न्यायालय में सुनवाई के दौरान बेनकाब हुआ ममता बनर्जी का ‘विद्रूप चेहरा’: भाजपा

नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि कोलकाता में एक प्रशिक्षु महिला डॉक्टर से बलात्कार और हत्या से संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय में उनका ‘विद्रूप चेहरा’ बेनकाब हो गया.

उच्चतम न्यायालय ने दुष्कर्म और उसकी हत्या की घटना के इस मामले में पोस्टमार्टम के लिए जरूरी एक अहम दस्तावेज नहीं होने पर चिंता जताई और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से इसकी जांच करने को कहा. प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि ‘चालान’ के इस्तेमाल का कोई उल्लेख नहीं है. उन्होंने सीबीआई और पश्चिम बंगाल सरकार से जवाब मांगा.

पीठ ने कहा, ”जब शव को पोस्टमॉर्टम के लिए सौंपा गया था तो इसका चालान कहां है?” भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा, ”उच्चतम न्यायालय ने तीखी टिप्पणी की है… ममता बनर्जी का विद्रूप चेहरा बेनकाब किया है… सीजेआई (प्रधान न्यायाधीश) ने पूछा कि पोस्टमॉर्टम चालान रिकॉर्ड से क्यों गायब है.” भाटिया ने बनर्जी को ‘झूठी’ करार दिया और आरोप लगाया कि उनके इशारे पर मामले में सबूत नष्ट किए गए.

भाजपा प्रवक्ता ने आश्चर्य जताया कि क्या उक्त पोस्टमॉर्टम चालान को केस रिकॉर्ड का हिस्सा इसलिए नहीं बनाया गया कि इससे डॉ. संदीप घोष और कोलकाता पुलिस आयुक्त विनीत गोयल को बचाने के मुख्यमंत्री के प्रयास का पर्दाफाश हो सकता था. सीबीआई ने डॉ. घोष को अस्पताल में कथित वित्तीय कदाचार के संबंध में दो सितंबर को गिरफ्तार किया था.

भाटिया ने यह भी पूछा कि कोलकाता पुलिस ने अस्पताल की महज 27 मिनट की सीसीटीवी फुटेज सीबीआई को क्यों सौंपी. उन्होंने मांग की कि बनर्जी मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए मुख्यमंत्री पद से तत्काल इस्तीफा दें. उन्होंने कोलकाता पुलिस आयुक्त को बर्खास्त करने की भी मांग की.

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