अयोध्या के राम मंदिर की तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत भोजशाला में वाग्देवी का मंदिर बनाएंगे: विहिप

धार: विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने शुक्रवार को इस संकल्प की घोषणा की कि अयोध्या में भगवान राम की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर के निर्माण की तर्ज पर कानूनी प्रक्रिया के जरिये धार के भोजशाला परिसर में वर्ष 2034 तक वाग्देवी (देवी सरस्वती) मंदिर का बनाया जाएगा।

भोजशाला को ंिहदू समुदाय वाग्देवी का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष 11वीं सदी के इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है। यह विवादित परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित है और इस स्थल को लेकर अदालत में मुकदमा लंबित है। कुमार ने वसंत पंचमी पर भोजशाला में वाग्देवी के दर्शन से पहले एक बड़ी सभा में कहा कि इस स्थान पर वाग्देवी की पहले से प्राण-प्रतिष्ठित मूर्ति फिलहाल लंदन के एक संग्रहालय में है।

उन्होंने कहा, ”हमें इस मूर्ति को भारत वापस लाना है। हमें अदालत में लंबित मुकदमा जीतकर इस मंदिर का स्वरूप सरस्वती मां की प्रतिष्ठा के अनुरूप बहाल करना है।” विहिप नेता ने दावा किया कि भोजशाला में वाग्देवी का मंदिर 1034 में बना था, लिहाजा इस निर्माण और इसमें वाग्देवी की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा को 992 साल पूरे हो गए हैं और 2034 में 1,000 साल पूरे जाएंगे।

उन्होंने कहा, ”क्या हम और आप संकल्प करें कि हम न्यायालय की प्रक्रिया पूरी करेंगे, वाग्देवी की मूर्ति वहां (लंदन) से वापस लाएंगे और जैसे अयोध्या में राम मंदिर बना है, 2034 में वैसी ही भव्यता से यहां (भोजशाला) वाग्देवी की प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा करेंगे।” कुमार ने दावा किया कि भोजशाला में मंदिर के साथ गुरुकुल भी था जहां बड़ी तादाद में छात्र वेद-पुराण और शास्त्रों को अध्ययन करते थे।

उन्होंने कहा, ”….इसलिए यहां (भोजशाला) दोबारा मंदिर बनेगा, तो देश के केंद्र में स्थित धार विद्या, ज्ञान और अध्ययन का शहर बनेगा।” सभा में साधु-संतों ने धार के विवादित परिसर को ंिहदुओं का धार्मिक स्थान बताते हुए सरकार से मांग की कि लंदन के संग्रहालय में रखी वाग्देवी की मूर्ति भारत वापस लाई जाए, इसे परिसर में स्थापित किया जाए और उज्जैन के ‘श्री महाकाल लोक गलियारे’ की तर्ज पर धार में ‘वाग्देवी गलियारा’ बनाया जाए।

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