बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफडीआई के प्रावधान वाला विधेयक लोकसभा में पारित

नयी दिल्ली. लोकसभा ने बीमा क्षेत्र में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) को 100 प्रतिशत तक बढ़ाने के प्रावधान वाले विधेयक को मंगलवार को मंजूरी दे दी. विधेयक पर चर्चा और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के जवाब के बाद सदन ने विपक्षी सदस्यों के संशोधनों को खारिज करते हुए ‘सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा कानूनों में संशोधन) विधेयक, 2025’ को ध्वनि मत से स्वीकृति दे दी.

इससे पहले, विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए सीतारमण ने कहा कि बीमा विधेयक में अब तक 12 बार संशोधन हो चुका है तथा संशोधन भी कई तरह के होते हैं और ये देश की तरक्की एवं बीमा क्षेत्र की जरूरतों को प्रर्दिशत करते हैं. उन्होंने कहा कि इस विधेयक में आम लोगों और किसानों की सुरक्षा के उपाय किए गए हैं. सीतारमण ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों की सुरक्षा के पुख्ता प्रावधान किए गए हैं.

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की तीन बीमा कंपनियों की बेहतरी के लिए 17 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए और इस तरह के कदम से इनकी स्थिति में काफी सुधार हुआ है. सीतारमण ने कुछ विपक्षी सदस्यों के इन आरोपों को खारिज कर दिया कि प्रीमियम की राशि विदेशी कंपनियों के पास जाएगी. उन्होंने कहा कि बीमा क्षेत्र को खोलने से बेहतर प्रौद्योगिकी और बेहतर उत्पाद सुनिश्चित किया जा सकेगा. वित्त मंत्री ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना से 12 करोड़ परिवारों को फायदा हुआ है. उन्होंने कहा कि विधेयक से बीमा एजेंट को भी मदद मिलेगी.

वित्त मंत्री ने कहा कि विधेयक के कानून का रूप लेने पर भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को अधिक स्वायत्तता मिलेगी तथा उसे फायदा होगा. उन्होंने कहा कि विधेयक का मसौदा राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ साझा किया गया था. सीतारमण ने कहा कि जीएसटी परिषद सचिवालय माल एवं सेवा कर (जीएसटी) कटौती का लाभ पॉलिसीधारकों तक नहीं पहुंचने से संबंधित शिकायतों की जांच कर रहा है.

उनके मुताबिक, बीमा विधेयक में पुनर्बीमा कंपनियों के लिए शुद्ध स्वामित्व निधि की आवश्यकता को 5,000 करोड़ रुपये से घटाकर 1,000 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है. वित्त मंत्री ने कहा कि बीमा कंपनियों द्वारा अर्जित किये गए अवैध लाभों को वापस लेने और प्रभावित बीमा पॉलिसीधारकों को वितरित करने के लिए आईआरडीएआई को सशक्त बनाया जा रहा है. यह विधेयक बीमा अधिनियम, 1938, जीवन बीमा निगम अधिनियम, 1956 और बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999 में संशोधन करने के लिए लाया गया है.

विधेयक में कहा गया है कि संशोधन से बीमा क्षेत्र में एफडीआई की सीमा 74 प्रतिशत से बढक़र 100 प्रतिशत हो जाएगी. विधेयक के अनुसार, बीमा क्षेत्र में एफडीआई को 100 प्रतिशत तक बढ़ाने के बावजूद शीर्ष अधिकारियों में से एक-अध्यक्ष, प्रबंध निदेशक या सीईओ- भारतीय नागरिक होना चाहिए. यह एक गैर-बीमा कंपनी के बीमा कंपनी में विलय का मार्ग भी प्रशस्त करता है. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बीते शुक्रवार को इस विधेयक को मंजूरी दी थी. विधेयक के उद्देश्यों और कारणों के अनुसार, इसके माध्यम से बीमा क्षेत्र की वृद्धि और विकास में तेजी लाना और पॉलिसीधारकों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करना है.

विधेयक पॉलिसीधारकों के हितों की रक्षा के लिए पॉलिसीधारक शिक्षा और संरक्षण कोष की स्थापना का प्रावधान करता है. इसमें कहा गया है कि इससे बीमा कंपनियों, मध्यस्थों और अन्य हितधारकों के लिए व्यापार करने में आसानी होगी, विनियमन बनाने में पारर्दिशता आएगी और क्षेत्र पर नियामक निगरानी बढ़ेगी. कंपनी के अध्यक्ष और अन्य पूर्णकालिक सदस्यों के कार्यकाल के संबंध में विधेयक पांच साल के कार्यकाल या उनके 65 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक का प्रावधान करता है.

वर्तमान में पूर्णकालिक सदस्यों के लिए ऊपरी आयु सीमा 62 वर्ष है, जबकि अध्यक्ष के लिए यह 65 वर्ष है. वित्त मंत्री ने इस साल के बजट भाषण में नयी पीढ़ी के वित्तीय क्षेत्र संबंधी सुधारों के हिस्से के रूप में बीमा क्षेत्र में विदेशी निवेश की सीमा को मौजूदा 74 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने का प्रस्ताव किया था.

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