महात्मा गांधी मेरे परिवार के नहीं थे, मेरे परिवार जैसे हैं: प्रियंका

‘आप महात्मा गांधी का नाम हटा देंगे फिर भी देशभक्त, हम विरोध करें तो देशद्रोही’ : तृणमूल सांसद

नयी दिल्ली. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने मंगलवार को लोकसभा में कहा कि महात्मा गांधी उनके परिवार के नहीं थे, बल्कि उनके परिवार जैसे ही हैं तथा पूरे देश की भावना भी यही है. उन्होंने सदन में ‘विकसित भारत- जी राम जी विधेयक, 2025’ को पेश किए जाने का विरोध करने के दौरान यह टिप्पणी की.

केरल के वायनाड से लोकसभा सदस्य जब इस विधेयक में महात्मा गांधी का नाम नहीं होने को लेकर सरकार की आलोचना कर रही थीं तो सत्तापक्ष के किसी सदस्य ने कहा कि ‘‘महात्मा गांधी आपके परिवार के नहीं थे.’’ इस पर प्रियंका गांधी ने कहा, ‘‘हां, महात्मा गांधी मेरे परिवार के नहीं थे, लेकिन मेरे परिवार जैसे ही हैं. यही भावना पूरे देश की है.’’

‘आप महात्मा गांधी का नाम हटा देंगे फिर भी देशभक्त, हम विरोध करें तो देशद्रोही’ : तृणमूल सांसद

तृणमूल कांग्रेस सांसद शताब्दी रॉय ने मंगलवार को लोकसभा में सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘‘आप लोकतंत्र खत्म करेंगे, महात्मा गांधी का नाम हटा देंगे फिर भी आप देशभक्त हैं और हम लोग विरोध करेंगे तो देशद्रोही हैं.’’ उन्होंने सदन में ‘सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा कानूनों में संशोधन) विधेयक, 2025’ पर चर्चा में भाग लेते हुए दावा किया कि आज संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने सदन में विधेयकों को पारित करने की बात ‘‘अहंकार के साथ कही और यह भी कहा कि आप लोग (विपक्ष) चर्चा करो लेकिन हम लोग विधेयक पारित करके रहेंगे.’’ तृणमूल सांसद ने कहा कि सरकार ‘‘लोकतंत्र खत्म करे फिर भी देशभक्त है, महात्मा गांधी का नाम हटा दे फिर भी देशभक्त है. हम लोग विरोध करेंगे तो हम लोग देशभक्त नहीं हैं, देशद्रोही हैं.’’

संसद में प्रियंका ने सरकार से पूछा- मनरेगा का नाम बदलने की सनक क्यों सवार?

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा आज लोकसभा में विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण), VB-G RAM G बिल, 2025 का विरोध किया। यह बिल दो दशक पुराने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) की जगह लाने का प्रस्ताव है।

उन्होंने कहा कि इस विधेयक में बदलाव करने पर अपनी आपत्ति दर्ज करना चाहती हूं। MGNREGA पिछले 20 वार्षों से ग्रामीण भारत को रोजगार देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में सक्षम रहा है। यह कितना क्रांतिकारी कानून है कि जब इसे बनाया गया तो सदन के सभी राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी सहमती दी थी। इसके द्वारा 100 दिन का रोजगार देश के गरीब से गरीब लोगों को मिलता आया है।

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