देश से वामपंथी उग्रवाद का दो वर्ष में पूरी तरह हो जाएगा सफाया: शाह

नयी दिल्ली/मुंबई/भुवनेश्वर/अमरावती. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि दो वर्ष में देश से वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) का पूरी तरह सफाया हो जाएगा. शाह ने इसके साथ ही नक्सल मुक्त क्षेत्रों में लगातार निगरानी की जरूरत पर बल दिया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वहां यह दोबारा न पनपे.

वामपंथी उग्रवाद प्रभावित राज्यों में सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के लिए आयोजित एक बैठक की अध्यक्षता करते हुए शाह ने यह भी कहा कि मोदी सरकार ने 2014 से वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करने की नीति अपनायी है. उन्होंने कहा कि इसके परिणामस्वरूप वर्ष 2022 में पिछले चार दशकों में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में हिंसा और मौतों की सबसे कम घटनाएं हुईं.
उन्होंने कहा कि दो वर्ष में देश से वामपंथी उग्रवाद का पूरी तरह सफाया हो जाएगा.

उन्होंने कहा, ”नक्सलवाद मानवता के लिए अभिशाप है और हम इसे इसके सभी स्वरूपों में उखाड़ फेंकने के लिए प्रतिबद्ध हैं.” समीक्षा बैठक में महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और झारखंड के मुख्यमंत्रियों ने भाग लिया. महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी बैठक में भाग लिया. इनके अलावा ओडिशा, बिहार, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ. का प्रतिनिधित्व राज्य के मंत्रियों ने किया. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि विकास योजनाओं के कारण राज्य में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति बेहतर हो रही है.

मुंबई में मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, शिंदे ने कहा कि शहरी नक्सलवाद इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचारित किया जा रहा है और इसे रोकने के लिए एक प्रभावी तंत्र बनाने की आवश्यकता है. झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी समस्या से निपटने के लिए अर्धसैनिक बलों की तैनाती जारी रखने की वकालत की. उन्होंने नक्सल रोधी अभियानों में निरंतरता बनाए रखने के लिए राज्य में प्रतिनियुक्त केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के महानिरीक्षक (आईजी) का कार्यकाल कम से कम तीन साल तय करने की भी मांग की.

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई एस जगन मोहन रेड्डी ने शुक्रवार को पुष्टि की कि राज्य में वामपंथी उग्रवाद कम हो रहा है और माओवादी गतिविधियां केवल कुछ इलाकों तक ही सीमित हैं. गृह मंत्री शाह ने कहा कि वामपंथी उग्रवाद के वित्तीय समर्थन के नेटवर्क को खत्म करने के लिए सभी प्रभावित राज्यों को नागरिक और पुलिस प्रशासन की एक संयुक्त टीम बनाकर प्रयास करने की जरूरत है.

शाह ने कहा कि वामपंथी उग्रवाद के वित्तपोषण पर हमला करने के लिए राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) राज्य की सभी एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस बात पर भी नजर रखने की जरूरत है कि जिन इलाकों से यह समस्या खत्म हो गयी है, वहां के नक्सली दूसरे राज्यों में आश्रय न लें.

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और सभी प्रभावित राज्यों के सहयोग से पिछले कुछ वर्षों में वामपंथी उग्रवाद पर अंकुश लगाने में सफलता मिली है और अब यह लड़ाई निर्णायक चरण में पहुंच गयी है. उन्होंने कहा कि 2019 से प्रभावित क्षेत्र सिकुड़ रहे हैं क्योंकि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के 195 नए शिविर स्थापित किए गए हैं, जबकि 44 और नए शिविर स्थापित किए जाएंगे.

शाह ने कहा कि वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ सीएपीएफ की तैनाती, विकास को तर्कसंगत बनाना और प्रभावित क्षेत्रों में शिविर स्थापित करना मोदी सरकार की प्राथमिकताएं हैं. उन्होंने कहा कि 2005 से 2014 के बीच की अवधि की तुलना में 2014 से 2023 के दौरान वामपंथी उग्रवाद से संबंधित हिंसा में 52 प्रतिशत से अधिक, मौतों में 69 प्रतिशत, सुरक्षा बल र्किमयों की मौतों में 72 प्रतिशत और नागरिकों की मौतों में 68 प्रतिशत की गिरावट आई है.

