
रफह/द हेग. गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि इजराइल-हमास युद्ध शुरू होने के बाद से क्षेत्र में 29 हजार से अधिक फलस्तीनी मारे जा चुके हैं. इस बीच, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू ने हमास के नेताओं की मेजबानी करने के लिए कतर की आलोचना की है.
हमास के शासन वाले गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि बीते 24 घंटे में 107 शव अस्पतालों में लाये गए हैं, जिसके बाद युद्ध शुरू होने से अब तक मरने वालों की कुल संख्या 29,092 हो गई है. मंत्रालय ने यह नहीं बताया कि कितने आम लोग और कितने लड़ाके मारे गए हैं. हालांकि उसने बताया कि मारे गए लोगों में अधिकतर महिलाएं और बच्चे शामिल हैं. मंत्रालय ने कहा कि 69 हजार से अधिक फलस्तीनी घायल हुए हैं.
सात अक्टूबर को हमास के चरमपंथियों ने दक्षिण इजराइल पर हमला कर दिया था, जिसमें 1,200 के आसपास लोग मारे गए थे, जबकि करीब 250 लोग बंधक बना लिये गए थे. हमास के हमले के बाद इजराइल ने गाजा के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया था. नवंबर में हुए एक सप्ताह के संघर्ष विराम के दौरान हमास ने 100 से अधिक बंधकों को रिहा किया था, जिसके बदले इजराइल ने 240 फलस्तीनियों को छोड़ा था. एक सौ तीस बंधक अब भी चरमपंथियों के कब्जे में है, जिनमें एक चौथाई की मौत होने की आशंका है.
रविवार को सेवानिवृत्त जनरल और नेतन्याहू के तीन-सदस्यीय युद्ध मंत्रिमंडल के सदस्य बेनी गैंट्ज ने चेतावनी दी कि यदि मुसलमानों के पवित्र महीने रमजान की शुरुआत तक बंधकों को मुक्त नहीं किया गया, तो रफह में भी हमले किए जा सकते हैं. रमजान का महीना 10 मार्च के आसपास शुरू होने की उम्मीद है.
इजराइल के मुखर समर्थक अमेरिका ने कहा है कि वह मध्यस्थों- मिस्र और कतर के साथ मिलकर एक और संघर्ष विराम तथा बंधकों को छुड़ाने के लिए समझौता कराने का प्रयास कर रहा है. हालांकि हाल के दिनों में इन प्रयासों पर विराम लगा हुआ प्रतीत हो रहा है और नेतन्याहू ने हमास के नेताओं की मेजबानी करने के लिए कतर के प्रति नाराजगी जताते हुए उससे चरमपंथी समूह पर दबाव बनाने की अपील की है.
हमास ने कहा है कि वह शेष सभी बंधकों को तब तक रिहा नहीं करेगा जब तक कि इजराइल युद्ध समाप्त नहीं कर देता और उसके सैनिक गाजा से नहीं चले जाते. हमास शीर्ष चरमपंथियों समेत सैकड़ों फलस्तीनी कैदियों की रिहाई की भी मांग कर रहा है. नेतन्याहू ने इन मांगों को खारिज कर दिया है. उन्होंने रविवार को अमेरिकी यहूदी नेताओं के समक्ष अपने भाषण में कहा कि पिछले साल हुए संघर्ष विराम और बंधकों की रिहाई को लेकर वार्ता करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कतर पर दबाव बनाया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा, “हमास पर कतर जितना दबाव कोई नहीं डाल सकता. उन्होंने हमास के नेताओं की मेजबानी की है. हमास आर्थिक रूप से उनपर निर्भर है. मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि आप कतर से हमास पर दबाव बनाने के लिए कहें, क्योंकि हम चाहते हैं कि हमारे बंधक रिहा हों.” कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने नेतान्याहू के बयान को खारिज करते हुए इसे अपने मकसद से युद्ध को रोकने और फिर लंबा खींचने का एक नया प्रयास बताया.
कतर ने हमास को आर्थिक मदद पहुंचाने का आरोपों को भी खारिज कर दिया और कहा कि उसने हाल के वर्षों में इजराइल अमेरिका और अन्य पक्षों के सहयोग से गाजा को मदद पहुंचाई है. अल-अंसारी ने कहा, “इजराइल के प्रधानमंत्री अच्छी तरह जानते हैं कि कतर पहले दिन से मध्यस्थता के प्रयासों, संकट के अंत और बंधकों की रिहाई को लेकर प्रतिबद्ध रहा है.”
फलस्तीन के लिए मांगी गयी भूमि पर इजराइली कब्जे के खिलाफ आईसीजे में सुनवाई शुरू
फलस्तीन के लिए मांगी गई भूमि पर इजराइल के 57 साल पुराने कब्जे की वैधता पर संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष अदालत में सोमवार को सुनवाई शुरू हुई. अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) के समक्ष यह सुनवाई छह दिनों तक चलेगी. सोमवार की सुबह फलस्तीन के विदेश मंत्री रियाद अल-मलिकी की ओर से प्रस्तुति दी गयी. यह सुनवाई इजराइल के कब्जे वाले क्षेत्रों में उसकी नीतियों पर एक गैर-बाध्यकारी सलाह के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा अनुरोध किये जाने के बाद शुरू हुई है.
इजराइल-हमास में जारी युद्ध के बीच अदालत के ‘ग्रेट हॉल ऑफ जस्टिस’ में मामले की सुनवाई शुरू हुई. अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में हो रही सुनवाई इजराइल के कब्जे वाले वेस्ट बैंक, गाजा पट्टी और पूर्वी यरुशलम पर इसके नियंत्रण पर केंद्रित है. फलस्तीन की कानूनी टीम संभवत: अंतरराष्ट्रीय न्यायाधीशों की पीठ को बताएगी कि इजराइल ने बड़े पैमाने पर कब्जे वाली भूमि पर पूर्ण नियंत्रण हासिल करके अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन किया है.
फलस्तीनी विदेश मंत्रालय में संयुक्त राष्ट्र संबंधी विभाग के प्रमुख उमर अब्दुल्ला ने कहा, ”हम (इस मामले में) अदालत से कुछ नया सुनना चाहते हैं.” सोमवार को फलस्तीनी पक्ष के अदालत के समक्ष अपनी दलीलें रखने के बाद, अभूतपूर्व रूप से 51 देश और तीन अंतरराष्ट्रीय संगठन अपनी बात रखेंगे. अदालत को अपनी राय जारी करने में कई महीने लगने की संभावना है.
सुनवाई के दौरान इजराइल एक लिखित बयान प्रस्तुत कर सकता है. वर्ष 1967 के युद्ध में इजराइल ने वेस्ट बैंक, पूर्वी यरुशलम और गाजा पट्टी पर कब्जा कर लिया. फलस्तीनी सभी तीन क्षेत्रों को मिलाकर एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में चाहते हैं. वहीं, इजराइल वेस्ट बैंक को विवादित क्षेत्र मानता है, जिसका भविष्य बातचीत से तय किया जाना चाहिए.



