पौष पूर्णिमा पर स्नान अनुष्ठान के साथ शुरू होगा ‘आस्था का महाकुंभ’

महाकुम्भ में 15 लाख से अधिक विदेशी पर्यटक आएंगे- शेखावत

प्रयागराज/महाकुम्भ नगर. प्रयागराज में संगम की रेती पर लगने वाला दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक जमावड़ा यानी महाकुंभ सोमवार को पौष पूर्णिमा के शुभ अवसर पर पहले प्रमुख स्नान अनुष्ठान के साथ शुरू हो जाएगा. गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम स्थल पर होने वाले आस्था के इस महा आयोजन में अगले 45 दिनों के दौरान अध्यात्म के अनेक रंग बिखरेंगे.

महाकुंभ का यह संस्करण 12 वर्षों के बाद आयोजित किया जा रहा है. हालांकि संतों का दावा है कि इस आयोजन के लिए खगोलीय परिवर्तन और संयोजन 144 वर्षों के बाद हो रहे हैं जो इस अवसर को और भी ज्यादा शुभ बना रहे हैं. शायद इसीलिए उत्तर प्रदेश सरकार को भरोसा है कि इस बार महाकुंभ में 35 करोड़ श्रद्धालु आएंगे.

श्रद्धालुओं का आंकड़ा अभी से इस महाकुंभ की आध्यात्मिक भव्यता की कहानी बयान कर रहा है. एक अनुमान के मुताबिक महाकुंभ की औपचारिक शुरुआत से दो दिन पहले शनिवार को रिकॉर्ड 25 लाख लोगों ने संगम में पवित्र डुबकी लगाई. अधिकारियों के मुताबिक, ”यह एक भव्य महाकुंभ होगा, जिसमें दिव्यता और आध्यात्मिकता के साथ-साथ आधुनिकता भी दिखाई देगी क्योंकि यह एक तरह का ‘डिजी-कुंभ’ भी होगा जिसमें एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाएगा.” प्रयागराज इस भव्य अवसर के लिए पूरी तरह से तैयार है और यह शहर दुनिया भर से संतों, तीर्थयात्रियों, भक्तों और आम जनता के लिये भी पलकें बिछाये है. सभी का लक्ष्य आध्यात्मिक उत्साह में सराबोर होना है.

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाकुंभ की तैयारियों की समीक्षा के दौरान हाल ही में कहा था कि सोमवार 13 जनवरी से 26 फरवरी तक आयोजित होने वाला महाकुंभ भारत की प्राचीन सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं को वैश्विक स्तर पर प्रमुखता प्रदान करेगा.

उन्होंने कहा था, ”महाकुंभ भारत की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रमाण है. यह आयोजन दुनिया भर के लोगों को अपनी प्राचीन परंपराओं और सांस्कृतिक जड़ों से फिर से जुड़ने का मौका देता है.” आदित्यनाथ ने कहा कि महाकुंभ का यह संस्करण एक भव्य, दिव्य और डिजिटल रूप से उन्नत आयोजन होगा. लगभग 10,000 एकड़ क्षेत्र में होने जा रहा यह आयोजन स्वच्छता, सुरक्षा और आधुनिकता के लिए एक अनुकरणीय मानक स्थापित करेगा. श्रद्धालुओं की सुविधा बढ.ाने के लिए डिजिटल पर्यटक मानचित्र से शौचालयों की सफाई की निगरानी की सुविधा मिलेगी. इसके अलावा स्मार्टफोन के साथ एकीकृत एआई-संचालित प्रणाली सुरक्षा सुनिश्चित करेगी.

उन्होंने यह भी कहा था कि महाकुंभ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि सामाजिक और आध्यात्मिक एकता का प्रतीक भी है. महाकुंभ के दौरान आयोजन स्थल दुनिया के सबसे बड़े अस्थायी शहर में तब्दील हो जाता. इसमें एक बार में 50 लाख से एक करोड़ श्रद्धालु आ सकते हैं. प्रदेश के मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह के अनुसार महाकुंभ मेला क्षेत्र में 55 से अधिक थाने स्थापित किये गये हैं और लगभग 45 हजार पुलिसर्किमयों की ड्यूटी लगायी गयी है.

