मानस विवाद: विहिप की सपा, राजद की मान्यता रद्द करने की मांग, सीईसी से मिलने का समय मांगा

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Thu, 02 Feb 2023 06:55 PM
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नयी दिल्ली. विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने बृहस्पतिवार को कहा कि निर्वाचन आयोग को सपा और राजद की मान्यता रद्द कर देनी चाहिए क्योंकि उन्होंने रामचरितमानस पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले नेताओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं करके उन ”बुनियादी शर्तों” का उल्लंघन किया है जिनके तहत उन्हें राजनीतिक दलों के रूप में पंजीकृत किया गया था.

संगठन ने एक बयान में कहा कि विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने इस मुद्दे पर ध्यान आर्किषत करने और समाजवादी पार्टी (सपा) तथा राष्ट्रीय जनता दल (राजद) का पंजीकरण रद्द करने का आग्रह करने के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) राजीव कुमार से मिलने का समय मांगा है.

कुमार ने आरोप लगाया, “रामचरित मानस का अपमान करने के सपा के स्वामी प्रसाद मौर्य के हाल के बयान और इसके पन्नों को जलाया जाना भारत के नागरिकों के एक बड़े वर्ग की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का जानबूझकर किया गया दुर्भावनापूर्ण कृत्य है.” उन्होंने दावा किया कि तथ्य यह है कि मौर्य को उनकी टिप्पणी के तुरंत बाद सपा द्वारा महासचिव के पद पर पदोन्नत किया गया जो यह साबित करता है कि उनके बयान को उनकी पार्टी का समर्थन प्राप्त है.

कुमार ने बयान में आरोप लगाया, “इसी तरह, राजद नेता चंद्रशेखर ने भी रामचरितमानस और अन्य पवित्र पुस्तकों की जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण आलोचना की, जिससे कि हिंदू समाज में आक्रोश पैदा हो, अविश्वास पैदा हो और विभाजन हो.” उन्होंने दावा किया कि राजद ने चंद्रशेखर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है जो यह साबित करता है कि उनके बयान को पार्टी का समर्थन प्राप्त है.

कुमार ने कहा, “सपा और राजद दोनों ने उन बुनियादी शर्तों का उल्लंघन किया है, जिन पर दलों का पंजीकरण किया गया था और यह उनका पंजीकरण वापस लेने का उचित मामला बनता है.” उन्होंने कहा, “विहिप जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29ए की ओर सीईसी का ध्यान आर्किषत करना चाहती है.”

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