
नयी दिल्ली/टोरंटो. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कनाडा के संघीय चुनाव में वहां के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की लिबरल पार्टी की जीत पर उन्हें बधाई दी और कहा कि वह द्विपक्षीय संबंधों के मजबूत होने तथा दोनों देशों के लोगों के लिए व्यापक अवसर सृजित होने की उम्मीद कर रहे हैं.
कार्नी एक अर्थशास्त्री हैं और राजनीति में नये हैं लेकिन उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुल्क लगाने की घोषणा की पृष्ठभूमि में हुए चुनावों में लिबरल पार्टी को उल्लेखनीय जीत दिलाई. यह 2015 के बाद से लिबरल पार्टी की चौथी जीत है, हालांकि जनमत सर्वेक्षणों की तुलना में कंजर्वेटिव पार्टी के साथ इसकी कांटे की टक्कर हुई.
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने बधाई संदेश में कहा कि भारत और कनाडा साझा लोकतांत्रिक मूल्य, कानून के शासन के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता और दोनों देशों के लोगों के बीच जीवंत संबंध रखते हैं. मोदी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, ”कनाडा के प्रधानमंत्री के रूप में चुने जाने और लिबरल पार्टी की जीत पर आपको बधाई मार्क जे. कार्नी.” उन्होंने कहा, ”मैं दोनों देशों की साझेदारी को मजबूत करने और हमारे लोगों के लिए अधिक से अधिक अवसर सृजित करने के लिए आपके साथ काम करने को उत्सुक हूं.” प्रधानमंत्री पद से जस्टिन ट्रूडो के हटने के बाद, कार्नी ने इस शीर्ष पद का प्रभार संभाला था.
भारत और कनाडा के बीच संबंध सितंबर 2023 में ट्रूडो के इन आरोपों के बाद काफी तनावपूर्ण हो गए थे कि कनाडा में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय एजेंटों की ”संभावित” संलिप्तता है. हालांकि, नयी दिल्ली ने ट्रूडो के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था और इसे ”बेतुका” करार दिया था. पिछले साल की दूसरी छमाही में दोनों देशों के बीच संबंध और भी खराब हो गए थे, जब ओटावा ने तत्कालीन उच्चायुक्त संजय वर्मा सहित कई भारतीय राजनयिकों का संबंध निज्जर की हत्या से होने का दावा किया था.
पिछले साल अक्टूबर में भारत ने वर्मा और पांच अन्य राजनयिकों को वापस बुला लिया था. भारत ने नयी दिल्ली से इतनी ही संख्या में कनाडाई राजनयिकों को भी निष्कासित कर दिया था. पिछले कुछ महीनों में भारत और कनाडा के सुरक्षा अधिकारियों ने फिर से संपर्क शुरू किया है और दोनों पक्ष नये उच्चायुक्तों की नियुक्ति की संभावना पर विचार कर रहे हैं. ट्रूडो के प्रधानमंत्री पद से हटने को द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने के अवसर के रूप में देखा गया.
भारत ने ट्रूडो सरकार पर कनाडा की धरती से खालिस्तान समर्थक तत्वों को संचालित होने की अनुमति देने का आरोप लगाया था. ट्रूडो के प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद, नयी दिल्ली ने कहा था कि उसे ”पारस्परिक विश्वास और संवेदनशीलता” के आधार पर कनाडा के साथ संबंधों के फिर से दुरूस्त होने उम्मीद है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मार्च में कहा था, ”भारत-कनाडा संबंधों में गिरावट का कारण उस देश में चरमपंथी और अलगाववादी तत्वों को दी गई खुली छूट है.” इस बीच, प्रधानमंत्री मोदी ने त्रिनिदाद और टोबैगो की पूर्व प्रधानमंत्री कमला प्रसाद-बिसेसर को भी उनकी चुनावी जीत पर बधाई दी. उन्होंने कहा, ”चुनाव में जीत के लिए आपको हार्दिक बधाई. हम त्रिनिदाद और टोबैगो के साथ अपने ऐतिहासिक रूप से घनिष्ठ और पारिवारिक संबंधों को संजोए हुए हैं.” मोदी ने कहा, ”मैं हमारे लोगों की साझा समृद्धि और कल्याण के लिए हमारी साझेदारी को और मजबूत करने के उद्देश्य से आपके साथ मिलकर काम करने को उत्सुक हूं.”