उन्होंने बताया कि किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए सोशल मीडिया पर लगातार नजर रखने से सम्बन्धित परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई है. विभिन्न संप्रदायों के संतों के 13 अखाड़े इस महाकुंभ में भाग ले रहे हैं, जो सभी का ध्यान आर्किषत कर रहे हैं.
प्रयागराज में विभिन्न कार्यालयों की दीवारों को हिंदू धर्म, देवी-देवताओं और धार्मिक ग्रंथों में र्विणत प्रमुख घटनाओं के विभिन्न पहलुओं को दर्शाने वाले चित्रों से सजाया गया है.

शहर के चौराहों को भी विभिन्न धार्मिक वस्तुओं जैसे कलश, शंख और सूर्य नमस्कार आसन की विभिन्न मुद्राओं से सजाया गया है. इसके अलावा, शहर के अधिकांश प्रमुख चौराहों को नया रूप दिया गया है. पुलिस द्वारा विभिन्न चौराहों और तिराहों पर बैरिकेड भी लगाए गए हैं, जो पुलिस को भीड़ की आवाजाही को नियंत्रित करने में मदद करेंगे. संगम क्षेत्र या फाफामऊ में 30 से अधिक पंटून पुल भी नदी के एक छोर से दूसरे छोर तक लोगों की आवाजाही को सुविधाजनक बनाने के लिए तैयार किए गए हैं.
महाकुंभ मेला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह जनवरी 2024 में अयोध्या में भगवान राम लला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद आयोजित होने वाला पहला कुंभ मेला है.

महाकुंभ 2025 में अखाड़ा क्षेत्र में अखाड़ों समेत विभिन्न संगठनों के शिविर पूरी भव्यता से स्थापित हो चुके हैं. जहां शिविरों को हमेशा की तरह खूबसूरती से डिजाइन किया गया है, वहीं इस साल प्रवेश द्वार अपने अनूठे और विषयगत डिजाइनों से सुर्खियां बटोर रहे हैं.
मेला क्षेत्र में थीम वाले प्रवेश द्वार देखने में आश्चर्यजनक होने के अलावा पहचान के चिह्न के रूप में भी काम कर रहे हैं और तीर्थयात्रियों को विशिष्ट संगठनों का पता लगाने और उन तक पहुंचने में मदद कर रहे हैं.

विभिन्न अखाड़ों और संगठनों ने न केवल अपने शिविरों को आध्यात्मिक रूप से समृद्ध किया है, बल्कि अपने प्रवेश द्वारों को भी विशिष्ट थीम के साथ डिजाइन किया है. एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, ”झूंसी के पास स्थित ये द्वार विभिन्न डिजाइनों में आते हैं, जिनमें हवाई जहाज के मॉडल, शिवलिंग और मुकुट शामिल हैं, जो शिविरों की समग्र भव्यता को बढ.ाते हैं.” बयान के मुताबिक पौष पूर्णिमा से एक दिन पहले संगम के तट पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा. रविवार को युवाओं, बुजुर्गों और बच्चों समेत लाखों श्रद्धालु पवित्र संगम में डुबकी लगाने के लिए अपार उत्साह के साथ एकत्र हुए.

बयान के अनुसार इस दौरान श्रद्धालुओं ने इस मौके को अपनी जड़ों और परंपराओं से जुड़ने के अवसर के रूप में लिया. उन्होंने वीआईपी घाट और संगम पर स्नान करने के क्षणों को कैमरे में कैद करके उन्हें साझा किया. वे पल प्राचीन आस्था और आधुनिक कनेक्टिविटी के मिश्रण का प्रतीक थे. पुलिस उप महानिरीक्षक वैभव कृष्ण और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश द्विवेदी व्यक्तिगत रूप से व्यवस्थाओं की देखरेख कर रहे हैं.

