
इंफाल. मणिपुर में नेतृत्व परिवर्तन की मांग को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रदेश इकाई में जारी खींचतान के बीच मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने रविवार को यहां राजभवन में राज्यपाल अजय कुमार भल्ला को अपना इस्तीफा सौंप दिया. राज्यपाल ने सिंह के साथ-साथ उनकी मंत्रिपरिषद का इस्तीफा भी स्वीकार कर लिया तथा अनुरोध किया कि वैकल्पिक व्यवस्था होने तक वह पद पर बने रहें. यह घटनाक्रम उनके दिल्ली से लौटने के कुछ ही घंटों बाद हुआ है.
विपक्ष लंबे समय से उनके इस्तीफे की मांग कर रहा था. कांग्रेस ने मणिपुर के मुख्यमंत्री पद से सिंह के इस्तीफे को ”देर से उठाया गया कदम” बताते हुए कहा कि राज्य के लोगों को अब ”लगातार विदेशी दौरों पर रहने वाले हमारे प्रधानमंत्री” नरेन्द्र मोदी के आने का इंतजार हैं. इस सप्ताह की शुरुआत में, एक नया विवाद तब खड़ा हो गया था जब उच्चतम न्यायालय ने जातीय हिंसा में सिंह की भूमिका का आरोप लगाने वाली लीक हुई ऑडियो क्लिप की प्रामाणिकता को लेकर एक सीलबंद फोरेंसिक रिपोर्ट मांगी थी.
सिंह ने राज्यपाल को लिखे अपने पत्र में कहा, ”अब तक मणिपुर के लोगों की सेवा करना मेरे लिए सम्मान की बात रही है. मैं प्रत्येक मणिपुरी के हितों की रक्षा के लिए समय पर की गई कार्रवाई, विकास कार्यों और विभिन्न परियोजनाओं के कार्यान्वयन के लिए केंद्र सरकार का बहुत आभारी हूं.” पत्र में कहा गया है, ”आपके कार्यालय के माध्यम से केंद्र सरकार से मेरा विनम्र अनुरोध है कि इसे जारी रखा जाए. मैं इस अवसर पर उनमें से सबसे महत्वपूर्ण कार्यों को गिनाना चाहता हूं… मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखना, जिसका हजारों वर्षों से समृद्ध और विविध सभ्यतागत इतिहास रहा है.” उन्होंने केंद्र से सीमा पर घुसपैठ को लेकर कार्रवाई जारी रखने और अवैध प्रवासियों के निर्वासन और मादक पदार्थों के खिलाफ लड़ाई के लिए नीति तैयार करने का भी अनुरोध किया.
सिंह ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह ”मुक्त आवागमन व्यवस्था(एफएमआर) की पूर्ण सुरक्षित संशोधित प्रणाली को जारी रखे, जिसमें बायोमेट्रिक प्रणाली को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए और सीमा पर त्वरित गति से निगरानी की जाए.” सिंह ने शनिवार को मुख्यमंत्री सचिवालय में भाजपा नीत सत्तारूढ़ गठबंधन के विधायकों के साथ बैठक की थी. यह बैठक विपक्षी दल कांग्रेस द्वारा 10 फरवरी से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र के दौरान सिंह के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की मांग के मद्देनजर आयोजित की गई थी.
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि भाजपा नया मुख्यमंत्री नियुक्त करेगी या नहीं. भाजपा के शीर्ष नेता संबित पात्रा मणिपुर में डेरा डाले हुए हैं.
दूसरी ओर भाजपा सूत्रों ने उम्मीद जताई कि उनके इस्तीफे से राज्य के दो मुख्य जातीय समुदायों के बीच शांति स्थापित करने के लिए केंद्र द्वारा किए जा रहे प्रयासों को बल मिलेगा. पूर्व गृह सचिव अजय भल्ला को पिछले दिसंबर में राज्य का राज्यपाल नियुक्त किया गया था, जिसका स्पष्ट उद्देश्य राज्य में शांति और सुरक्षा उपायों में तेजी लाना था. सूत्रों ने कहा कि सिंह के इस्तीफे से इस प्रक्रिया में मदद मिलेगी.
एक सूत्र ने बताया कि सिंह भाजपा विधायकों के बीच भी समर्थन खो रहे हैं, जिनमें से कई ने दिल्ली में पार्टी नेताओं से मुलाकात कर उनके पद पर बने रहने पर अपनी नाखुशी जाहिर की थी. राज्य विधानसभा का सत्र 10 फरवरी से शुरू होने वाला है और इस बात को लेकर चिंता थी कि कुछ पार्टी विधायक अपने ही नेतृत्व को निशाना बनाकर सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकते हैं.
इस बीच, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ए. शारदा ने कहा, ”हमें अभी पार्टी से निर्देश मिलने बाकी हैं.” उन्होंने कहा कि सिंह ने राज्य के विकास और अखंडता के लिए अथक काम किया है. उन्होंने कहा, ”वह तीन मई, 2023 को जातीय हिंसा भड़कने के बाद से राज्य में शांति लाने की कोशिश कर रहे हैं. भाजपा राज्य की अखंडता के लिए कड़ी मेहनत करती रहेगी.” उच्चतम न्यायालय ने मणिपुर में जातीय हिंसा में सिंह की भूमिका का आरोप लगाने वाली एक लीक ऑडियो क्लिप की प्रामाणिकता को लेकर तीन फरवरी को सीलबंद लिफाफे में फॉरेंसिक रिपोर्ट मांगी थी.
प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने ‘कुकी ऑर्गनाइजेशन फॉर ‘ूमन राइट्स ट्रस्ट’ (कोहूर) की याचिका पर केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) से छह सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी थी और सुनवाई 24 मार्च के लिए स्थगित कर दी थी. कोहूर की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने जातीय हिंसा में मुख्यमंत्री की कथित भूमिका की अदालत की निगरानी में विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच कराए जाने का अनुरोध किया था.
भूषण ने लीक ऑडियो क्लिप की सामग्री को ”बहुत गंभीर मामला” बताया था और कहा था कि क्लिप में मुख्यमंत्री कथित तौर पर कह रहे थे कि मेइती समूहों को राज्य सरकार के हथियार और गोला-बारूद लूटने की अनुमति दी गई थी. मई 2023 में राज्य में जातीय हिंसा भड़कने के बाद से 250 से अधिक लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं.



