
नयी दिल्ली. कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा के मार्ग में दुकानदारों के नाम प्रर्दिशत करने के आदेश की आलोचना करते हुए शुक्रवार को कहा कि वर्ष 2006 में खाने-पीने की चीजों की गुणवत्ता की निगरानी के लिए बने कानून की आड़ लेकर हिंदू-मुस्लिम की राजनीति हो रही है जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता. पार्टी के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के समय के नियम को लेकर झूठ बोला जा रहा है.
मुजफ्फरनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अभिषेक सिंह ने सोमवार को कहा था, ”जिले में कांवड़ यात्रा की तैयारियां शुरू हो गई हैं. यहां लगभग 240 किलोमीटर लंबा कांवड़ मार्ग है. मार्ग पर स्थित सभी होटलों, ढाबों और ठेले वालों से अपने मालिकों या फिर वहां काम करने वालों के नाम प्रर्दिशत करने को कहा गया है. यह इसलिए जरूरी है, ताकि किसी कांवड़िये के मन में कोई भ्रम न रहे.” मेरठ के बाट-माप विभाग के प्रभारी वी के मिश्रा ने बताया कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के अनुसार, प्रत्येक रेस्तरां या ढाबा संचालक के लिए फर्म का नाम, अपना नाम और लाइसेंस नंबर लिखना अनिवार्य है. उनके अनुसार ‘जागो ग्राहक जागो’ योजना के तहत नोटिस बोर्ड पर मूल्य सूची भी लगाना अनिवार्य है.
खेड़ा ने एक वीडियो जारी कर कहा, ”संप्रग सरकार के दौरान खाने-पीने की चीजों की गुणवत्ता को लेकर जो नियम बने थे, उनकी आड़ में छिपकर आप कांवड़ यात्रा के मार्ग पर हिंदू-मुस्लिम की राजनीति करेंगे, यह कतई मंजूर नहीं होगा.” उनका कहना था,”संप्रग सरकार के समय बने नियम के पीछे मत छिपिए. वह नियम सबके लिए लागू था. उसमें सबको अपना लाइसेंस रखना था ताकि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर सरकार की एजेंसियों द्वारा निगरानी रखी जा सके. उसका इससे कोई लेना-देना नहीं है. अगर आपको यही करना था तो पूरे देश में करिए जिसके तहत सब लाइसेंस रखते हैं.” कांग्रेस नेता ने कहा, ”कावंड़ मार्ग में फल बेचने वालों को भी अपना नाम लिखना पड़ेगा, यह संप्रग सरकार के समय का कोई नियम नहीं है. ये गलत बोल रहे हैं, झूठ बोल रहे हैं.”