मार्क कार्नी की लिबरल पार्टी ने कनाडा का संघीय चुनाव जीता
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की लिबरल पार्टी ने देश के संघीय चुनाव में जीत हासिल की. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कनाडा के अमेरिका में विलय की धमकियों और व्यापार युद्ध ने लिबरल पार्टी की इस जीत में अहम भूमिका निभाई. ‘कैनेडियन ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन’ के अनुसार कार्नी के प्रतिद्वंद्वी कंजर्वेटिव पार्टी के नेता पियरे पोलिवरे अपनी सीट हार गए. सोमवार को हुए चुनाव में ओटावा जिले का प्रतिनिधित्व करने वाली सीट पर हार से पोलिवरे का भविष्य दांव पर लग गया.
पोलिवरे को कुछ महीने पहले कनाडा के अगले प्रधानमंत्री के तौर पर देखा जा रहा था. माना जा रहा था कि वह एक दशक में पहली बार कंजर्वेटिव पार्टी को सत्ता तक पहुंचा देंगे. वरिष्ठ नेता पोलिवरे ने ट्रंप के ‘अमेरिका फर्स्ट’ नारे से प्रेरणा लेते हुए ‘कनाडा फर्स्ट’ का नारा दिया. लेकिन, ट्रंप की नीतियों से उनकी समानताओं ने अंतत? उन्हें और उनकी पार्टी को नुकसान पहुंचााया. शुरुआती रुझानों के आधार पर अनुमान जताया गया कि लिबरल पार्टी संसद की 343 सीट में से कंजर्वेटिव पार्टी से ज्यादा सीट जीतेगी. फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि लिबरल पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिलेगा या नहीं. बहुमत के लिए 172 सीटें चाहिए.
बहुमत नहीं मिलने की स्थिति में लिबरल पार्टी को विधेयक पारित कराने और सत्ता में बने रहने के लिए छोटे दलों के साथ की जरूरत होगी. मतगणना के अंतिम रूझान के अनुसार लिबरल पार्टी 168 सीट पर बढ़त बनाए हुए है या जीत चुकी है. कार्नी ने संघीय चुनाव में लिबरल पार्टी की जीत के बाद अपने संबोधन में अमेरिका की धमकियों के सामने एकजुटता के महत्व पर जोर दिया. उन्होंने यह भी कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से कनाडा और अमेरिका ने जो पारस्परिक रूप से लाभकारी प्रणाली साझा की थी, वह समाप्त हो गई है.
उन्होंने कहा, ”हम अमेरिकी विश्वासघात के सदमे से उबर चुके हैं, लेकिन हमें उससे मिले सबक कभी नहीं भूलने चाहिए.” कार्नी ने कहा, ”जैसा कि मैं महीनों से आगाह कर रहा हूं कि अमेरिका हमारी जमीन, हमारे संसाधन, हमारा पानी, हमारा देश चाहता है.” उन्होंने कहा, ”ये बेकार की धमकियां नहीं हैं. राष्ट्रपति ट्रंप हमें तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि अमेरिका हम पर कब्जा कर सके. ऐसा कभी नहीं होगा…कभी नहीं होगा. लेकिन हमें इस वास्तविकता को भी पहचानना होगा कि हमारी दुनिया मूल रूप से बदल गई है.” पोलिवरे को उम्मीद थी कि चुनाव पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के लिए जनादेश होगा, जिनकी लोकप्रियता उनके कार्यकाल के अंतिम दिनों में खाद्य पदार्थों और आवास की कीमतों में वृद्धि के कारण कम हो गई थी.
लेकिन ट्रंप ने निरंतर निशाना बनाया, जिसके बाद ट्रूडो ने इस्तीफा दे दिया और दो बार केंद्रीय बैंकर रहे कार्नी लिबरल पार्टी के नेता और प्रधानमंत्री बन गए. पोलिवरे ने अपनी हार स्वीकार करते हुए कनाडावासियों के लिए लड़ते रहने का संकल्प जताया. चुनावी विश्लेषकों के अनुसार, शुरुआत में कनाडा में माहौल लिबरल पार्टी के समर्थन में नहीं दिख रहा था, लेकिन ट्रंप ने कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की कई बार बात की और उसके तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को कनाडा का गवर्नर संबोधित किया. उन्होंने कनाडा पर जवाबी शुल्क भी लगाए. ट्रंप के इन कदमों से कनाडा की जनता में आक्रोश बढ़ गया और राष्ट्रवाद की भावना प्रबल होने के कारण लिबरल पार्टी को जीतने में मदद मिली.