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने 2017 में वामपंथी हिंसा के पीड़ितों के लिए अनुग्रह राशि 5 लाख रुपये से बढ.ाकर 20 लाख रुपये कर दी थी, अब इसे और बढ.ाकर 40 लाख रुपये कर दिया गया है. गृह मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार वामपंथी उग्रवाद प्रभावित राज्यों में विकास को गति देने के लिए कई कदम उठा रही है. उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण, दूरसंचार, वित्तीय समावेशन, कौशल विकास और शिक्षा जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.

शाह ने कहा कि केंद्र सरकार ने वामपंथी उग्रवाद से सबसे अधिक प्रभावित जिलों में विकास को गति देने के लिए विशेष केंद्रीय सहायता (एससीए) योजना के तहत 14,000 से अधिक परियोजनाएं शुरू की हैं. उन्होंने कहा कि इनमें से 80 प्रतिशत से अधिक परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और योजना के तहत वामपंथी उग्रवाद प्रभावित राज्यों को 3,296 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं.

उन्होंने कहा कि विशेष बुनियादी ढांचा योजना (एसआईएस) के तहत वामपंथी उग्रवाद प्रभावित राज्यों में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था वाले पुलिस थानों के निर्माण, राज्य खुफिया शाखाओं और विशेष बलों को मजबूत करने के लिए 992 करोड़ रुपये की परियोजनाएं मंजूर की गई हैं. पिछले नौ वर्षों में मोदी सरकार ने सुरक्षा संबंधी व्यय (एसआरई) पहले की तुलना में दोगुना से भी अधिक कर दिया है.

केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़े के अनुसार, हिंसा की कुल घटनाओं में 52 प्रतिशत की गिरावट आई है – जो 14,862 (मई 2005 से अप्रैल 2014 के दौरान) से कम होकर 7,128 (मई 2014 से अप्रैल 2023 के दौरान); वामपंथी उग्रवाद से संबंधित मौतों में 69 प्रतिशत की कमी- 6,035 (मई 2005-अप्रैल 2014) से कम होकर 1,868 (मई 2014-अप्रैल 2023) और सुरक्षा र्किमयों की मृत्यु में 72 प्रतिशत की गिरावट आई – 1,750 (मई 2005-अप्रैल 2014) से कम होकर 485 (मई 2014-अप्रैल 2023).

इसके अनुसार नागरिकों की मृत्यु के मामले में, 68 प्रतिशत की गिरावट आई है – 4,285 (मई 2005-अप्रैल 2023) से कम होकर 1,383 (मई 2016-अप्रैल 2023); हिंसा की रिपोर्ट करने वाले जिलों में 53 प्रतिशत की गिरावट आयी है – 96 (2010) से कम होकर 45 (2022) और हिंसा की रिपोर्ट करने वाले पुलिस थानों में 62 प्रतिशत की गिरावट आई है- जो 465 (2010) से कम होकर 176 (2022) हो गए हैं.
बैठक में कई केंद्रीय मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के महानिदेशक, केंद्र सरकार के सचिव, राज्यों के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए.

‘शहरी नक्सलवाद’ का मुकाबला करने के लिए प्रभावी तंत्र बनाया जाए: मुख्यमंत्री शिंदे
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शुक्रवार को कहा कि विकास योजनाओं की वजह से राज्य के नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्रों में बदलाव आ रहा है. उन्होंने इसके साथ ही ‘शहरी नक्सलवाद’ से निपटने के लिए प्रभावी तंत्र बनाने का आह्वान किया. शिंदे ने यह बात वामपंथी उग्रवाद प्रभावित राज्यों की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के लिए दिल्ली में आयोजित बैठक में को संबोधित करने के दौरान कही. इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने की.

मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) द्वारा जारी बयान में शिंदे के हवाले से कहा गया, ”पिछले एक साल से नक्सल प्रभावित इलाकों में विभिन्न विकास योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने की वजह से हम जल्द ही गडचिरोली जैसे इलाकों से नक्सलवाद का पूरी तरह से सफाया करने में सफल होंगे.” उन्होंने कहा कि लेकिन ‘शहरी नक्सलवाद’ का इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिये प्रसार हो रहा है और इसे रोकने के लिए प्रभावी तंत्र बनाने की जरूरत है.

मुख्यमंत्री ने कहा, ”हर साल अरबों रुपये नक्सलियों को भेजे जा रहे हैं. रुपये के इस लेन-देन को रोकने और गहनता से जांच करने के लिए प्रवर्तन निदेशालय, आयकर विभाग और वित्तीय आसूचना इकाई का संयुक्त समूह बनाया जाना चाहिए.” शिंदे ने नक्सलवाद प्रभावित इलाकों में रेलवे नेटवर्क के विस्तार पर भी जोर दिया. उन्होंने जोर देकर कहा कि गडचिरोली, छत्तीसगढ. और तेलंगाना के सीमावर्ती इलाकों में रेल नेटवर्क का विकास लाभदायक होगा.

