को याद किया और उन्हें शुभकामनाएं दीं. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘एक्स’ पर कहा, ”हम सभी के प्रेरणास्रोत और देश के वरिष्ठ नेता श्रद्धेय लाल कृष्ण आडवाणी जी को भारत रत्न से सम्मानित करने का निर्णय अत्यंत हर्ष और उल्लास की बात है. वह राजनीति में शुचिता, समर्पण और दृढ़ संकल्प के प्रतीक हैं.” उन्होंने कहा कि अपने लंबे सार्वजनिक जीवन के दौरान विभिन्न भूमिकाओं में आडवाणी ने देश के विकास और राष्ट्र निर्माण में जो महत्वपूर्ण योगदान दिया है वह ”अविस्मरणीय और प्रेरणादायक” है.

उन्होंने कहा, ”मैं इस फैसले के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी को धन्यवाद देता हूं और आडवाणी जी को बधाई देता हूं.” विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भाजपा के दिग्ग्ज नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी को भारत रत्न से सम्मानित करने का निर्णय भारत के राष्ट्रीय विकास में उनके महान योगदान को मान्यता है.

जयशंकर ने कहा, ”श्री लालकृष्ण आडवाणी जी को भारत रत्न से सम्मानित किया जाना हमारे राष्ट्रीय विकास में उनके महान योगदान को मान्यता प्रदान करता है. सरकार में उनका नेतृत्व और सार्वजनिक जीवन में उनकी भूमिका प्रेरणादायक रही है.” सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी दिग्गज नेता आडवाणी को शुभकामनाएं दीं.

उन्होंने ‘एक्स’ पर कहा, ”माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में प्रदान किया गया यह भारत रत्न बहुत उचित है. यह राष्ट्र की सेवा के लिए सर्मिपत एक ‘राष्ट्रीय नायक की जीवनयात्रा’ को मार्मिक स्वीकृति है.” मंत्री ने कहा, ”मैं राष्ट्र और लोगों की दशकों तक सेवा करने के लिए भारत रत्न से सम्मानित किये जा रहे श्री लालकृष्ण आडवाणी जी को अपनी हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं.” वरिष्ठ भाजपा नेता को भारत रत्न देने की घोषणा का स्वागत करते हुए केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि दशकों तक पारर्दिशता और मूल्यों से ओत-प्रोत रहा आडवाणी का सार्वजनिक जीवन सभी के लिए मार्गदर्शक है.

तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) प्रमुख चंद्रबाबू नायडू ने कहा, ”आडवाणी जी ने अनुकरणीय कड़ी मेहनत और राष्ट्र के प्रति समर्पण के माध्यम से खुद की पहचान बनाई. एक विद्वान और एक राजनेता के रूप में देश के विकास में असाधारण योगदान दिया है. मुझे उनके साथ काम करने का सौभाग्य मिला है.” भाजपा के गठबंधन सहयोगी एवं लोजपा (रामविलास) प्रमुख चिराग पासवान ने आडवाणी को हार्दिक बधाई दी और भाजपा के वरिष्ठ नेता को भारत रत्न से सम्मानित करने के सरकार के फैसले लिए प्रधानमंत्री मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया.

चिराग ने ‘एक्स’ पर लिखा, ”देश के यशस्वी प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारतीय राजनीति के शिखर पुरुष पूर्व उपप्रधानमंत्री माननीय श्री लालकृष्ण आडवाणी को ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करने की घोषणा की गई है. इसके लिए मैं आदरणीय आडवाणी जी को हृदय से हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूं.” उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आडवाणी को भारत रत्न से सम्मानित करने के केंद्र के फैसले की सराहना की.

उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ”यह हमारे लिए बहुत खुशी की बात है कि भाजपा के कद्दावर नेता और हमारे मार्गदर्शक श्री लालकृष्ण आडवाणी जी को भारत रत्न से सम्मानित किया जाएगा.” असम के मुख्यमंत्री ने आडवाणी को भारत रत्न दिए जाने की घोषणा पर प्रसन्नता जताई और भाजपा के दिग्गज नेता को शुभकामनाएं दीं. उन्होंने ‘एक्स’ पर कहा, ”आदरणीय लाल कृष्ण आडवाणी जी को भारत रत्न से सम्मानित करना राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है. वह लाखों भारतीयों के लिए प्रेरणा हैं.”