महाकुम्भ स्नान के लिए घाट तैयार, संस्थाओं में कार्य प्रगति पर

संगम की रेती पर आयोजित विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक समागम महाकुम्भ, सोमवार के स्नान पर्व से प्रारंभ होने जा रहा है जिसके लिए मेला प्रशासन ने पूरी तरह से तैयारी का दावा किया है. हालांकि अभी कई जगहों पर कार्य प्रगति पर है. स्नान से एक दिन पूर्व ‘पीटीआई-भाषा’ ने रविवार को संगम घाट और अन्य घाटों पर तैयारियों का जायजा लिया. सभी घाट स्नान के लिए पूरी तरह से तैयार हैं. इस बार संगम तट के अलावा नदी के बीच में कई ‘चेंजिंग रूम’ बनाए गए हैं और सभी नाविकों को यात्रियों के लिए ‘लाइफ जैकेट’ दिए गए हैं. श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नाव के किराए की दर का बोर्ड भी लगाया गया है.

संगम क्षेत्र में स्नान के लिए भारी संख्या में आ रहे श्रद्धालुओं को लेकर उत्साहित नाविक विष्णु निषाद ने कहा, ह्लइस बार का कुम्भ मेला हम नाविकों के जीवन में खुशी की लहर लेकर आया है. मेला प्रशासन द्वारा किराया बढ़ाने से सभी नाविक उत्साहित हैं.ह्व स्नान घाटों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा को विशेष महत्व देते हुए महाकुम्भ में पहली बार ‘अंडर वॉटर ड्रोन’ तैनात किया गया है जो 24 घंटे पानी के भीतर हर गतिविधियों की निगरानी करने में सक्षम है.

उप्र: कुम्भ पहुंची इटली की एमा ने कहा, “लगता है मैं पिछले जन्म में भारतीय थी”

भारतीय संस्कृति व परंपरा से प्रभावित पहली बार महाकुम्भ पहुंची इटली की रहने वाली एमा ने कहा कि लगता है कि ‘मैं पिछले जन्म में भारतीय थी.’ महाकुम्भ मेला सोमवार को पौष पूर्णिमा के स्नान के साथ शुरू हो रहा है, जिसमें देश और दुनिया से करीब 40 करोड़ लोगों के आने की संभावना है. एमा उन तीन दोस्तों में से एक हैं, जो दुनिया के सबसे बड़े मेले को देखने के लिए पहली बार इटली से प्रयागराज आए हैं.

गंगा के तट पर एक शिविर में ठहरी एमा ने कहा, “मैं योग प्रशिक्षक हूं. मुझे भारतीय संस्कृति के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी है. कुम्भ मेला सनातन धर्म का सबसे बड़ा आयोजन है. यह पहला अवसर है जब मैं कुम्भ मेला घूमने आयी हूं.” उन्होंने कहा, “मेरे दोस्त यहां आने की योजना बना रहे थे, तो मैं भी उनके साथ शामिल हो गयाी.” एमा के दोस्त स्टीफेनो ने कहा, “मैं पहली बार कुम्भ आया हूं. रूस के रहने वाले मेरे कुछ साधु मित्रों ने मुझे कुम्भ के बारे में बताया. वे भारत में आकर नागा साधु बन चुके हैं.” इटली की रहने वाली एमा महाकुम्भ के आयोजन से काफी प्रभावित दिखाई दीं.

एमा ने कहा, “मैं यहां पहली बार आयी हूं. कई भारतीय मेरे मित्र हैं. मुझे भारतीय संस्कृति पसंद है. मुझे लगता है कि इससे पहले के जन्म में मैं भारतीय थी. भारत का संगीत, भजन, कीर्तन, सब कुछ मुझे काफी पसंद है. यहां महाकुम्भ मेले की व्यवस्थाएं काफी अच्छी हैं.”

