पुलवामा आतंकी हमले से जुड़े होने का आरोप लगाकर व्यक्ति से करीब 10 लाख रुपये की ठगी

सख्ती से निपटेंगे: 'डिजिटल अरेस्ट' मामलों में 3000 करोड़ रुपये से अधिक उगाही पर न्यायालय

नयी दिल्ली. स्वयं को आतंकवाद रोधी दस्ते (एटीएस) का प्रमुख बताकर एक व्यक्ति ने दिल्ली के 32 वर्षीय एक व्यक्ति पर पुलवामा आतंकवादी हमले में शामिल होने का आरोप लगाकर उससे कथित तौर पर नौ लाख रुपये से अधिक की ठगी कर ली. यह जानकारी पुलिस ने सोमवार को दी.

चौदह अक्टूबर को एक मामला दर्ज किया गया, जब करोल बाग निवासी शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि 13 अगस्त को उन्हें कई अज्ञात नंबर से कॉल आयीं और कॉल करने वालों ने उस पर 2019 के पुलवामा आतंकी हमले में शामिल होने का झूठा आरोप लगाया. पुलिस ने प्राथमिकी का हवाला देते हुए बताया कि आरोपियों ने दावा किया कि कश्मीर में पीड़िता के नाम से खोले गए बैंक खाते में 50 लाख रुपये जमा कराए गए हैं.

पुलिस ने कहा, ”मेरे मोबाइल नंबर पर तीन अलग-अलग नंबरों से फोन आए, जिनमें कॉल करने वालों ने मुझ पर कश्मीर में पुलवामा हमले में शामिल होने का झूठा आरोप लगाया और कहा कि कश्मीर में मेरे नाम से खोले गए बैंक खाते में 50 लाख रुपये जमा किए गए हैं.” प्राथमिकी में कहा गया है कि कॉल करने वालों ने पीड़ित को यह कहते हुए मामले को गुप्त रखने की चेतावनी दी कि यह अकाउंट उसके पहचान पत्र से जुड़ा है और इसमें ‘प्रभावशाली लोग’ शामिल हैं.

इसमें कहा गया है कि इसके बाद, कॉल करने वालों ने कथित तौर पर उसे अपना कैमरा चालू करने, अपना कमरा बंद करने और अपने परिवार के सदस्यों को सूचित नहीं करने को कहा. प्राथमिकी में कहा गया है कि उन्होंने उससे “पूछताछ” की, उसके बैंक खातों का विवरण एकत्र किया और उसे एक अन्य व्यक्ति से जोड़ा जिसने खुद को आतंकवाद रोधी दस्ते (एटीएस) का प्रमुख बताया. शिकायतकर्ता ने कहा कि आरोपियों ने उसे जांच में शामिल होने के लिए लखनऊ कार्यालय आने का निर्देश दिया, लेकिन उसने अनिच्छा व्यक्त की.

प्राथमिकी के अनुसार पीड़ित को कथित तौर पर “निधि वैधीकरण” के लिए धनराशि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा कथित रूप से अनुमोदित एक खाते में स्थानांतरित करने के लिए कहा गया. प्राथमिकी के अनुसार, धमकियों से घबराकर, शिकायतकर्ता ने अपने बैंक खाते से आरटीजीएस के माध्यम से 8.9 लाख रुपये और ऑनलाइन भुगतान एप्लिकेशन के माध्यम से एक यूपीआई आईडी पर 77,000 रुपये भेज दिए.

पुलिस ने बताया कि बाद में, आरोपियों ने उक्त व्यक्ति को एक जाली जमानत याचिका भेजी, जिसमें उसकी “रिहायी” के लिए चार लाख रुपये और मांगे गए. पुलिस ने बताया कि जब व्यक्ति ने और पैसे देने से इनकार कर दिया, तो कॉल करने वालों ने फोन काट दिए और स्विच ऑफ कर दिए.

शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया, ”इन अज्ञात व्यक्तियों की धोखाधड़ी की वजह से मुझे कुल 9,67,000 रुपये का नुकसान हुआ है और मानसिक प्रताड़ना भी सहनी पड़ी है.” पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 14 अक्टूबर को भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) (धोखाधड़ी) के तहत एक मामला दर्ज किया गया है और आरोपियों का पता लगाने और ठगी गई रकम की वसूली के प्रयास जारी हैं.

इससे पहले, लगभग इसी तरह से, दक्षिण दिल्ली के 78 वर्षीय एक सेवानिवृत्त बैंकर ने 4 अगस्त से 4 सितंबर के बीच एक ‘डिजिटल अरेस्ट’ धोखाधड़ी में लगभग 23 करोड़ रुपये गंवा दिए थे. आरोपियों ने उन पर पुलवामा आतंकी हमले के लिए धन मुहैया कराने में शामिल होने का आरोप लगाते हुए उन्हें धमकी दी थी. चौदह फरवरी, 2019 को जम्मू कश्मीर के पुलवामा में एक आतंकी हमला हुआ था, जब विस्फोटकों से लदे एक वाहन ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) जवानों के काफिले को टक्कर मार दी. इस विस्फोट में कम से कम 40 जवान शहीद हो गए. हमलावर की पहचान पाकिस्तान स्थित आतंकी समूह जैश-ए-मोहम्मद के सदस्य आदिल अहमद डार के रूप में हुई.

