
नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता सी टी रवि ने बृहस्पतिवार को कहा कि अंग्रेजी की जगह हिंदी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं को प्रोत्साहित किये जाने में कुछ भी गलत नहीं है. उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार देश के विभिन्न हिस्सों में मातृ भाषा को भी बढ़ावा दे रही है.
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव रवि ने केंद्र सरकार द्वारा गैर हिंदी प्रदेशों पर हिंदी थोपने के केरल के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन की आलोचनाओं को भी खारिज किया. रवि कर्नाटक से ताल्लुक रखते हैं और वह भाजपा के तमिलनाडु प्रभारी भी हैं.
उन्होंने कहा कि अंग्रोजी को लेकर लोगों को अब इस ‘‘औपनिवेशिक मानसिकता’’ से बाहर निकलना चाहिए. विजयन ने मंगलवार को सभी तकनीकी और गैर-तकनीकी उच्च शिक्षण संस्थानों में हिंदी को पढ़ाई का माध्यम बनाने संबंधी एक संसदीय समिति की सिफारिश पर आपत्ति जताई थी और मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हस्तक्षेप की मांग की थी.
संबंधित संसदीय समिति ने हाल में सिफारिश की थी कि हिंदी भाषी राज्यों में तकनीकी और गैर-तकनीकी उच्च शिक्षा संस्थानों जैसे आईआईटी में पढ़ाई का माध्यम हिंदी और भारत के अन्य हिस्सों में उनकी संबंधित स्थानीय भाषा होनी चाहिए. इसमें कहा गया है कि अंग्रेजी के इस्तेमाल को वैकल्पिक बनाया जाना चाहिए.
विजयन ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि शिक्षा के उच्च केंद्रों में हिंदी को पढ़ाई की मुख्य भाषा के रूप में नहीं थोपा जा सकता, क्योंकि देश में कई भाषाएं हैं और किसी एक भाषा को देश की भाषा नहीं कहा जा सकता है. रवि ने कहा कि सिफारिश में अंग्रेजी की जगह हिंदी को प्रोत्साहित किए जाने की बात कही गई है ना कि मलयालम, तमिल, तेलुगु, कन्नड या मराठी जैसी क्षेत्रीय भाषाओं की जगह.
उन्होंने कहा कि यदि कोई नेता ‘‘मलयालम या तमिल भाषा के सम्मान’’ में कुछ लिखता है तो भाजपा उसका समर्थन करेगी, लेकिन वह अंग्रजी का हिमायती बनेगा तो ये उचित नहीं है. रवि ने कहा कि महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू जैसे नेताओं ने भी हिंदी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने पर जोर दिया था.



