मोदी सरकार ने स्मारकों की सुरक्षा के लिए बने कानून को ‘कमजोर’ करने का प्रयास किया : कांग्रेस

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Sun, 29 Oct 2023 08:02 PM
मोदी सरकार ने स्मारकों की सुरक्षा के लिए बने कानून को ‘कमजोर’ करने का प्रयास किया : कांग्रेस
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नयी दिल्ली. कांग्रेस ने रविवार को दावा किया कि केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने स्मारकों और पुरातात्विक स्थलों की सुरक्षा के लिए बने 2010 के कानून को ”कमजोर” करने की कोशिश की है और कांग्रेस ने अन्य विपक्षी दलों के साथ मिलकर इसका विरोध किया है. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक मीडिया रिपोर्ट साझा की, जिसमें बिहार की राजधानी पटना स्थित जिस जगह पर संभवत: सम्राट अशोक का महल था उस क्षेत्र के संरक्षण और उसके आसपास के इलाकों के विकास के लिए राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (एनएमए) ने विरासत उपनियमों का मसौदा जारी किया है. रमेश ने इसे सराहनीय कदम करार दिया.

रमेश ने अपनी पोस्ट में कहा, ”मार्च 2010 में संसद द्वारा प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष (संशोधन और मान्यता) अधिनियम पारित करने के तुरंत बाद एनएमए की स्थापना की गई थी.” उन्होंने कहा, ”खतरे में पड़ी हमारी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए यह एक बड़ा कदम था.” कांग्रेस नेता ने बताया कि एनएमए ने अब तक संसद के दोनों सदनों में 34 केंद्रीय संरक्षित स्मारकों को शामिल करते हुए कुल आठ विरासत उपनियम पेश किए हैं.

रमेश ने कहा, ”पटना के कुम्हरार क्षेत्र में अशोक के समय के प्रसिद्ध 80 स्तंभ वाले हॉल और अन्य संरचनाओं के लिए विरासत उपनियमों का मसौदा अब सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया गया है. यह बहुत अच्छी खबर है.” उन्होंने दावा किया, ”लेकिन, यह कहने की जरूरत है कि मोदी सरकार ने 2010 के अधिनियम को कमजोर करने की कोशिश की है. यह कांग्रेस और अन्य दलों का दृढ़ प्रतिरोध है, जिसने अब तक ऐसा होने से रोका है.”

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