आडवाणी को भारत रत्न : देश की राजनीति और भाजपा में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के प्रति कृतज्ञता
लालकृष्ण आडवाणी भारतीय राजनीति की वह शख्सियत हैं, जिन्होंने अपने दौर की राजनीति को अपने प्रखर राष्ट्रवादी विचारों और अपनी ‘रथयात्राओं’ से प्रभावित किया तथा ‘धर्मनिरपेक्षता’ के विमर्श के मुकाबले हिंदुत्व की राजनीति के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी को राष्ट्रीय फलक पर मजबूती से स्थापित करने में मदद की.

आडवाणी को ‘भारत रत्न’ पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नौ वर्ष बाद यह सम्मान दिया गया है. दोनों नेताओं ने मिलकर पांच दशकों से अधिक समय तक जनसंघ और फिर भाजपा का नेतृत्व किया. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को आडवाणी (96) को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किये जाने की घोषणा की. इसी साल अयोध्या में राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह संपन्न हुआ है.

राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा भाजपा के लिए एक अत्यंत भावनात्मक मुद्दे के ”विजयी समापन” का प्रतीक है, जिसे 1990 में आडवाणी की ‘राम रथ यात्रा’ के माध्यम से जनता में लोकप्रियता मिली और हिंदुत्वादी पार्टी भाजपा के लगातार आगे बढ़ने का रास्ता खुला.
भाजपा के एक नेता ने कहा कि यह बहुत उपयुक्त है कि मंदिर आंदोलन के एक प्रमुख सूत्रधार को इस वर्ष मोदी सरकार द्वारा सम्मान दिया गया है.

भाजपा द्वारा राम मंदिर का मुद्दा उठाए जाने से पहले विश्व हिंदू परिषद सहित अन्य हिंदूवादी समूह मंदिर के लिए आंदोलन कर रहे थे. आडवाणी की रथ यात्रा को इसे एक जन आंदोलन बनाने का श्रेय दिया जाता है. मोदी स्वयं इस यात्रा के प्रमुख आयोजक थे. आडवाणी ने ”छद्म धर्मनिरपेक्षता” और ”तुष्टिकरण की राजनीति” जैसे वाक्यांश गढ़े हों या न गढ़े हों, लेकिन उन्होंने ही इन्हें हिंदुत्व की राजनीति के लोकप्रिय मुहावरे में बदल दिया.

आडवाणी के समकालीनों ने एक राजनीतिक रणनीतिकार और संगठन-निर्माता के रूप में उनकी प्रशंसा की. उनकी अध्यक्षता में भाजपा ने 1989 में अपने पालमपुर सम्मेलन के दौरान मंदिर निर्माण के समर्थन में एक प्रस्ताव अपनाकर रामजन्मभूमि आंदोलन को अपना पूरा समर्थन देने का फैसला किया, जिसे भक्त भगवान राम का जन्मस्थान मानते हैं. भाजपा के निश्चित रूप से दक्षिणपंथ की ओर मुड़ने की राजनीतिक क्षेत्र में चौतरफा निंदा हुई, लेकिन 1984 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के बेहद खराब प्रदर्शन ने इसके कार्यकर्ताओं को निराशा कर दिया, जब वह केवल दो सीटें जीत सकी.

वर्ष 1990 में आडवाणी की रथ यात्रा को जबरदस्त समर्थन मिला और विभिन्न स्थानों पर सांप्रदायिक दंगे होने के बावजूद रथ यात्रा की लोकप्रियता ने भाजपा को पहली बार उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में अपने दम पर सत्ता में ला दिया और पार्टी को अन्य राज्यों की एक प्रमुख ताकत के रूप में स्थापित किया.

वर्ष 1992 में एक भीड़ द्वारा अयोध्या में बाबरी मस्जिद के विध्वंस को आडवाणी ने अपने जीवन का ”सबसे दुखद” दिन करार दिया था, क्योंकि केंद्र में कांग्रेस सरकार द्वारा भाजपा शासित सभी चार राज्यों की सरकारों को बर्खास्त करने से पार्टी को राजनीतिक अलगाव और कानूनी परेशानियों का डर था.

