
पटनाः बिहार के सियासी चाणक्य लालू प्रसाद यादव ने पहले अपने पूर्व मित्र मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तरफ से दोस्ती का हाथ बढ़ाया, अब राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की एक अहम बैठक बुलाई है। इस बैठक में सभी पार्टी नेताओं का शामिल होना अनिवार्य है। मकर संक्रांति के बाद बुलाई गई इस बैठक को सियासी गलियारों में सत्ता परिवर्तन की पटकथा के पहले चैप्टर की तरह देखा जा रहा है, क्योंकि पहले ही पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने बिहार के सियासी भूचाल का जिक्र कर चुके हैं।
राष्ट्रीय जनता दल के महासचिव अब्दुलबारी सिद्दिकी ने द्वारा जारी पत्र में बैठक के लिए 18 जनवरी का दिन चुना गया है। जारी पत्र में लिखा गया है कि राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के आदेश पर यह बैठक बुलाई गई है और पार्टी के सभी बड़े नेताओं को इसमें शामिल होना आवश्यक है। बता दें कि यह बैठक उस वक्त बुलाई गई है, जब राजद प्रमुख ने बीते दिनों ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को एनडीए छोड़कर महागठबंधन में शामिल होने का ऑफर दिया है।
असहज नीतीश चाहते हैं जल्दी चुनाव
दरअसल खबरों की माने तो नीतीश कुमार एनडीए में असहज बताए जा रहे हैं। लोकसभा चुनाव के बाद 13 सांसदों की शक्ति हांसिल करने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जल्द से जल्द विधानसभा चुनाव चाहते हैं। वहीं दूसरी तरफ भाजपा इसके लिए तैयार नहीं हैं। नीतीश कुमार के जल्दी चुनाव करवाने की चाहत के पीछे जदयू की रणनीति छिपी हुई है। ऐसी चर्चा है कि नीतीश कुमार चाहते हैं कि लोकसभा चुनाव में मिली इलेक्टोरल सफलता को विधानसभा चुनाव में भी बनाए रखें। क्योंकि बिहार की मौजूदा स्थिति में उनकी पार्टी तीसरे नंबर पर पहुंच गई है, जो इनको बर्दाश्त नहीं है।
नीतीश को पार्टी और कुर्सी की चिंता
इसके अलावा अमित शाह कह चुके हैं कि मुख्यमंत्री का फैसला चुनाव जीतने के बाद एनडीए की बैठक में तय किया जाएगा। ऐसे में कुर्सी जाने का डर और पार्टी का खिसकता जनाधार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जदयू के लिए चिंता विषय बन गया है। कुर्सी और सूबे में पार्टी का वर्चस्व बचाने के लिए नीतीश कुमार के लिए एक ही रास्ता बचा है कि एनडीए से निकलकर एक बार फिर महागठबंधन के साथ हो जाएं। इससे केंद्र सरकार भी असहज हो जाएगी।
आरजेडी ने कहा विधानसभा चुनाव के लिए बुलाई गई बैठक
हालांकि आरजेडी द्वारा जारी प्रेस रिलीज में कहा गया है कि पार्टी साल के आखिरी में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले समीक्षा के लिए यह बैठक बुला रही है, लेकिन बिहार की राजनीति में कब क्या हो जाए कुछ भी कहना मुश्किल है। क्योंकि बिहार में पिछले साल भी जनवरी के आखिरी हफ्ते में ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार महागठबंधन का साथ छोड़कर एनडीए में शामिल हो गए थे। राजद की बैठक 18 जनवरी, 2025 दिन-शनिवार को दोपहर 11:30 बजे से होटल मौर्या, अशोक हॉल, पटना (लोकनायक जय प्रकाश नारायण सभागार) में आहुत की गयी है।
तेजस्वी कहते रहे हैं ‘खेला होगा’
वहीं महागठबंधन से नीतीश कुमार के अलग होने के बाद सत्ता से विपक्ष जाने के बाद लगातर पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव कहते रहे हैं कि बिहार में अब खेला होगा। हालांकि यह खेला क्या है और कब होगा इसको लेकर उन्होंने कभी कुछ नहीं कहा। इसके अलावा पप्पू यादव ने हालही में कहा था कि मकर संक्राति के बाद बिहार में खेला होने वाला है।
विधानसभा का समीकरण
बिहार विधानसभा का समीकरण देंखे तो 80 विधायकों के साथ भाजपा सबसे पड़ी पार्टी है। वहीं दूसरे नबर पर राजद है। राजद के पास 77 विधायक हैं। इसके अलावा जदयू के पास 45 तो कांग्रेस पास 19 विधायक है। वहीं गठबंधन की बात करें तो एनडीए के पास निर्दलीय और हम को मिलाकर 131 विधायक हैं। दूसरी तरफ महागठबंधन के पास कांग्रेस, लेफ्ट, आरजेडी, को मिलाकर 111 विधायक हैं। यानि बहुमत के लिए 11 विधायक और चाहिए। ऐसे में बिहार की सियासत में कुछ भी संभव है।



