वाहन का उपयोग ‘सार्वजनिक स्थान’ पर ना होने पर मोटर वाहन कर नहीं लगाया जाना चाहिए: न्यायालय

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Sun, 31 Aug 2025 09:06 PM
वाहन का उपयोग ‘सार्वजनिक स्थान’ पर ना होने पर मोटर वाहन कर नहीं लगाया जाना चाहिए: न्यायालय
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नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि मोटर वाहन कर की प्रकृति प्रतिपूरक है और अगर किसी वाहन का उपयोग नहीं किया जाता है या ‘सार्वजनिक स्थान’ पर इसका इस्तेमाल नहीं हो रहा है, तो उसके मालिक पर मोटर वाहन कर का बोझ नहीं डाला जाना चाहिए. न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय के दिसंबर 2024 के फैसले को चुनौती देने वाली अपील पर अपना फैसला सुनाया.

न्यायालय ने कहा, ”मोटर वाहन कर की प्रकृति प्रतिपूरक है. इसका उपयोग से सीधा संबंध है. मोटर वाहन कर लगाने का तर्क यह है कि जो व्यक्ति सार्वजनिक अवसंरचना, जैसे सड़क, राजमार्ग आदि का उपयोग कर रहा है, उसे ऐसे उपयोग के लिए भुगतान करना होगा.” आंध्र प्रदेश मोटर वाहन कराधान अधिनियम, 1963 की धारा 3 का हवाला देते हुए पीठ ने कहा कि विधायिका ने इस प्रावधान में जानबूझकर ‘सार्वजनिक स्थान’ शब्द का उपयोग किया है. अधिनियम की धारा 3 मोटर वाहनों पर कर लगाने से संबंधित है.

शीर्ष अदालत ने 29 अगस्त को दिए अपने फैसले में कहा, “यदि किसी मोटर वाहन का उपयोग ‘सार्वजनिक स्थान’ पर नहीं किया जाता है तो संबंधित व्यक्ति को सार्वजनिक बुनियादी ढांचे से लाभ नहीं मिल रहा है; इसलिए उस पर ऐसी अवधि के लिए मोटर वाहन कर का बोझ नहीं डाला जाना चाहिए.” शीर्ष अदालत ने कहा कि इस मामले में अपीलकर्ता कंपनी के मोटर वाहन राष्ट्रीय इस्पात निगम लिमिटेड (आरआईएनएल) परिसर के अंदर उपयोग के लिए सीमित थे, जो एक बंद क्षेत्र है, ऐसे में वाहनों को ‘सार्वजनिक स्थान’ पर इस्तेमाल किए जाने का सवाल ही नहीं उठता.

उच्चतम न्यायालय 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की बिक्री से संबंधित याचिका पर एक सितंबर को सुनवाई करेगा

उच्चतम न्यायालय सोमवार को उस याचिका पर सुनवाई करेगा जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी-20) को देश भर में लागू करने को चुनौती दी गई है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि लाखों वाहन मालिकों को ऐसा ईंधन इस्तेमाल करने के लिए मजबूर किया जा रहा है जो उनके वाहनों के अनुरूप नहीं है.

यह जनहित याचिका प्रधान न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष एक सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है.
अधिवक्ता अक्षय मल्होत्रा द्वारा दायर याचिका में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि सभी पेट्रोल पंपों पर इथेनॉल मुक्त पेट्रोल उपलब्ध कराया जाए.

इसमें यह भी अनुरोध किया गया है कि सभी पेट्रोल पंपों और वितरण इकाइयों पर अनिवार्य रूप से इथेनॉल की मात्रा को दिखाने वाला लेबल लगाया जाए ताकि उपभोक्ताओं को साफ-साफ पता चले. साथ ही, यह सुनिश्चित किया जाए कि ईंधन भरते समय उपभोक्ताओं को उनके वाहनों की इथेनॉल अनुकूलता के बारे में सूचित किया जाए.

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