महाकुम्भ में 15 लाख से अधिक विदेशी पर्यटक आएंगे- शेखावत

केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने रविवार को यहां कहा कि इस महाकुम्भ में 15 लाख से अधिक विदेशी पर्यटकों के आने का अनुमान है जिनके लिए पर्यटन मंत्रालय ने एक ‘टेंट सिटी’ तैयार की है. मंत्री के मुताबिक, इस टेंट सिटी में आयुर्वेद, योग और पंचकर्म जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं.

उन्होंने नागवासुकी क्षेत्र में सेक्टर 7 स्थित 10 एकड़ से अधिक क्षेत्र में बने भारतीय सांस्कृतिक धरोहर के केंद्र ‘कलाग्राम’ का उद्घाटन करने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में यह जानकारी दी. मंत्री ने बताया कि महाकुम्भ दुनिया का सबसे बड़ा मेला है जो विविधता से भरी भारत की एकता को पूरी दुनिया के समक्ष प्रस्तुत करेगा. उन्होंने कहा कि संस्कृति मंत्रालय ने कुम्भ को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए विशेष प्रयास किए हैं. शेखावत ने कहा कि कलाग्राम महाकुम्भ 2025 का एक मुख्य आकर्षण होगा जहां चार धामों का मंच प्रदर्शन, 12 ज्योतिर्लिंगों का भव्य प्रवेश द्वार, अविरल शाश्वत कुम्भ प्रदर्शनी, 7 क्षेत्रीय संस्कृति आंगन में सांस्कृतिक विविधता का प्रदर्शन होगा.

उन्होंने कहा, “अनुभूति मंडपम का गहन अनुभव, 230 से अधिक कारीगरों द्वारा भारत की शिल्प कला को प्रर्दिशत करेगा. यहां देश के विभिन्न राज्यों के पारंपरिक भोजन स्टॉल के माध्यम से भारतीय व्यंजनों का स्वाद, 14,630 से अधिक सांस्कृतिक कलाकारों की रंगारंग प्रस्तुतियां और विभिन्न गतिविधियों और प्रतियोगिताओं में सहभागिता का अवसर मिलेगा.” केंद्रीय मंत्री ने कहा कि महाकुम्भ में आने वाले श्रद्धालु अयोध्या, काशी और मथुरा जैसे स्थलों की यात्रा कर सकें, इसके लिए ‘ हवाई यात्राओं की व्यवस्था की गई है. कलाग्राम का उद्देश्य भारतीय लोक कला, संस्कृति और परंपराओं को जीवंत मंच प्रदान करना है.

महाकुंभ से पहले संगम तट पर किया गया ‘नमामि गंगे यज्ञ’

प्रयागराज में महाकुंभ पर अमृत स्नानों से ठीक एक दिन पहले रविवार को संगम तट पर नमामि गंगे टीम द्वारा भव्य ‘नमामि गंगे यज्ञ’ का आयोजन किया गया. इस विशेष आयोजन का उद्देश्य गंगा की पवित्रता, स्वच्छता और संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और सामूहिक संकल्प लेना था.

एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, यज्ञ के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं और गंगा सेवा दूतों ने गंगा के निर्मल प्रवाह के लिए आहुतियां अर्पित कीं. यह आयोजन स्वामी विवेकानंद की जयंती राष्ट्रीय युवा दिवस पर किया गया. बयान के अनुसार हजारों श्रद्धालुओं की सहभागिता वाले इस आयोजन में 200 से ज्यादा गंगा सेवा दूतों ने खासतौर से भाग लिया और गंगा की अविरलता-पवित्रता बनाए रखने का सामूहिक संकल्प लिया. युवा शक्ति के जोश और संकल्प से ओतप्रोत यह आयोजन आध्यात्मिकता और पर्यावरणीय चेतना का अनूठा संगम बना.

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