मणिपुर: 21 विधायकों ने प्रधानमंत्री मोदी, शाह को पत्र लिखकर ‘चुनी हुई सरकार’ बहाल करने का किया आग्रह

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Wed, 30 Apr 2025 07:42 PM
मणिपुर: 21 विधायकों ने प्रधानमंत्री मोदी, शाह को पत्र लिखकर ‘चुनी हुई सरकार’ बहाल करने का किया आग्रह
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इंफाल. मणिपुर के 21 विधायकों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर उनसे राज्य में शांति और सामान्य स्थिति सुनिश्चित करने के लिए ”चुनी हुई सरकार” बहाल करने का आग्रह किया है. मणिपुर में फिलहाल राष्ट्रपति शासन लागू है.

केंद्र ने 13 फरवरी को मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लगा दिया था, जहां मई 2023 से मेइती और कुकी-जो समूहों के बीच जातीय हिंसा में 250 से अधिक लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं. मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के इस्तीफा देने के बाद राष्ट्रपति शासन लागू किया गया. राज्य विधानसभा का कार्यकाल 2027 तक है, जिसे निलंबित कर दिया गया है. प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृहमंत्री को अलग-अलग लिखे गए इन पत्रों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के 13 विधायकों, नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) और नगा पीपुल्स फ्रंट के तीन-तीन विधायकों और दो निर्दलीय विधायकों ने हस्ताक्षर किये हैं.

इसमें कहा गया है, ”मणिपुर के लोगों ने राष्ट्रपति शासन का स्वागत किया है…बहुत उम्मीद और अपेक्षा के साथ. हालांकि, तीन महीने होने जा रहे हैं, लेकिन अभी तक शांति और सामान्य स्थिति लाने के लिए कोई स्पष्ट कार्रवाई नहीं देखी गई है.” इस पत्र में कहा गया है, ”लोगों में इस बात की प्रबल आशंका है कि राज्य में फिर से हिंसा हो सकती है. कई नागरिक संगठन राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के खिलाफ खुलकर सामने आ गए हैं और एक लोकप्रिय सरकार की स्थापना की मांग कर रहे हैं.” विधायकों ने 10 अप्रैल को लिखे पत्र में कहा, ”इन संगठनों ने सार्वजनिक रैलियां, नुक्कड़ सभाएं आयोजित करना, आम जनता को भड़काना, सत्तारूढ़ विधायकों पर लोकप्रिय सरकार बनाने का दावा न करने का आरोप लगाना तथा राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने के लिए जिम्मेदारी तय करना शुरू कर दिया है.” एक विधायक ने बताया कि ये पत्र प्रधानमंत्री कार्यालय और गृह मंत्रालय को 29 अप्रैल को अलग-अलग प्राप्त हुए और बुधवार को इन्हें सार्वजनिक किया गया.

विधायकों ने यह भी कहा, ”हमारा मानना है कि मणिपुर में शांति और सामान्य स्थिति लाने के लिए चुनी हुई सरकार का गठन ही एकमात्र साधन है.” विधायकों ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से अनुरोध किया कि वे ”मणिपुर के लोगों के हित में जल्द से जल्द एक चुनी हुई सरकार स्थापित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं.” उन्होंने कहा, ”हम आपको आश्वासन देते हैं कि हम चुनी हुई सरकार की स्थापना के बाद शांति और सामान्य स्थिति लाने के लिए पूरी लगन और निष्ठा के साथ काम करेंगे.” हालांकि, मणिपुर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के. मेघचंद्र सिंह ने राज्यपाल को नजरअंदाज कर केंद्र को पत्र लिखने के लिए 21 विधायकों की आलोचना की.
उन्होंने आरोप लगाया कि इन विधायकों ने राज्य में सरकार बनाने के प्रयास में संवैधानिक तरीके को दरकिनार कर दिया, जहां वर्तमान में राष्ट्रपति शासन है.

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी पोस्ट में कहा, ”इन विधायकों को नयी सरकार के गठन का दावा करने के लिए इंफाल में राजभवन जाना चाहिए था, लेकिन उन्होंने मणिपुर के राज्यपाल को पत्र लिखने के बजाय प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र लिखने का विकल्प चुना. राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा हुआ है. उनके कार्यों से पता चलता है कि वे मणिपुर में नयी सरकार के गठन का दावा करने के लिए राज्यपाल से मिलने के प्रति गंभीर नहीं हैं.”

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