एक ”हिंदू हृदय सम्राट”, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्वयंसेवक, जिनकी संगठनात्मक क्षमताओं और वैचारिक स्पष्टता ने नरम और अधिक लोकप्रिय वाजपेयी के साथ एक आदर्श तालमेल बिठाया, की खूबियों को बखूबी सराहा गया. पार्टी सहयोगी ही नहीं, आलोचक भी आडवाणी की सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी पर जोर देने के लिए प्रशंसा करते हैं.

कुख्यात हवाला डायरी में आडवाणी का नाम आने के बाद उन्होंने सांसद पद से इस्तीफा दे दिया था. कर्नाटक के तत्कालीन मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा सहित उनके कुछ सहयोगियों के गंभीर आरोपों का सामना करने के बाद आडवाणी ने उन्हें पद छोड़ने के लिए कहा था. एक नेता ने कहा कि 1995 में जब पार्टी पूरी तरह से उनके पीछे थी, तब वाजपेयी को भाजपा के प्रधानमंत्री पद के चेहरे के रूप में नामित करने का उनका निर्णय वास्तव में ”पार्टी को खुद से पहले रखने” का एक कदम था.

विडंबना यह है कि जिस व्यक्ति ने हिंदुत्व की राजनीति को हाशिये से मुख्यधारा में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, उन्हें खुद ही इसकी राजनीतिक वापसी का संदेह हो गया और जब ऐसा लगा कि 2004 के चुनाव में कांग्रेस के हाथों अप्रत्याशित हार के बाद भाजपा एक स्थिर स्थिति में पहुंच गई है, तो उन्होंने अधिक उदारवादी और धर्मनिरपेक्ष छवि बनाने की कोशिश की.

वर्ष 2005 में अपनी पाकिस्तान यात्रा के दौरान आडवाणी ने कराची में पाकिस्तान के संस्थापक एम.ए. जिन्ना की मजार पर उनकी बहुत प्रशंसा की, और दावा किया कि दो-राष्ट्र सिद्धांत के प्रस्तावक धर्मनिरपेक्ष और हिंदू-मुस्लिम एकता के दूत थे. कराची ही आडवाणी का जन्मस्थान भी है. आडवाणी की टिप्पणियों से उनकी हिंदुत्ववादी छवि को भारी नुकसान पहुंचा और कई लोगों का मानना है कि आरएसएस के साथ उनके संबंधों पर स्थायी रूप से असर पड़ा.

कई बार वह भाजपा की राजनीति में हिंदुत्ववादी संगठन के हस्तक्षेप की भी आलोचना करते थे. यह श्रेय भी पार्टी के भीतर उनकी स्थिति को जाता है, जिसके तहत उन्होंने 2002 के दंगों के बाद मोदी को गुजरात के मुख्यमंत्री बने रहने के लिए समर्थन देने सहित नेताओं की एक पीढ़ी को तैयार किया.

वह 2009 के आम चुनाव में भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार थे, लेकिन भरपूर समर्थन नहीं मिला और आरएसएस की सक्रिय भूमिका वाली पार्टी ने अंतत? उन्हें बाहर करने का फैसला किया और 2014 के चुनाव से पहले मोदी को अपने राष्ट्रीय चेहरे के रूप में आगे किया.

मोदी के उत्थान और रणनीतिक कौशल को लेकर आडवाणी की नाराजगी ने उन्हें पार्टी के भीतर और भी कमजोर कर दिया, क्योंकि पार्टी कार्यकर्ता गुजरात के इस नेता (मोदी) के ईद-गिर्द लामबंद हो गए, जिनके विकास और हिंदुत्व की राजनीति के कुशल उपयोग ने भाजपा को उस ऊंचाई पर पहुंचा दिया है, जिसे अनुभवी नेता ने असंभव माना होगा. हालांकि, आडवाणी को भारत रत्न सम्मान सत्तारूढ़ दल के भीतर उनकी और देश की राजनीति में निभाई गई मौलिक भूमिका की स्वीकार्यता को रेखांकित करता है.

