उपराष्ट्रपति धनखड़ को हटाने के लिए प्रस्ताव पेश करने का नोटिस बेहद अफसोसजनक : रीजीजू

Author: Yogesh Kumar Sahu
UPDATED: Tue, 10 Dec 2024 07:47 PM
उपराष्ट्रपति धनखड़ को हटाने के लिए प्रस्ताव पेश करने का नोटिस बेहद अफसोसजनक : रीजीजू
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नयी दिल्ली. संसदीय कार्यमंत्री किरेन रीजीजू ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को हटाने के लिए विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ द्वारा मंगलवार को नोटिस सौंपने के कदम को ”बेहद अफसोसजनक” करार दिया. उन्होंने कहा कि सरकार को धनखड़ पर बहुत गर्व है.
रीजीजू ने यहां संवाददाताओं से कहा कि उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के पदेन सभापति बहुत पेशेवर और निष्पक्ष हैं.

पहली बार, विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (इंडियन डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस) के दलों ने मंगलवार को राज्यसभा में धनखड़ को हटाने के लिए प्रस्ताव लाने के लिए नोटिस पेश किया. विपक्षी दलों ने उन पर उच्च सदन के सभापति के तौर पर ”पक्षपातपूर्ण” आचरण करने का आरोप लगाया है. यदि प्रस्ताव पेश किया जाता है, तो इन दलों को इसे पारित कराने के लिए साधारण बहुमत की आवश्यकता होगी, लेकिन 243 सदस्यीय सदन में उनके पास अपेक्षित संख्या नहीं है.

विपक्षी सदस्यों ने हालांकि, इस बात पर जोर दिया कि यह ”संसदीय लोकतंत्र की रक्षा के लिए लड़ने का एक संदेश” है. विपक्ष की ओर से कांग्रेस नेता जयराम रमेश और नसीर हुसैन ने राज्यसभा महासचिव पी सी मोदी को नोटिस सौंपा. इस पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद), तृणमूल कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो), आम आदमी पार्टी (आप), द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) और समाजवादी पार्टी के सदस्यों सहित सहित 60 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं.

धनखड़ को हटाने संबंधी प्रस्ताव के नोटिस का कोई वैध आधार नहीं: भाजपा सांसद दिनेश शर्मा

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राज्यसभा सदस्य दिनेश शर्मा ने मंगलवार को आरोप लगाया कि विपक्षी दलों ने सदन की कार्यवाही बाधित करने के लिए उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को हटाने संबंधी प्रस्ताव का नोटिस दिया है और उन्होंने कहा कि ऐसे नोटिस का कोई वैध आधार नहीं है.

विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) के घटक दलों ने राज्यसभा के सभापति धनखड़ को पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने संबंधी नोटिस मंगलवार को राज्यसभा के महासचिव को सौंपा. विपक्ष का आरोप है कि धनखड़ द्वारा अत्यंत पक्षपातपूर्ण तरीके से राज्यसभा की कार्रवाई संचालित करने के कारण यह कदम उठाना पड़ा है. उपराष्ट्रपति, राज्यसभा के पदेन सभापति होते हैं.

विपक्ष के कदम के बारे में पूछे जाने पर शर्मा ने कहा, ”मुझे लगता है कि उन्हें संवैधानिक प्रक्रिया की समझ नहीं है. राज्यसभा के सभापति या उपसभापति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता.” उन्होंने कहा कि महाभियोग प्रस्ताव ”शायद” नियम 67 (बी) के तहत उस समय लाया जा सकता है जब राज्यसभा के सभापति पद पर बैठा व्यक्ति किसी तरह की अनुशासनहीनता या पक्षपातपूर्ण या ऐसे कृत्य में शामिल होता है जो संविधान के दायरे से बाहर हो.

उन्होंने कहा, ”इस मामले में (सदन में) सभापति से ज्यादा विनम्र कोई नहीं है. वह हाथ जोड़कर सभी से बात करते हैं.” उन्होंने विपक्ष के इस आरोप को भी खारिज कर दिया कि धनखड़ ने उच्च सदन की कार्यवाही पक्षपातपूर्ण तरीके से संचालित की. शर्मा ने कहा, ”उन्होंने (धनखड़ ने) पहले कांग्रेस और विपक्षी दलों के नेताओं को बुलाया और सत्ता पक्ष के कुछ लोगों को बाद में बोलने की इजाजत दी.” उन्होंने कहा, ”इसलिए इस आधार पर राज्यसभा के सभापति के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता है.” शर्मा ने कहा, ”यहां न तो अनुशासनहीनता का कोई मामला है, न ही पक्षपातपूर्ण होने का मामला है और न ही ऐसा कोई कृत्य है जो संविधान के दायरे से बाहर हो.”

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