
कोच्चि. प्रोफेसर टी जे जोसेफ का दाहिना हाथ 2010 में प्रतिबंधित इस्लामिक संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के कथित कार्यकर्ताओं द्वारा काट दिया गया था लेकिन वह अपने हमलावरों के प्रति कोई दुर्भावना नहीं रखते, जिनके कृत्यों के चलते उनकी हथेली अब सही तरीके से काम नहीं कर पाती.
उन्होंने कहा कि लेकिन इस घटना का उनके जीवन पर प्रभाव पड़ा है. उन्होंने बताया कि हमले के थोड़े दिन बाद ही उनकी नौकरी चली गई, जिसके परिणामस्वरूप उनकी पत्नी ने आत्महत्या कर ली. राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की एक विशेष अदालत ने मामले की सुनवाई के दूसरे चरण के तहत 2010 में पीएफआई के कथित सदस्यों द्वारा हाथ काटे जाने के इस सनसनीखेज मामले में बुधवार को छह लोगों को दोषी ठहराया है. अदालत ने पांच अन्य को बरी कर दिया.
जोसेफ का मानना है कि 13 साल पहले जो भी हुआ, उससे उनकी जिंदगी बर्बाद नहीं हुई लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि कुछ बदलाव जरूर आए हैं और उन्हें कुछ नुकसान से भी जूझना पड़ा. अदालत के फैसले के बाद उन्होंने संवाददाताओं को बताया, ”किसी भी लड़ाई में नुकसान तो होता ही है. फिर चाहे वह जीतने वाला ही क्यों न हों, मेरी तरह. लेकिन मैं लड़ता रहूंगा.” सुनवाई के पहले चरण में 13 लोगों को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के साथ-साथ विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और भारतीय दंड सहिंता (आईपीसी) के तहत दोषी करार दिया गया था.
जोसेफ ने कहा कि उन्हें फैसले से कोई फर्क नहीं पड़ा क्योंकि उन्होंने कभी नहीं माना कि किसी आरोपी को सजा देने का मतलब पीड़ित को न्याय दिलाना है. उन्होंने कहा, ”मेरे हिसाब से इसका मतलब सिर्फ इतना है कि देश का कानून लागू हो गया है. इसलिए, वास्तव में, चाहे उन्हें दोषी ठहराया जाए या बरी किया जाए, व्यक्तिगत रूप से मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है.” उन्होंने कहा कि जिन लोगों को पकड़ा गया और सजा दी गई ‘वे सिर्फ मोहरे’ हैं जबकि इस घटना के असली अपराधियों को ढूंढना अभी बाकी है.
उन्होंने कहा, ”यह उनके खिलाफ है इसलिए मेरी लड़ाई जारी रहेगी.” प्रोफेसर ने कहा कि उनकी (प्रोफेसर) तरह इस मामले में आरोपी भी पीड़ित ही हैं. हमले के मुख्य आरोपी सवाद (हाथ काटने वाला आरोपी) के अभी भी फरार होने की वजह से जान को खतरा होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उन्हें कोई डर नहीं है. उन्होंने कहा, ”मैं डरा हुआ नहीं हूं. मैं अपनी शर्तों पर अपनी जिंदगी जी रहा हूं और भविष्य में भी ऐसा करता रहूंगा. अगर कोई आरोपी पकड़ा नहीं गया है तो यह सिर्फ तंत्र की विफलता को दर्शाता है.” इडुक्की जिले के तोडुपुझा में न्यूमैन कॉलेज के प्रोफेसर टी. जे. जोसेफ के दाहिने हाथ को चार जुलाई 2010 को मौजूदा प्रतिबंधित इस्लामिक संगठन पीएफआई के कथित सदस्यों ने काट दिया था.
यह हमला उस वक्त किया गया था जब वह (प्रोफेसर) अपने परिवार के साथ एर्नाकुलम जिले के मूवाट्टुपुझा स्थित एक गिरजाघर से रविवार की प्रार्थना के बाद घर लौट रहे थे. सात लोगों के समूह ने प्रोफेसर जोसेफ का वाहन रोका, प्रोफेसर को बाहर खींचा और उनके साथ मारपीट कर उनका दाहिना हाथ काट दिया. घटना का मुख्य आरोपी सवाद अभी भी फरार है. मामले की शुरुआती जांच करने वाली पुलिस के मुताबिक, आरोपी न्यूमैन कॉलेज में बी.कॉम की सेमेस्टर परीक्षा के लिए प्रश्न पत्र में जोसेफ की कथित अपमानजनक धार्मिक टिप्पणियों को लेकर उनकी जान लेना चाहते थे. यह प्रश्न पत्र जोसेफ ने तैयार किया था.