कर्पूरी ठाकुर, आडवाणी के साथ ही अब तक 50 हस्तियों को मिल चुका है ‘भारत रत्न’

भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न देने के फैसले से देश का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पाने वालों की संख्या 50 हो गयी है. नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा समाजवादी नेता ठाकुर को मरणोपरांत इस पुरस्कार से सम्मानित करने के निर्णय के 10 दिन बाद शनिवार को पूर्व उप प्रधानमंत्री आडवाणी को भारत रत्न देने की घोषणा की गई.

पिछली बार, 2019 में भारत रत्न पुरस्कार प्रणब मुखर्जी और मरणोपरांत भूपेन्द्र कुमार हजारिका और नानाजी देशमुख को प्रदान किया गया था. 2020 से 2023 के बीच यह पुरस्कार किसी को नहीं दिया गया. भारत सरकार ने 1954 में दो नागरिक पुरस्कार – भारत रत्न और पद्म विभूषण – स्थापित किए थे. पद्म विभूषण की तीन श्रेणियां थीं – पहला वर्ग, दूसरा वर्ग और तीसरा वर्ग. बाद में आठ जनवरी, 1955 को एक राष्ट्रपति अधिसूचना के माध्यम से इनका नाम बदलकर पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री कर दिया गया.
भारत रत्न देश का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है. यह समाज के किसी भी क्षेत्र में असाधारण सेवा या उच्चतम स्तर के प्रदर्शन को मान्यता देने के लिए प्रदान किया जाता है.

भारत रत्न के लिए प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रपति को सिफारिश की जाती है. इस पुरस्कार के लिए किसी औपचारिक अनुशंसा की आवश्यकता नहीं है. भारत रत्न पुरस्कारों की संख्या किसी विशेष वर्ष में अधिकतम तीन तक सीमित है. हालांकि, 1999 में इसे चार लोगों को दिया गया था.

यह सम्मान 2019, 1997, 1992, 1991, 1955 और 1954 सहित कई अवसरों पर एक वर्ष में तीन व्यक्तियों को दिया गया था. 2015, 2014, 2001, 1998, 1990, 1963 और 1961 सहित कई अवसरों पर यह दो व्यक्तियों को दिया गया, जबकि ऐसे वर्ष भी रहे हैं जब यह पुरस्कार किसी को भी प्रदान नहीं किया गया था.

पहले वर्ष में, यह प्रतिष्ठित पुरस्कार सी. राजगोपालाचारी, सर्वपल्ली राधाकृष्णन और चंद्रशेखर वेंकटरमन को प्रदान किया गया था.
पूर्व में इस पुरस्कार से सम्मानित होने वालों में जवाहरलाल नेहरू, राजेंद्र प्रसाद, जाकिर हुसैन, लाल बहादुर शास्त्री, अबुल कलाम आजाद, इंदिरा गांधी, के. कामराज, मदर टेरेसा, विनोबा भावे, एम.जी. रामचंद्रन, बी.आर. आंबेडकर, नेल्सन मंडेला, राजीव गांधी, वल्लभभाई पटेल, मोरारजी देसाई, सत्यजीत रे, ए.पी.जे. अब्दुल कलाम, जयप्रकाश नारायण, अमर्त्य सेन, सचिन तेंदुलकर, अटल बिहारी वाजपेयी और मदन मोहन मालवीय शामिल हैं.

इसके अलावा, भगवान दास, एम. विश्वेश्वरैया, गोविंद बल्लभ पंत, डी. केशव कर्वे, बिधान चंद्र रॉय, पुरुषोत्तम दास टंडन, पांडुरंग वामन केन, वराहगिरि वेंकट गिरि, खान अब्दुल गफ्फार खान, जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा, गुलजारी लाल नंदा, बिस्मिल्ला खान, एम. सुब्बुलक्ष्मी, गोपीनाथ बोरदोलोई, पंडित रविशंकर, सी.एन.आर. राव, भीमसेन गुरुराज जोशी, लता मंगेशकर, चिदंबरम सुब्रमण्यम और अरुणा आसफ अली को भी भारत रत्न से सम्मानित किया गया है.

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