सख्ती से निपटेंगे: ‘डिजिटल अरेस्ट’ मामलों में 3000 करोड़ रुपये से अधिक उगाही पर न्यायालय

उच्चतम न्यायालय ने देश में ‘डिजिटल अरेस्ट’ से जुड़े मामलों में भारी वृद्धि पर सोमवार को आश्चर्य जताया और कहा कि इनसे सख्ती से निपटे जाने की जरूरत है. ‘डिजिटल अरेस्ट’ तेजी से ब­ढ़ता साइबर अपराध है, जिसमें जालसाज ऑडियो या वीडियो कॉल पर खुद को कानून प्रवर्तन एजेंसियों, अदालत या सरकारी विभागों के कर्मचारी के रूप में पेश करके पीड़ितों को डराते-धमकाते हैं और उन पर रुपये देने का दबाव बनाते हैं. देश में ‘डिजिटल अरेस्ट’ से जुड़े मामलों में वरिष्ठ नागरिकों सहित पीड़ितों से अब तक 3,000 करोड़ रुपये से अधिक की उगाही किए जाने का अनुमान है.

न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने मामले में न्यायालय की मदद के लिए एक न्यायमित्र नियुक्त किया तथा गृह मंत्रालय और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से सीलबंद लिफाफों में पेश दो रिपोर्ट का अवलोकन किया.

पीठ ने कहा, ह्लयह चौंकाने वाली बात है कि देशभर में वरिष्ठ नागरिकों सहित पीड़ितों से 3,000 करोड़ रुपये से अधिक की उगाही की जा चुकी है. अगर हम कड़े और कठोर आदेश पारित नहीं करते हैं, तो यह समस्या और ब­ढ़ जाएगी.ह्व उसने कहा, ह्लहमें न्यायिक आदेशों के जरिये अपनी एजेंसियों के हाथ मजबूत करने होंगे. हम इन अपराधों से सख्ती से निपटने के लिए प्रतिबद्ध हैं.ह्व शीर्ष अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 10 नवंबर की तारीख तय की. उसने कहा कि अगली सुवनाई पर वह न्यायमित्र के सुझावों के आधार पर कुछ निर्देश पारित करेगी.

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि सीबीआई ने बताया है कि अपराध सिंडिकेट का संचालन विदेश से किया जा रहा है, जहां उनके वित्तीय, तकनीकी और मानव श्रम आधार वाले ह्लव्यापक घोटाला नेटवर्कह्व हैं. केंद्र और सीबीआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि गृह मंत्रालय का साइबर अपराध प्रभाग इन मुद्दों से निपट रहा है.

सर्वोच्च न्यायालय ने हरियाणा के अंबाला में रहने वाली एक बुजुर्ग महिला की ओर से प्रधान न्यायाधीश बीआर गवई को लिखे पत्र का संज्ञान लिया है, जिसमें महिला ने शिकायत की है कि जालसाजों ने अदालत और जांच एजेंसियों के जाली आदेशों के आधार पर उसे और उसके पति को ‘डिजिटल अरेस्ट’ किया तथा सितंबर में उनसे 1.05 करोड़ रुपये की उगाही की.

महिला ने पत्र में लिखा है कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ के दौरान जालसाजों ने सीबीआई, ईडी और न्यायिक अधिकारी बनकर कई ऑडियो, वीडियो कॉल किए तथा उसकी और उसके पति की गिरफ्तारी के आदेश संबंधी कथित अदालती फैसले दिखाए. शीर्ष अदालत को बताया गया कि वारदात के सिलसिले में अंबाला स्थित साइबर अपराध विभाग में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के विभिन्न प्रावधानों के तहत दो प्राथमिकी दर्ज की गई हैं.

न्यायालय ने 27 अक्टूबर को कहा था कि वह ‘डिजिटल अरेस्ट’ से जुड़े मामलों की व्यापकता और देश भर में इनकी ब­ढ़ती संख्या को देखते हुए इनकी जांच सीबीआई को सौंपने का इच्छुक है. उसने विभिन्न राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों में ‘डिजिटल अरेस्ट’ से जुड़ी वारदातों के सिलसिले में दर्ज प्राथमिकी का विवरण मांगा था. शीर्ष अदालत ने कहा है कि वह सीबीआई जांच की प्रगति की निगरानी करेगी और इन अपराधों से निपटने के लिए जो भी आवश्यक होगा, निर्देश जारी करेगी. उसने सीबीआई से पूछा था कि क्या उसे ‘डिजिटल अरेस्ट’ से जुड़े मामलों की जांच के लिए पुलिस बल से बाहर के साइबर विशेषज्ञों सहित अधिक संसाधनों की जरूरत है.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button