ओडिशा ने नक्सल प्रभावित इलाकों के लिए सर्मिपत हेलीकॉप्टर की मांग की

ओडिशा सरकार ने नक्सलवाद प्रभावित इलाकों में सुरक्षा र्किमयों की आवाजाही, अग्रिम चौकियों के रखरखाव और आपात स्थिति से निपटने के लिए केंद्र से एक सर्मिपत हेलीकॉप्टर की मांग की. वामपंथी उग्रवाद प्रभावित राज्यों की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के लिए नयी दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में ओडिशा के वित्तमंत्री बी.के.अरुखा ने केंद्र से नक्सल प्रभावित इलाकों में मोबाइल टावर लगाने के काम में तेजी लाने का अनुरोध किया.

यहां जारी बयान के मुताबिक अरुखा ने कहा, ”कुछ मुद्दे हैं जिनपर केंद्र को तत्काल ध्यान देने की जरूरत है जैसे विभिन्न मोबाइल संपर्क योजना के तहत मोबाइल फोन टावर का लगाना, इस कार्य को तेजी से कर जल्द पूरा किया जा सकता है.” उन्होंने कहा, ”कृपया राज्य को एक सर्मिपत हेलीकॉप्टर दिया जाए क्योंकि सुरक्षा बलों के लिए जवानों की आवाजाही, अग्रिम चौकियों के रखरखाव और वामपंथी संघर्ष के संदर्भ में आपात स्थिति उत्पन्न होने पर जवाबी कार्रवाई के लिए निर्बाध हेलीकॉप्टर सेवा आवश्यक है.”

अरुखा ने कहा कि ओडिशा ने वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ उल्लेखनीय सफलता अर्जित की है. उन्होंने कहा कि ओडिशा, केंद्रीय एजेंसियों और पड़ोसी राज्यों से इस समस्या को खत्म करने के लिए करीबी समन्वय जारी रखेगा. अरुखा ने कहा कि राज्य में वामपंथी उग्रवाद का प्रभाव 21 जिलों से घटकर 10 जिलों तक सीमित हो गया है.

आंध्र प्रदेश में वामपंथी उग्रवाद समाप्ति की ओर : मुख्यमंत्री जगन

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई एस जगन मोहन रेड्डी ने शुक्रवार को जोर देकर कहा कि राज्य में वामपंथी उग्रवाद समाप्ति की ओर है और माओवादी गतिविधियां कुछ हिस्सों में ही सीमित हैं. मुख्यमंत्री ने यह जानकारी नयी दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में दी.

रेड्डी ने प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ”आंध्र प्रदेश गत चार दशक से वामपंथी उग्रवाद से संघर्ष कर रहा है और सुरक्षा उपाय, विकास पहल, राष्ट्रीय नीति और कार्ययोजना के तहत स्थानीय समुदायों के अधिकार और हक की रक्षा जैसे बहु आयामी उपायों के सकारात्मक नतीजे प्राप्त हुए हैं.” मुख्यमंत्री के मुताबिक, राज्य सरकार ने माओवादी गतिविधियों को अल्लूरी सीतारामराजू और पावर्तीपुरम मन्यम जिलों के कुछ हिस्सों तक सीमित करने में सफलता प्राप्त की है. उन्होंने कहा कि माओवादियों की ताकत (उग्रवादियों के सदंर्भ में) 2019 के 150 से घटकर 2023 में 50 रह गई है.

रेड्डी ने कहा कि वामपंथी उग्रवाद संबंधी खुफिया जानकारी ओडिशा, तेलंगाना और छत्तीसगढ. जैसे पड़ोसी राज्यों के साथ साझा करने के अलावा दक्षिणी राज्य ने ‘प्रभावी’ तरीके से गरीबी, निरक्षरता, अपर्याप्त स्वास्थ्य सेवा और बेरोजगारी के मुद्दे का समाधान किया है जो वामपंथी चरमपंथ का मूल कारण है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासियों को वैकल्पिक नकदी फसलें उगाने की सलाह दी गई है. उन्होंने कहा कि सरकार भूमि पट्टा दे रही है, 3.23 लाख एकड़ वन भूमि पर 1.5 लाख आदिवासियों को स्वामित्व दिया गया है और माओवाद से प्रभावित इलाके में 1,087 किलोमीटर सड़क का निर्माण किया गया है.

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